अंधकार पर प्रकाश की विजय के प्रतीक दीपोत्सव में आज मनाई जा रही छोटी दीवाली, जानें पूजा के मुहूर्त
अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और अज्ञान पर ज्ञान की विजय के पर्व दीपोत्सव का आज दूसरा दिन है यानि छोटी दीवाली। धनतेरस से प्रकाश प्रर्व प्रारंभ हो चुका है। यह पंच दिवसीय महोत्सव न केवल दीपों की ज्योति से आलोकित होता है, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और आत्मशुद्धि के भावों से भी ओतप्रोत होता है। 23 अक्टूबर को भैया दूज के साथ दीपोत्सव पूर्ण होगा।
इस बार भी दीपावली को लेकर उहापोह चल रही है कि दीपावली 20 अक्टूबर को मनायें या फिर 21 अक्टूबर को। 20 अक्टूबर को अपराह्न 03:44 से अमावस्या वृश्चिक लग्न में लग रही है जो 21 अक्टूबर को शाम 05:55 पर्यंत रहेगी, इसलिए 20 अक्टूबर को अमावस्या प्रदोष काल व पूर्ण रात्रि व्यपिनी है, जो शास्त्र नियमानुसार ही है। किन्तु अगले दिन ना तो प्रदोष काल और ना ही रात्रि व्यपिनी है। अत: 20 अक्टूबर को ही लक्ष्मी पूजा श्रेष्ठ है।
पहला दिवसः धनतेरस से शुरू हुआ प्रकाश पर्व
दीपावली उत्सव के पहले दिन धनतेरस के दिन जहां लोगों ने बर्तन और चांदी के सिक्के व लक्ष्मी गणेश की खरीददारी की, वहीं आज ही के दन भगवान धन्वंतरि की पूजा उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना के लिए की गई। कल से ही यम पंचक का आरंभ हो गया है, जिसमें अकाल मृत्यु निवारण हेतु यमराज की पूजा और दीपदान का विशेष महत्व है। इन दिनों में गृहप्रवेश, मुंडन, उपनयन, गृह निर्माण जैसे शुभ कार्यों से परहेज़ करना चाहिए।
दूसरा दिवसः रूप चतुर्दशी (रूप चौदस)

दीपोत्सव के अंतर्गत आज रूप चतुर्दशी मनाई जा रही है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व तेल से मालिश कर स्नान करें और सुन्दर रूप प्राप्ति की भगवान से प्रार्थना करें व यमराज का दीपक जलाकर विष्णु की पूजा का तथा प्रदोष काल में मां लक्ष्मी व शिव की आराधना करें। इस दिन तिल के तेल से मालिश करने के बाद 'ॐ रूपम देहि जयम देहि यशो देहि द्विषो जहि' मंत्र का जप करते हुए पवित्र जल से स्नान करना चाहिए। तन की सुंदरता का उपाय करने के बाद शाम के समय सुख-सौभाग्य की कामना लिए दीपदान करना चाहिए।
अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त
रूप चौदस पर किया जाने वाला अभ्यंग स्नान हमेशा चंद्रोदय के समय और सूर्योदय से पहले चतुर्दशी तिथि के समय किया जाता है, इसलिए इसका शुभ मुहूर्त इस साल 20 अक्टूबर 2025 को प्रात:काल 05:13 से लेकर 06:25 बजे तक रहेगा।
तीसरा दिवसः दीपावली महापर्व एवं लक्ष्मी पूजन

दीपोत्सव के तीसरे दिन यानि कल दीपावली मनाई जाएगी। दीपावली पर पूजन का विशेष महत्व होता है। दीवाली पूजन स्थिर लग्न में करना श्रेयस्कर होता है क्योंकि लक्ष्मी चंचला है, अत: स्थिर लग्न में की गयी पूजा स्थिर लक्ष्मी प्रदान करती है।
20 अक्टूबर को अपराह्न 03:44 बजे से अमावस्या प्रारम्भ हो जायेगी जो कि प्रदोष काल व रात्रि व्यापिनी होने से श्रेष्ठ है। निम्नलिखित चार लग्न ज्योतिष में स्थिर माने जाते हैं एवं लक्ष्मी पूजा के लिये उत्तम माने जाते हैं। ये हैः- वृश्चिक लग्न, कुम्भ लग्न, वृषभ लग्न और सिंह लग्न।
वृश्चिक लग्न पूजनः- दीवाली के दिन प्रातःकाल वृश्चिक लग्न प्रबल होता है। मन्दिरों, अस्पतालों, होटलों, विद्यालयों और महाविद्यालयों के लिये वृश्चिक लग्न के समय लक्ष्मी पूजा सर्वाधिक उपयुक्त होती है। विभिन्न टीवी और फिल्म कलाकारों, शो एन्करों, बीमा अभिकर्ताओं तथा जो लोग सार्वजनिक मामलों एवं राजनीति से जुड़े हैं, उन्हें भी वृश्चिक लग्न के दौरान देवी लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिये।
कुम्भ लग्न पूजनः- दीवाली के दिन मध्यान्ह के समय कुम्भ लग्न प्रबल होता है। जो रोगग्रस्त एवं ऋणग्रस्त हैं, भगवान शनि के दुष्प्रभाव से मुक्ति प्राप्त करने के इच्छुक हैं, जिनके व्यापार में धन हानि हो रही है तथा व्यापार में भारी ऋण में है, उनके लिये कुम्भ लग्न में लक्ष्मी पूजा करना उत्तम होता है।
वृषभ लग्न पूजनः- दीवाली के दिन सायाह्नकाल में वृषभ लग्न प्रबल होता है। गृहस्थ, विवाहित, सन्तानवान, मध्यम वर्गीय, निम्न वर्गीय, ग्रामीण, किसान, वेतनभोगी तथा जो सभी प्रकार के व्यवसायों में संलिप्त व्यापारी हैं, उनके लिये वृषभ लग्न लक्ष्मी पूजा का सर्वोत्तम समय है। वृषभ लग्न को दीवाली पर लक्ष्मी पूजा हेतु सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है।
सिंह लग्न पूजनः- दीवाली के दिन मध्य रात्रि के समय सिंह लग्न प्रबल होता है। सिंह लग्न का मुहूर्त, साधु-सन्तों, सन्यासियों, विरक्तों एवं तान्त्रिकों के लिये लक्ष्मी पूजा एवं देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम मुहूर्त होता है।
दीपावाली (20 अक्तूबर) को लक्ष्मी पूजा के मुहूर्त इस प्रकार हैं-
कुंभ लग्नः अपराह्न 03:44 से 04:07 बजे तक। (अवधि – 23 मिनट)। यह गृहस्थ व व्यवसाइयों हेतु उत्तम है।
वृषभ लग्नः सायंकाल 07:08 से रात्रि 09:03 बजे तक (अवधि – 1 घंटा 56 मिनट)। श्री विद्या के उपासकों और भक्तों व तंत्र हेतु।
सिंह लग्नः मध्यरात्रि 01:38 बजे से 03:56 बजे 21 अक्टूबर (अवधि – 2 घंटे 17 मिनट)
चौथा दिवसः श्री गोवर्धन पूजा

दीपोत्सव के अंतर्गत श्री गोवर्धन पूजा महोत्सव 22 अक्तूबर को मनाया जाएगा। श्री गोवर्धन पूजा के लिए घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं। इसके मध्य में भगवान कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें। इस दिन 56 भोग या अन्नकूट तैयार करें और भगवान श्रीकृष्ण तथा गोवर्धन महाराज को अर्पित करें। इसमें कढ़ी-चावल, बाजरा, और माखन-मिश्री जरूर शामिल करें। इस दिन गाय की पूजा का विशेष महत्व है।
गोवर्धन पूजा का समय
गोवर्धन पूजा का प्रातःकाल मुहूर्त - 06:26 बजे स से सायंकाल 08:42 बजे तक है।
(अवधि - 02 घण्टे 16 मिनिट)।
गोवर्धन पूजा का सायंकालीन मुहूर्त – अपराह्न 03:29 बजे से 05:44 बजे तक। (अवधि - 02 घण्टे 16 मिनिट)।
पूजा करते समय गोवर्धन पर्वत की बनाई गई आकृति की सात बार परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय वैदिक मंत्रों का जाप करें। इस दिन भगवान कृष्ण के मंदिर में दर्शन के लिए जरूर जाएं।
पंचम दिवसः भाई दूज (यम द्वितीया)

दीपोत्सव के पंचम दिवस यानि अंतिम भाई दूज, बृहस्पतिवार, 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा। दीपावली के बाद की दौज को यम द्वितीया भी कहते हैं। इस दिन मान्यता के अनुसार भाई-बहन मथुरा में यमुना नदी के विश्राम घाट पर परस्पर हाथ पकड़कर स्नान करें व नवीन वस्त्र एक-दूसरे को दें। ऐसा करने से यम कि त्रास समाप्त होती है तथा भाई को बहन के घर जाकर भोजन करने से आकस्मिक दुर्घटना व अकाल मृत्यु का दुर्योग समाप्त होता है।
भाई दूज के शुभ मुहूर्त
भाई दूज के मुहूर्त 23 अक्तूबर को अपराह्न 01:13 बजे से अपराह्न 03:28 बजे तक (अवधि - 02 घण्टे 15 मिनिट) शुभ है।
वैसे द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर 2025 को सायंकाल 08:16 बजे से प्रारंभ हो जाएगी जो 23 अक्तूबर को रात्रि 10:46 बजे तक रहेगी।

-प्रस्तुतिः- दैवज्ञ पं. बृजमोहन दीक्षित, आगरा। - मोबाइलः- 9893118788