मोदी-योगी पर तीखे राजनीतिक हमलों के लिए चर्चित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अब गंभीर आपराधिक संकट में, नाबालिग छात्रों के यौन शोषण के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने के बाद प्रयागराज पुलिस की वाराणसी में दस्तक, पॉक्सो जांच से बढ़ी बेचैनी, कानून के शिकंजे में फंसी धर्म और राजनीति की विवादित धुरी, अब तक समर्थन कर रही सपा-कांग्रेस ने भी साधी चुप्पी

प्रयागराज/वाराणसी। अपने आक्रामक राजनीतिक बयानों, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखी टिप्पणियों के लिए चर्चा में रहने वाले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस समय एक गंभीर आपराधिक केस में घिरते नजर आ रहे हैं। दो छात्रों के कथित यौन शोषण के मामले में झूंसी थाना में एफआईआर दर्ज होने के बाद प्रयागराज पुलिस की टीम जांच के सिलसिले में वाराणसी पहुंच चुकी है। माना जा रहा है कि पुलिस वाराणसी में प्रवास कर रहे अविमुक्तेश्वरानंद से पूछताछ कर सकती है।

Feb 23, 2026 - 14:16
Feb 23, 2026 - 14:21
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मोदी-योगी पर तीखे राजनीतिक हमलों के लिए चर्चित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अब गंभीर आपराधिक संकट में, नाबालिग छात्रों के यौन शोषण के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने के बाद प्रयागराज पुलिस की वाराणसी में दस्तक, पॉक्सो जांच से बढ़ी बेचैनी, कानून के शिकंजे में फंसी धर्म और राजनीति की विवादित धुरी, अब तक समर्थन कर रही सपा-कांग्रेस ने भी साधी चुप्पी

सूत्रों के अनुसार, एफआईआर में अविमुक्तेश्वरानंद का नाम आने के बाद वे अपने बचाव की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। सोमवार सुबह उन्होंने वाराणसी में वकीलों के साथ बैठक कर गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट से स्टे लेने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। हालांकि, बाद में प्रेस से बातचीत में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वे पुलिस जांच का सामना करेंगे और कहीं भागने वाले नहीं हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन छात्रों के शोषण का आरोप लगाया गया है, वे उनके गुरुकुल से संबंधित नहीं हैं।

इस मामले को लेकर अविमुक्तेश्वरानंद ने यूपी पुलिस पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जनता का भरोसा राज्य पुलिस पर नहीं है, इसलिए जांच किसी गैर-भाजपा शासित राज्य की पुलिस से कराई जानी चाहिए। उनके इस बयान ने पूरे प्रकरण को एक नया राजनीतिक रंग दे दिया है। खास बात यह है कि यह केस दर्ज होने से पहले जो कांग्रेस और समाजवादी पार्टी शंकराचार्य के समर्थन में खुलकर खड़ी थीं, वे भी चुप्पी साध गई हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद चूंकि पीएम मोदी और सीएम योगी पर कटाक्ष करते रहते हैं, इसलिए कांग्रेस और सपा को वे रास आते हैं।

प्रयागराज पुलिस इस केस को अत्यंत गंभीरता से ले रही है। केस दर्ज होने के बाद पुलिस शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी के साथ माघ मेला क्षेत्र का दौरा कर उस स्थान का निरीक्षण कर चुकी है, जहां माघ मेला 2026 और महाकुंभ 2025 के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का शिविर लगा था। मौके का नक्शा भी तैयार किया गया है, ताकि जांच में किसी भी तथ्य को नजरअंदाज न किया जा सके।

यह मामला पहली बार तब सुर्खियों में आया, जब 24 जनवरी को आशुतोष ब्रह्मचारी ने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर से शिकायत की थी कि माघ मेला 2026 और महाकुंभ 2025 के दौरान बच्चों का शोषण किया गया। पुलिस द्वारा कार्रवाई न होने पर उन्होंने अदालत का रुख किया। इसके बाद पॉक्सो कोर्ट में 13 फरवरी को दो नाबालिग बच्चों को पेश किया गया, जहां कैमरे के सामने उनके बयान दर्ज हुए। इन्हीं बयानों के आधार पर कोर्ट ने झूंसी थाने को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।

एफआईआर में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अलावा उनके एक शिष्य और कुछ अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। अब सवाल यह है कि जिन शंकराचार्य की पहचान सत्ता के खिलाफ मुखर आवाज और राजनीतिक बयानबाजी से रही है, वही अब कानूनी और बाल यौन शोषण के गंभीर आपराधिक शिकंजे में फंसते दिखाई दे रहे हैं। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और अदालती कार्रवाई तय करेगी कि यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।

पुलिस द्वारा मामला दर्ज किये जाने के बाद से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कैंप की अब तक की गतिविधियां देखकर यही पता चलता है कि कैंप में घबराहट है। बचाव के लिए हाईकोर्ट की शरण लेने जैसे विकल्पों पर विचार इस घबराहट की पुष्टि करते हैं।

बता दें कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धार्मिक से ज्यादा राजनीतिक बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं। उनके निशाने पीएम मोदी और सीएम योगी खौस तौर पर रहते हैं। पिछले दिनों माघ मेला में प्रशासन के साथ हुए विवाद के बाद उन्होंने तीखा बयान दिया था कि वे योगी आदित्यनाथ को हिंदू नहीं मानते। उनका यह बयान योगी के प्रशंसकों को नागवार गुजरा था। सीएम योगी भी अविमुक्तेश्वरानंद का बगैर नाम लिए उनके लिए कालनेमि जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर चुके हैं। इसके बाद जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच भी तीखी बयानबाजी देखने को मिली थी।

ताजा मामले को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरांद के समर्थन में कांग्रेस या समाजवादी पार्टी की ओर से कोई बयान नहीं आया है। इसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि यह केस कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ है, इसलिए सपा-कांग्रेस को योगी सरकार पर प्रहार करने का मौका नहीं मिल रहा। 

SP_Singh AURGURU Editor