मध्यस्थ ओमान की बड़ी कूटनीतिक पहल, अमेरिका–ईरान परमाणु गतिरोध सुलझाने को जिनेवा में इस सप्ताह निर्णायक वार्ता, तीसरे दौर में डील फाइनल की कोशिश, क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक दबाव के बीच दुनिया की निगाहें बातचीत पर टिकीं

जिनेवा/मस्कट। मध्य पूर्व की जटिल कूटनीति में एक बार फिर अहम हलचल देखने को मिल रही है। ओमान ने औपचारिक रूप से घोषणा की है कि अमेरिका और ईरान के बीच अगला परमाणु वार्ता दौर इसी सप्ताह स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा शहर में आयोजित किया जाएगा। यह बातचीत लंबे समय से ठप पड़ी परमाणु डील को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक निर्णायक प्रयास के रूप में देखी जा रही है। वैश्विक कूटनीतिक हलकों में इसे बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Feb 23, 2026 - 14:42
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मध्यस्थ ओमान की बड़ी कूटनीतिक पहल, अमेरिका–ईरान परमाणु गतिरोध सुलझाने को जिनेवा में इस सप्ताह निर्णायक वार्ता, तीसरे दौर में डील फाइनल की कोशिश, क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक दबाव के बीच दुनिया की निगाहें बातचीत पर टिकीं
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ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने स्पष्ट किया है कि यह वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ते हुए किसी ठोस समझौते तक पहुंचने के उद्देश्य से बुलाई जा रही है। ओमान इस पूरे संवाद में निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और इससे पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच संपर्क स्थापित कराने में अहम भूमिका निभा चुका है। दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी के बावजूद ओमान की सक्रियता को संतुलन साधने की कोशिश माना जा रहा है।

पिछले सप्ताह जिनेवा में हुए दूसरे दौर की बातचीत में कुछ मार्गदर्शक सिद्धांतों पर सहमति बनी थी, लेकिन परमाणु प्रतिबंधों, निरीक्षण प्रणाली और प्रतिबद्धताओं जैसे अहम मुद्दों पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी थी। अब तीसरे दौर की यह वार्ता उसी अधूरे एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश है। माना जा रहा है कि यदि इस चरण में सहमति बनती है, तो वर्षों से चले आ रहे परमाणु गतिरोध में बड़ी सफलता मिल सकती है।

हालांकि हालात आसान नहीं हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव, रणनीतिक ठिकानों पर निगरानी, घरेलू राजनीतिक दबाव और वैश्विक शक्तियों की नजरें इस वार्ता को बेहद नाजुक बना रही हैं। इसके बावजूद कूटनीति को ही एकमात्र रास्ता मानते हुए दोनों देशों का बातचीत की मेज पर आना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए राहत का संकेत है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जिनेवा वार्ता न केवल अमेरिका और ईरान के रिश्तों की दिशा तय करेगी, बल्कि मध्य पूर्व की सुरक्षा, ऊर्जा बाजार और वैश्विक राजनीतिक संतुलन पर भी इसका दूरगामी असर पड़ेगा। अब दुनिया की निगाहें इस सप्ताह होने वाली इस अहम बैठक पर टिकी हैं।

SP_Singh AURGURU Editor