श्रीकृष्णोत्सव में दूसरे दिन दिखा ब्रज का रंग, मयूर नृत्य से बीन की धुन तक लोक कलाओं ने बांधा समां

मथुरा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उल्लास के बीच मथुरा में श्रीकृष्णोत्सव-2026 के दूसरे दिन ब्रज की लोक संस्कृति और देश के विभिन्न अंचलों की पारंपरिक कलाओं का ऐसा रंग देखने को मिला, जिसने श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच लिया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के मुख्य द्वार से निकली भव्य सांस्कृतिक शोभायात्रा में मयूर नृत्य, राजस्थानी गुजरियों का नृत्य, बहरूपियों की कलाकारी, बीन की धुन, ढोल-नगाड़ों की थाप और संकीर्तन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। जन्माष्टमी पर देश-विदेश से मथुरा पहुंचे श्रद्धालु भी शोभायात्रा की प्रस्तुतियां देखने के लिए रास्ते में रुक गए और समूचे मार्ग में पुष्पवर्षा कर कलाकारों का स्वागत किया।

Sep 3, 2026 - 14:27
Sep 3, 2026 - 14:30
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श्रीकृष्णोत्सव में दूसरे दिन दिखा ब्रज का रंग, मयूर नृत्य से बीन की धुन तक लोक कलाओं ने बांधा समां
श्रीकृष्णोत्सव 2026 के दूसरे दिन गुरुवार को निकली सांस्कृतिक यात्रा में राजस्थानी गुजरियों के नृत्य की एक झलक।

सांस्कृतिक यात्रा का नगाड़ा बजाकर शुभारंभ करते यूपी के कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी। 

उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ओर से आयोजित सांस्कृतिक शोभायात्रा का शुभारंभ प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी मिलें मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी सीपी सिंह, सीईओ लक्ष्मी नागप्पन, श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा, सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, परिषद के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी राजीव पांडेय, उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश चंद्र, सहायक अभियंता जीके जैन, राजस्व समन्वयक चंद्रिका प्रसाद, समन्वयक चंद्र प्रताप सिकरवार, संस्कार भारती के सुरेंद्र कुमार गुप्ता, मान मंदिर के सुनील सिंह, अनूप शर्मा और मनोज फौजदार मौजूद रहे। अधिकारियों और अतिथियों ने लोक कलाकारों का उत्साह बढ़ाया तथा ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच शोभायात्रा का आनंद लिया।

सांस्कृतिक यात्रा में शामिल साधु संत। 

लोक रंगों से सजा कारवां

शोभायात्रा में रंग-बिरंगी पारंपरिक पोशाकों में सजे कलाकारों की टोलियां ब्रज की सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत करती हुई आगे बढ़ीं। कहीं बांसुरी की मधुर धुन सुनाई दी तो कहीं ढोल-नगाड़ों की थाप पर कलाकारों ने नृत्य कर माहौल में उत्साह भर दिया। मयूर नृत्य ने श्रद्धालुओं का विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया। विभिन्न कलाकार दलों के संकीर्तन और राधा-कृष्ण से जुड़े भक्ति गीतों ने वातावरण को कृष्णमय बना दिया।

बीन की धुन और बहरूपियों ने खींचा ध्यान

शोभायात्रा में राजस्थानी गुजरियों के नृत्य ने लोक संस्कृति के विविध रंग सामने रखे। रीछ, भालू और लंगूर सहित बहरूपियों की प्रस्तुतियां भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। बीन की मधुर धुन और पारंपरिक लोक वाद्यों की थाप के साथ कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देते हुए आगे बढ़ते रहे। इन प्रस्तुतियों ने रास्ते में मौजूद लोगों को देर तक बांधे रखा।

जन्मस्थान से शुरू होकर फिर वहीं पहुंची शोभायात्रा

सांस्कृतिक शोभायात्रा श्रीकृष्ण जन्मस्थान के मुख्य द्वार से शुरू होकर पोतरा कुंड, गोविंद नगर और डीग गेट होते हुए पुनः श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंची। पूरे मार्ग में स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने कलाकारों का स्वागत किया। जन्माष्टमी के अवसर पर श्रीकृष्ण दर्शन के लिए मथुरा पहुंचे श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या शोभायात्रा देखने के लिए सड़क किनारे जुट गई।

जयघोष से गूंजा पूरा मार्ग

शोभायात्रा में शामिल अलग-अलग टोलियां ब्रज की पारंपरिक लोक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करती रहीं। कहीं भक्ति गीतों की गूंज रही तो कहीं लोक वाद्यों की थाप पर कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। पूरे मार्ग में ‘राधे-राधे’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष गूंजते रहे। श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।

भक्ति, संगीत, नृत्य और लोक संस्कृति के इस संगम ने श्रीकृष्णोत्सव-2026 के दूसरे दिन को यादगार बना दिया। सांस्कृतिक शोभायात्रा ने जहां श्रद्धालुओं को ब्रज की समृद्ध लोक परंपराओं से रूबरू कराया, वहीं जन्माष्टमी के उत्सव में लोक संस्कृति की जीवंत छटा भी बिखेर दी।

SP_Singh AURGURU Editor