नए यूपी बीजेपी अध्यक्ष का काउंटडाउन शुरू, दिल्ली में कल हाईकमान की अहम बैठक, धर्मपाल सिंह तलब
लखनऊ । यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। इसी संबंध में कल शनिवार को दिल्ली में भाजपा हाईकमान की बड़ी बैठक प्रस्तावित है। इसके लिए यूपी बीजेपी के महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह को दिल्ली बुलाया गया है, जहां उनकी बैठक भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष के साथ होने वाली है। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में यूपी अध्यक्ष के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है।
यूपी बीजेपी में हलचल तेज, 8 दिसंबर को नाम का ऐलान संभव
लखनऊ । यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। इसी संबंध में कल शनिवार को दिल्ली में भाजपा हाईकमान की बड़ी बैठक प्रस्तावित है। इसके लिए यूपी बीजेपी के महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह को दिल्ली बुलाया गया है, जहां उनकी बैठक भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष के साथ होने वाली है। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में यूपी अध्यक्ष के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है।
संगठनात्मक सूत्रों के मुताबिक 8 दिसंबर को यूपी के चुनाव प्रभारी पीयूष गोयल लखनऊ पहुंचेंगे और उसी दौरान नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की आधिकारिक घोषणा किए जाने की संभावना जताई जा रही है। यह बदलाव लोकसभा चुनाव 2024 के बाद शुरू हुई भाजपा की राष्ट्रीय संगठनात्मक पुनर्रचना का हिस्सा माना जा रहा है।
पीएम मोदी के साथ बैठक में हो चुकी है चर्चा
दो दिन पहले दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव, प्रदेश अध्यक्षों के फेरबदल और आने वाले संगठनात्मक बदलावों पर विस्तार से चर्चा की गई। निर्णय हुआ कि पहले यूपी में नए अध्यक्ष की नियुक्ति होगी, उसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की घोषणा की जाएगी।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा में कौन?
प्रदेश अध्यक्ष के लिए वर्तमान अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी दूसरे कार्यकाल के मजबूत दावा ठोंके हुए हैं। वह भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा की राजनीति और पश्चिमी यूपी में मजबूत पकड़ रखते हैं। यदि हाईकमान वर्तमान नेतृत्व में स्थिरता चाहता है तो उनके नाम पर फिर से विचार संभव है। दलित कोटे से पूर्व आईपीएस व प्रदेश सरकार में मंत्री असीम अरुण का नाम तेजी से आगे चल रहा है।
वह युवा दलित चेहरा, साफ-सुथरी छवि, संभ्रांत वर्ग और युवाओं में लोकप्रिय होने के कारण हाईकमान की नजर में बेहतर विकल्प माने जा रहे हैं। हालांकि संगठन में अभी कम समय ही हुआ है, लेकिन वह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित चेहरा हैं।
ब्राह्मण समाज में मजबूत पकड़ रखने वाले प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक भी इस दौड़ में शामिल हैं। उनकी संगठनात्मक क्षमता अच्छी मानी जाती है, लेकिन वर्तमान में सरकार में उच्च जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
एक बड़े ओबीसी या दलित चेहरे पर भी विचार
राजनीतिक समीकरणों के हिसाब से भाजपा संभवतः किसी ऐसे संगठनात्मक चेहरे को भी चुने जिसे पंचायत से लेकर विधानसभा तक मजबूत नेटवर्क,जमीन से जुड़े कार्यकर्ता और 2027 विधानसभा चुनाव के लिए प्रभावी नेतृत्व क्षमता हो। इस दौड़ में केन्द्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा, पूर्व सांसद रामशंकर कठेरिया, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, योगेंद्र उपाध्याय सहित कई नामों पर विचार किया जा रहा है।
नए अध्यक्ष के सामने होंगी चुनौतियां
नए अध्यक्ष पर 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां, संगठन का बूथ–स्तर तक पुनर्गठन, युवा और महिला मोर्चा की सक्रियता, दलित–ओबीसी–पिछड़े वर्गों में संगठन का विस्तार और मतदाता सूची में सुधार और बूथ प्रबंधन को मजबूत करने जैसी बड़ी जिम्मेदारी होगी। साथ ही हाल में होने वाले पंचायत चुनाव में पार्टी का परचम फहराने की अहम जिम्मेदारी होगी। इसलिए यूपी भाजपा का अध्यक्ष पद इस समय बेहद रणनीतिक माना जा रहा है। यही कारण है कि यूपी प्रदेश अध्यक्ष का चयन बेहद सोच–समझकर किया जा रहा है।