साइबर ठगी पर बरेली परिक्षेत्र में सख्ती, डीआईजी ने कहा- शिकायत मिलते ही हो कार्रवाई, रकम रोककर पीड़ित को दिलाएं राहत
-आरके सिंह- बरेली। बरेली परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक अजय कुमार साहनी ने साइबर ठगी के मामलों में लापरवाही और देरी पर सख्त रुख अपनाते हुए साइबर हेल्प-डेस्क को अधिक प्रभावी बनाने तथा शिकायत मिलते ही त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि साइबर अपराध के मामलों को लंबित न रखा जाए और ठगी गई रकम को समय रहते रोककर पीड़ितों को वापस दिलाने के लिए हरसंभव प्रभावी कदम उठाए जाएं।
डीआईजी अजय कुमार साहनी ने सोमवार को बरेली परिक्षेत्र के जनपद प्रभारियों—बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था सहित विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं की समीक्षा की। बैठक में साइबर अपराध से जुड़े मामलों, साइबर थानों में दर्ज अभियोगों में हुई कार्रवाई तथा अन्य थानों में साइबर अपराध के मामलों की प्रगति की समीक्षा की गई।
साइबर ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई और पीड़ितों को तत्काल राहत दिलाने पर विशेष जोर दिया गया। पुलिस के अनुसार, बैठक में साइबर अपराध से संबंधित मामलों में ‘लीन अमाउंट’ की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि ठगी की रकम को समय रहते रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि पीड़ितों को धनराशि वापस दिलाई जा सके।
डीआईजी ने साइबर हेल्प-डेस्क के प्रभावी संचालन पर जोर देते हुए कहा कि साइबर ठगी की शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। किसी भी मामले को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए और पीड़ितों को राहत दिलाने में तेजी दिखाई जाए।
बैठक में सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्रभावी निगरानी रखने और अफवाहों का समयबद्ध खंडन करने के निर्देश भी दिए गए। पुलिस एवं मीडिया के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया, ताकि भ्रामक सूचनाओं को समय रहते रोका जा सके।
डीआईजी ने 60 और 90 दिन से लंबित विवेचनाओं का शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही ई-साक्ष्य ऐप का अधिकाधिक उपयोग करने तथा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ई-समन जारी कराकर उनका समयबद्ध तामीला सुनिश्चित करने को कहा गया।
अपराधियों से संबंधित सूचनाओं के लिए ‘यक्ष ऐप’ पर डेटा की नियमित और शत-प्रतिशत फीडिंग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि ऐप पर उपलब्ध जानकारी का प्रभावी इस्तेमाल अपराधियों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई में किया जाए।
समीक्षा बैठक में मादक पदार्थों की तस्करी, गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्ति जब्ती, गोकशी एवं गौ तस्करी, महिला उत्पीड़न, हत्या, लूट, वाहन चोरी, दुष्कर्म, दहेज हत्या, पॉक्सो, अपहरण और धर्मांतरण सहित गंभीर अपराधों में की गई कार्रवाई की भी समीक्षा की गई।
सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए ‘जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट’ अभियान की भी समीक्षा हुई। डीआईजी ने यातायात नियमों का सख्ती से अनुपालन कराने, लोगों में जागरूकता बढ़ाने और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए।
मिशन शक्ति के तहत महिला सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन से जुड़े अभियानों तथा महिला बीट प्रणाली को मजबूत करने के लिए की जा रही कार्रवाई की भी समीक्षा की गई।
अंत में डीआईजी अजय कुमार साहनी ने जन शिकायतों का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने, लंबित मामलों को निर्धारित समय में निपटाने तथा अपराध नियंत्रण एवं कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।