आगरा में साइबर ठगी, इंस्पेक्टर के 4 लाख उड़ाए, नौकरी के नाम पर 13.25 लाख ठगे
आगरा में साइबर ठगी के दो मामलों में कुल 17.25 लाख रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत सामने आई है। पहले मामले में आगरा में तैनात सीआईडी इंस्पेक्टर लखन लाल मिश्र के पंजाब नेशनल बैंक खाते से 20 सितंबर को सात बार में चार लाख रुपये निकाले जाने का आरोप है। उनके मोबाइल पर निकासी का कोई मैसेज नहीं आया। दूसरे मामले में न्यू जनता कॉलोनी निवासी अरविंद कुमार सक्सेना ने आरोप लगाया कि वीरू शर्मा और उसके कथित सहयोगी ने डीजीपी के पीआरओ से संबंध होने का दावा कर उनके बेटे को एएसआई क्लर्क की नौकरी दिलाने के नाम पर 13.25 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने व्हाट्सएप पर परीक्षा परिणाम की कथित फर्जी पीडीएफ भी भेजी। दोनों मामलों में साइबर क्राइम थाने में शिकायत की गई है और पुलिस ने साक्ष्य जुटाकर कार्रवाई करने की बात कही है।
बैंक खाते से रकम निकली, मोबाइल पर मैसेज तक नहीं आया, दूसरी ओर सरकारी नौकरी के सपने को बनाया ठगी का हथियार
आगरा। ताजनगरी में साइबर ठगों ने ठगी के दो अलग-अलग मामलों में लोगों को लाखों रुपये की चपत लगाई है। एक मामले में आगरा में तैनात सीआईडी इंस्पेक्टर के बैंक खाते से सात बार में चार लाख रुपये निकाल लिए गए, लेकिन उनके मोबाइल पर रकम निकासी का कोई मैसेज तक नहीं आया। वहीं, दूसरे मामले में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक परिवार से 13.25 लाख रुपये ठग लिए गए। आरोपियों ने खुद को प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताकर भरोसा जीता और डीजीपी के पीआरओ के नाम का इस्तेमाल कर नौकरी में चयन कराने का दावा किया। विश्वास पुख्ता करने के लिए परीक्षा परिणाम की फर्जी पीडीएफ भी भेजी गई।
दोनों मामलों में पीड़ित पक्ष ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत की है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शिकायतों के आधार पर साक्ष्य जुटाकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इन घटनाओं ने एक बार फिर बैंक खातों की सुरक्षा और सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली ठगी को लेकर सतर्क रहने की जरूरत को रेखांकित किया है।
पहला मामला: सीआईडी इंस्पेक्टर के खाते से सात बार में निकले चार लाख रुपये
साइबर ठगी का पहला मामला प्रयागराज की पीपलगांव शाखा में संचालित पंजाब नेशनल बैंक के खाते से जुड़ा है। मूल रूप से प्रयागराज के खेलगांव पब्लिक स्कूल, बजहा क्षेत्र के निवासी लखन लाल मिश्र सीआईडी इंस्पेक्टर हैं और वर्तमान में आगरा में तैनात हैं। उनका बैंक खाता पीएनबी की पीपलगांव शाखा में है।
लखन लाल मिश्र के मुताबिक, 20 सितंबर को उनके खाते से सात बार में कुल चार लाख रुपये निकाल लिए गए। हैरानी की बात यह रही कि खाते से लगातार रकम निकलने के बावजूद उनके मोबाइल पर निकासी से संबंधित कोई संदेश नहीं आया। इस कारण उन्हें तत्काल खाते से रकम निकलने की जानकारी नहीं हो सकी। बाद में जब उन्होंने अपना बैंक खाता चेक किया तो रकम गायब होने का पता चला। खाते से चार लाख रुपये निकाले जाने की जानकारी मिलते ही उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई।
बिना मैसेज के निकली रकम, जांच में जुटी पुलिस
इस मामले में सबसे अहम पहलू यह है कि सात अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए रकम निकाली गई, लेकिन पीड़ित के मोबाइल पर कोई अलर्ट नहीं पहुंचा। हालांकि, रकम किस तरीके से निकाली गई और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
दूसरा मामला: डीजीपी का पीआरओ बताकर सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा
साइबर ठगी का दूसरा मामला न्यू जनता कॉलोनी, मुस्तफा क्वार्टर क्षेत्र का है। यहां रहने वाले अरविंद कुमार सक्सेना ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को एएसआई क्लर्क की नौकरी दिलाने का झांसा देकर 13.25 लाख रुपये ठग लिए गए। अरविंद सक्सेना के मुताबिक, उनकी पत्नी सुनीता सक्सेना शिक्षिका हैं और रोहता क्षेत्र में बीएलओ का काम देख रही हैं। इसी दौरान उनकी मुलाकात वीरू शर्मा नाम के व्यक्ति से हुई। उसने खुद को समाजसेवी बताया और दावा किया कि लखनऊ में बड़े अधिकारियों तक उसकी पहुंच है।
आरोप है कि कुछ समय बाद वीरू शर्मा ने फोन कर बताया कि अरविंद सक्सेना के बेटे ने एएसआई क्लर्क की परीक्षा दी है और वह उसका चयन करा सकता है। उसने अपने संबंध डीजीपी के पीआरओ से होने की बात कही। इस दावे पर भरोसा जमाने के लिए उसने राज शर्मा नाम के एक व्यक्ति से फोन पर बात भी कराई, जिसे डीजीपी का पीआरओ बताया गया।
कई बार में वसूले 13.25 लाख रुपये, व्हाट्सएप पर भेजा फर्जी परिणाम
अरविंद सक्सेना का आरोप है कि नौकरी लगवाने का भरोसा देकर आरोपियों ने उनसे अलग-अलग मौकों पर कुल 13.25 लाख रुपये ले लिए। परिवार को विश्वास में बनाए रखने के लिए व्हाट्सएप पर परीक्षा परिणाम की एक पीडीएफ भी भेजी गई। पीड़ित परिवार को लगा कि बेटे के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। लेकिन जब अरविंद सक्सेना ने अधिकृत वेबसाइट पर परीक्षा परिणाम देखा और उसमें अपने बेटे का नाम नहीं पाया, तो उन्हें संदेह हुआ। जांच करने पर कथित तौर पर भेजे गए परिणाम की सच्चाई सामने आई और उन्हें ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम थाने में तहरीर देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मामले में डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि साक्ष्य जुटाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
एक मामले में बैंक खाते पर सेंध, दूसरे में सरकारी नौकरी के सपने से खिलवाड़
दोनों घटनाओं में ठगी का तरीका अलग-अलग बताया गया है। सीआईडी इंस्पेक्टर के मामले में बैंक खाते से बिना तत्काल जानकारी मिले रकम निकाले जाने की शिकायत है, जबकि दूसरे मामले में कथित तौर पर अधिकारियों से संपर्क और सरकारी नौकरी में चयन कराने का भरोसा देकर परिवार से बड़ी रकम ली गई। पहले मामले में चार लाख रुपये और दूसरे मामले में 13.25 लाख रुपये की कथित ठगी को मिलाकर कुल 17.25 लाख रुपये का मामला सामने आया है। दोनों शिकायतों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वारदातों में कौन-कौन शामिल था और रकम किस माध्यम से निकाली या हस्तांतरित की गई।
नौकरी के नाम पर ठगी से बचने के लिए रहें सतर्क
सरकारी नौकरी में चयन कराने के नाम पर किसी व्यक्ति को निजी तौर पर रकम देने से बचना चाहिए। परीक्षा परिणाम और चयन सूची की पुष्टि हमेशा संबंधित विभाग या भर्ती संस्था की अधिकृत वेबसाइट से करनी चाहिए। इसी तरह, बैंक खाते से जुड़ी किसी भी असामान्य गतिविधि पर तुरंत बैंक से संपर्क कर खाते की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। आगरा में सामने आए ये दोनों मामले बताते हैं कि साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्कता, आधिकारिक जानकारी का सत्यापन और समय रहते शिकायत करना बेहद जरूरी है।