चीन-नेपाल कनेक्शन वाला साइबर ठगी सिंडिकेट ध्वस्त, बरेली पुलिस की बड़ी कार्रवाई में पांच शातिर गिरफ्तार, सरगना की तलाश

-आरके सिंह- बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली में पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी के एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह चीन के गैंगस्टरों से मिलकर नेपाल में बने ठिकानों के जरिए भारत में साइबर फ्रॉड को अंजाम दे रहा था। पुलिस ने इनके पास से हथियार, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंक खातों के दस्तावेज और करोड़ों के ट्रांजेक्शन से जुड़ा डाटा बरामद किया है। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि गैंग का मुख्य सरगना सुमित कुमार (नवाबगंज, बरेली) और उसका भांजा निर्मल अभी फरार हैं।

Apr 19, 2026 - 12:39
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चीन-नेपाल कनेक्शन वाला साइबर ठगी सिंडिकेट ध्वस्त, बरेली पुलिस की बड़ी कार्रवाई में पांच शातिर गिरफ्तार, सरगना की तलाश
बरेली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये गये साइबर ठग और इनके बारे में बताते पुलिस अधिकारी।

घेराबंदी कर पकड़ा गया गैंग

थाना कैंट प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार धौर को मुखबिर से सूचना मिली कि एक साइबर फ्रॉड गैंग काली स्कॉर्पियो कार में घूमकर ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहा है। सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने घेराबंदी कर वाहन को पकड़ा और उसमें सवार पांच आरोपियों को दबोच लिया।

गिरफ्तार अभियुक्तों के नाम और पते

पुलिस द्वारा शाकिब अली, निवासी बक्सरिया मोहल्ला, फरीदपुर, बरेली, राजकुमार, निवासी बल्लिया, थाना भमोरा, बरेली, आशीष सिंह, निवासी जागृति नगर, सुभाष नगर, बरेली, डॉ. सचेंद्र कुमार (BHMS), निवासी ग्राम सदरपुर, पोस्ट सिधौली, थाना अकबरपुर, अंबेडकरनगर, बबलू उर्फ माधोराम, निवासी अगानपुर, टिकैतनगर, बाराबंकी गिरफ्तार किया गया है।

बरामदगी में क्या-क्या मिला

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 01 चालू लैपटॉप, 07 मोबाइल फोन, 03 बैंक चेकबुक, 11 डेबिट/क्रेडिट कार्ड व आईडी, 01 ट्रस्ट की मोहर, 01 स्कॉर्पियो कार (अपराध में प्रयुक्त), ट्रस्ट व बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज, 02 अवैध तमंचे (बोर 315/35), 04 जिंदा कारतूस और मोबाइल/डिवाइस में ठगी से जुड़ा भारी डाटा बरामद किया है।

524 शिकायतें और 1.55 करोड़ का लेनदेन

जांच में सामने आया कि गैंग के 22 बैंक खातों के खिलाफ एनसीआरपी पोर्टल पर 524 साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज हैं। मोबाइल डेटा में 1.55 करोड़ रुपये तक के ट्रांजेक्शन की जानकारी मिली है। ये खाते केरल तक फैले हुए पाए गए हैं।

गैंग की पूरी कार्यप्रणाली

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि गिरोह चार स्तरों पर काम करता था। गैंग का ऑपरेटर- नेपाल में बैठे चीनी हैंडलर। पैनल- भारत में ऑपरेशन संभालने वाले (मुख्य सरगना सुमित कुमार, नवाबगंज), एजेंट- शिकार तलाशने वाले (शाकिब)  और मीडियेटर- फर्जी ट्रस्ट व बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले (बबलू, राजकुमार, आशीष)। होल्डर- जिनके खातों का उपयोग होता था (डॉ. सचेंद्र)।

APK फाइल से बैंक खातों पर कब्जा

गैंग SMS Listener नाम की APK फाइल का इस्तेमाल करता था। इसके जरिए पीड़ित के मोबाइल के एसएमएस और बैंकिंग एक्सेस को कंट्रोल कर लिया जाता था। इसके बाद ठगी की रकम को एक क्लिक में मल्टी-लेयर खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था और बाद में एटीएम या चेक के जरिए कैश निकाल लिया जाता था।

विदेशी कनेक्शन और ट्रेनिंग का खुलासा

अभियुक्त शाकिब ने बताया कि उसकी मुलाकात राहुल उर्फ आकाश जैन (मध्य प्रदेश निवासी), जो वर्तमान में दिल्ली के साकेत थाना क्षेत्र के मुकदमे में तिहाड़ जेल में बंद है, से मजनू का टीला में हुई थी। उसी ने उसे साइबर ठगी का तरीका सिखाया। उसने यह भी बताया कि चीन के ऑपरेटर नेपाल में ठिकाने बनाकर भारत में अपने पैनल के जरिए नेटवर्क चलाते हैं।

गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज

आरोपियों के खिलाफ थाना कैंट, बरेली में BNS की विभिन्न धाराओं, आईटी एक्ट की धारा 66C/66D और आयुध अधिनियम 3/25 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

क्षेत्राधिकारी आशुतोष शिवम और शिवम आशुतोष ने बताया कि यह गिरोह लगातार लोकेशन बदलकर काम करता था और हर सदस्य का हिस्सा तय होता था। पुलिस अब फरार सरगना और अन्य नेटवर्क की तलाश में जुटी है।

SP_Singh AURGURU Editor