आगरा में चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर साइबर स्ट्राइक, बाह निवासी पर एफआईआर, 48 घंटे में दूसरा केस दर्ज
आगरा साइबर क्राइम थाने ने बाह निवासी कौशल किशोर के खिलाफ चाइल्ड पोर्नोग्राफी मामले में एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई एनसीआरबी साइबर टिपलाइन की रिपोर्ट के आधार पर की गई। पुलिस व्हाट्सएप नंबर और आईपी एड्रेस के जरिए आरोपी तक पहुंची। इससे पहले सिकंदरा निवासी गीतम सिंह के खिलाफ भी इसी तरह का मुकदमा दर्ज हो चुका है। बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट के मामलों में पुलिस जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई कर रही है।
एनसीआरबी साइबर टिपलाइन की रिपोर्ट पर हरकत में आई पुलिस, व्हाट्सएप नंबर और आईपी एड्रेस के जरिए आरोपी तक पहुंची जांच
आगरा। आगरा में बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट के प्रसार के खिलाफ साइबर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बाह निवासी कौशल किशोर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की साइबर टिपलाइन से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर की गई है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की धारा 67B के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, साइबर क्राइम थाना पुलिस को एनसीआरबी साइबर टिपलाइन के माध्यम से सूचना मिली थी कि एक व्हाट्सएप नंबर के जरिए बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री का प्रसार किया जा रहा है। शिकायत मिलने के बाद साइबर टीम ने तकनीकी जांच शुरू की और संबंधित मोबाइल नंबर तथा आईपी एड्रेस का विश्लेषण किया। जांच के दौरान डिजिटल ट्रेल के आधार पर पुलिस बाह क्षेत्र निवासी कौशल किशोर तक पहुंची।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 67B के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इस धारा के अंतर्गत बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री का निर्माण, प्रसारण, संग्रहण अथवा साझा करना गंभीर अपराध माना जाता है। साइबर थाना पुलिस अब आरोपी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है।
गौरतलब है कि शनिवार को भी इसी तरह के मामले में सिकंदरा स्थित आवास विकास कॉलोनी निवासी गीतम सिंह के खिलाफ साइबर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। लगातार दो दिनों में दर्ज हुए इन मामलों ने साइबर अपराधों को लेकर पुलिस और जांच एजेंसियों की सतर्कता को उजागर किया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट के मामलों में शासन की "जीरो टॉलरेंस" नीति के तहत कार्रवाई की जा रही है। साइबर अपराधियों की पहचान के लिए आधुनिक तकनीकों और डिजिटल फॉरेंसिक जांच का सहारा लिया जा रहा है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय कानून का पालन करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।