आगरा के नामी अस्पताल पर साइबर हमला, रैनसमवेयर ने लॉक किया सर्वर, डिजिटल सेवाएं ठप
आगरा के दिल्ली गेट स्थित एक प्रतिष्ठित अस्पताल पर 8 जुलाई को रैनसमवेयर हमला हुआ, जिससे अस्पताल का SQL सर्वर, बैकअप फाइलें और टैली सॉफ्टवेयर एन्क्रिप्ट हो गए। हमले के कारण कई डिजिटल सेवाएं प्रभावित हुईं। अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल सर्वर को नेटवर्क से अलग कर साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस को सिस्टम से रैनसम नोट मिला है और डिजिटल सबूतों के आधार पर जांच जारी है।
आगरा। शहर के दिल्ली गेट क्षेत्र स्थित एक नामी निजी अस्पताल पर बड़े साइबर हमले का मामला सामने आया है। रैनसमवेयर अटैक के चलते अस्पताल का मुख्य सर्वर लॉक हो गया, जिससे अस्पताल की कई महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाएं और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो गए। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया और तत्काल साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।
जानकारी के अनुसार, 8 जुलाई की शाम अस्पताल के आईटी सिस्टम पर अचानक संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं। जांच करने पर पता चला कि अस्पताल का SQL सर्वर, बैकअप फाइलें और टैली सॉफ्टवेयर रैनसमवेयर की चपेट में आ गए हैं। साइबर अपराधियों ने सर्वर में मौजूद डेटा को एन्क्रिप्ट कर दिया, जिसके कारण कई विभागों का कामकाज बाधित हो गया।
हमले की जानकारी मिलते ही अस्पताल की तकनीकी टीम ने तत्काल सर्वर को नेटवर्क से अलग कर दिया, ताकि संक्रमण अन्य सिस्टम तक न फैल सके और नुकसान को सीमित किया जा सके। इस दौरान अस्पताल की कई डिजिटल सेवाएं प्रभावित रहीं, जिससे कर्मचारियों और मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि साइबर हमलावरों ने सिस्टम में एक रैनसम नोट छोड़ा है। इस नोट में डेटा को दोबारा एक्सेस करने के बदले फिरौती की मांग किए जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, फिरौती की रकम और हमले के पीछे मौजूद गिरोह के बारे में अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने साइबर क्राइम थाने में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस और साइबर विशेषज्ञों की टीम डिजिटल सबूतों को खंगाल रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हमलावरों ने अस्पताल के नेटवर्क में किस माध्यम से सेंध लगाई।
साइबर क्राइम पुलिस ने सर्वर लॉग, नेटवर्क गतिविधियों और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि रैनसमवेयर हमले के स्रोत और हमलावरों की पहचान के लिए फोरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संस्थान साइबर अपराधियों के निशाने पर रहते हैं, क्योंकि उनके पास बड़ी मात्रा में संवेदनशील डेटा और महत्वपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद होते हैं। ऐसे में अस्पतालों और संस्थानों को अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत करने की जरूरत है।