यूनिवर्सिटी में ‘दंगल’, कर्मचारी संघ महामंत्री और प्रधान सहायक आपस में भिड़े

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में गुरुवार को परीक्षा नियंत्रक कार्यालय में कर्मचारी संघ के महामंत्री सुमित चौधरी और प्रधान सहायक टीकम कुमार के बीच मारपीट का आरोप लगा। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच विवाद की शुरुआत विश्वविद्यालय आवास में हुई थी, जो कार्यालय तक पहुंच गई। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तहरीर नहीं दी गई। तीन दिन में विश्वविद्यालय में यह तीसरा बड़ा विवाद है—इससे पहले छात्रा द्वारा क्लासमेट की पिटाई और एमएससी छात्रा द्वारा रैगिंग के आरोप का मामला सामने आ चुका है। लगातार घटनाओं के बावजूद सख्त कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

Oct 8, 2026 - 17:09
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यूनिवर्सिटी में ‘दंगल’, कर्मचारी संघ महामंत्री और प्रधान सहायक आपस में भिड़े

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में विवादों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को परीक्षा नियंत्रक कार्यालय में दो कर्मचारियों के बीच मारपीट का मामला सामने आने से विश्वविद्यालय में हड़कंप मच गया। आरोप है कि कर्मचारी संघ के महामंत्री सुमित चौधरी ने परीक्षा नियंत्रक कार्यालय के प्रधान सहायक टीकम कुमार के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की। घटना के बाद काफी देर तक विश्वविद्यालय में कर्मचारियों के बीच यही मामला चर्चा का विषय बना रहा।

बताया जा रहा है कि दोनों कर्मचारियों के बीच विवाद की शुरुआत विश्वविद्यालय परिसर से बाहर आवास पर हुई थी। इसके बाद गुरुवार को कार्यालय में मामला फिर गर्म हो गया और देखते ही देखते दोनों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई। हालांकि बाद में कर्मचारियों के हस्तक्षेप से मामला शांत करा दिया गया।

सुबह कार्यालय पहुंचते ही हुआ विवाद

कर्मचारियों के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे प्रधान सहायक टीकम कुमार अपने कार्यालय पहुंचे थे। इसी दौरान कर्मचारी संघ के महामंत्री सुमित चौधरी भी वहां पहुंच गए। आरोप है कि किसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हुई और देखते ही देखते सुमित चौधरी ने टीकम कुमार के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। अचानक हुए विवाद से परीक्षा नियंत्रक कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद कर्मचारियों ने दोनों को अलग किया और मामला शांत कराने का प्रयास किया। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची, लेकिन किसी पक्ष की ओर से अभी तक तहरीर नहीं दी गई है।

पुलिस पहुंची, लेकिन नहीं हुई कार्रवाई

घटना के बाद पुलिस के पहुंचने के बावजूद मामला थाने तक नहीं पहुंचा। विश्वविद्यालय अधिकारियों की ओर से इसे कर्मचारियों के बीच का आंतरिक विवाद बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है और कोई बड़ी लड़ाई नहीं हुई। हालांकि, कर्मचारियों के बीच इस बात को लेकर चर्चा है कि अगर विश्वविद्यालय में इस तरह की घटनाओं को हर बार आपसी समझौते के नाम पर दबा दिया गया तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

एक ही फ्लैट में रहते हैं दोनों कर्मचारी

विवाद की एक अहम कड़ी दोनों कर्मचारियों का आवास भी बताया जा रहा है। दोनों सुल्तानगंज पुलिया स्थित विश्वविद्यालय के आवासीय परिसर में रहते हैं। जानकारी के अनुसार, दोनों के मकान एक ही फ्लैट में ऊपर-नीचे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि घर पर ही किसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई थी। उस समय विवाद शांत हो गया, लेकिन उसका असर अगले दिन विश्वविद्यालय कार्यालय तक पहुंच गया। हालांकि इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

महामंत्री से जुड़े विवाद को लेकर चर्चाएं तेज

कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा है कि सुमित चौधरी का कर्मचारियों के साथ विवाद का यह पहला मामला नहीं है। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी उनके साथ कर्मचारियों के विवाद हो चुके हैं और गुरुवार की घटना को उनका चौथा विवाद बताया जा रहा है। हालांकि इन पुराने विवादों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। यही वजह है कि कर्मचारी आपस में अलग-अलग तरह की चर्चाएं करते नजर आए।

तीन दिन में विश्वविद्यालय में तीसरा बड़ा मामला

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में लगातार तीसरे दिन विवाद सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। दो दिन पहले बीएससी की एक छात्रा द्वारा अपने भाइयों को बुलाकर क्लासमेट की पिटाई करवाने का मामला सामने आया था। मारपीट में दो छात्रों के सिर फट गए थे। इस घटना ने विश्वविद्यालय की सुरक्षा और अनुशासन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। इसके अगले दिन एमएससी बायोटेक्नोलॉजी प्रथम वर्ष की छात्रा ने सीनियर पर रैगिंग का आरोप लगाया। छात्रा का आरोप था कि परिचय के नाम पर सीनियर ने शिक्षकों की मौजूदगी में उसे अपमानित किया। शिकायत यूजीसी के एंटी रैगिंग सेल तक पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने मामले की जांच शुरू की। अब गुरुवार को कर्मचारी संघ के महामंत्री पर प्रधान सहायक से मारपीट का आरोप लग गया। लगातार तीन दिनों में सामने आए इन मामलों ने विश्वविद्यालय के अनुशासन और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कार्रवाई के बजाय समझौते से निपट रहे मामले?

लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन आखिर अनुशासनहीनता पर कितनी सख्ती दिखा रहा है। छात्रों के बीच मारपीट, रैगिंग के आरोप और अब कर्मचारियों के बीच कार्यालय में हाथापाई—तीन दिन में सामने आए इन मामलों ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि हर मामले को गंभीरता से लेने के बजाय प्रशासन समझौते या आंतरिक विवाद बताकर मामले को शांत करने की कोशिश करता नजर आता है। इससे कर्मचारियों और छात्रों में नाराजगी बढ़ रही है। फिलहाल गुरुवार की मारपीट की घटना में न तो कोई तहरीर दी गई है और न ही किसी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन भी आधिकारिक बयान देने से बच रहा है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले को केवल आपसी समझौते तक सीमित रखता है या कर्मचारियों के बीच बढ़ते विवादों पर कोई ठोस अनुशासनात्मक कदम भी उठाता है।