कच्ची उम्र में रंगबाजी का खतरनाक खेल! स्कूल से घर लौट रहे छात्र पर चाकू से हमला, आठ दिन बाद पुलिस आयुक्त के हस्तक्षेप पर शुरू हो सकी पुलिस कार्रवाई

आगरा। स्कूल में पढ़ने और खेलकूद की उम्र में बच्चों के बीच बढ़ती गुटबाजी और हिंसक प्रवृत्ति अब गंभीर चिंता का कारण बनती जा रही है। थाना जगदीशपुरा क्षेत्र में कक्षा 9 के छात्रों पर करीब 15 वर्षीय सहपाठी को रास्ते में घेरकर मारपीट करने और चाकू से हमला करने का आरोप लगा है। आरोप है कि फिल्मी अंदाज में मारपीट के बाद छात्र को जान से मारने की धमकी दी गई और उसे बेहोशी की हालत में छोड़कर आरोपी भाग गए। घायल छात्र को एसएन इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। परिजनों का आरोप है कि तहरीर देने और अस्पताल से मजरूबी चिट्ठी लिए जाने के बावजूद करीब आठ दिन तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। मामला चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट नरेश पारस के हस्तक्षेप के बाद पुलिस आयुक्त के संज्ञान में पहुंचा, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है।

Sep 3, 2026 - 21:29
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कच्ची उम्र में रंगबाजी का खतरनाक खेल! स्कूल से घर लौट रहे छात्र पर चाकू से हमला, आठ दिन बाद पुलिस आयुक्त के हस्तक्षेप पर शुरू हो सकी पुलिस कार्रवाई
प्रतीकात्मक इमेज।

छुट्टी के बाद रास्ते में घेरकर हमला
घटना 25 अगस्त की बताई जा रही है। स्कूल की छुट्टी के बाद करीब 15 वर्षीय छात्र घर लौट रहा था। आरोप है कि रास्ते में उसके साथ पढ़ने वाले एक छात्र ने अपने 3-4 साथियों के साथ उसे रोक लिया। पहले गाली-गलौज की गई और फिर उसके साथ मारपीट शुरू कर दी गई। आरोप है कि छात्र को धक्का देकर जमीन पर गिराया गया। विरोध करने पर चाकू से हमला कर दिया गया। हमलावरों ने जान से मारने की धमकी भी दी और छात्र को बेहोशी की हालत में छोड़कर फरार हो गए।

एसएन इमरजेंसी में कराया भर्ती
घटना के बाद परिजन घायल छात्र को एसएन इमरजेंसी लेकर पहुंचे, जहां उसका उपचार कराया गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि छात्र को चोटों के कारण 31 अगस्त को दोबारा एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराना पड़ा। उपचार के बाद 2 सितंबर को उसे अस्पताल से छुट्टी दी गई। घटना के बाद से परिवार में दहशत का माहौल है।

तहरीर के बाद भी आठ दिन कार्रवाई का इंतजार
पीड़ित परिवार के अनुसार घटना के बाद मुकदमा दर्ज कराने के लिए थाना जगदीशपुरा में तहरीर दी गई थी। पुलिस ने मजरूबी चिट्ठी लेकर घायल छात्र को अस्पताल भेज दिया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि इसके बाद भी आठ दिन तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। परिवार लगातार पुलिस के चक्कर लगाता रहा। कार्रवाई न होने पर पीड़ित छात्र के पिता ने मामले में मदद के लिए चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट नरेश पारस से संपर्क किया।

पुलिस आयुक्त के सामने पहुंचा मामला
नरेश पारस ने पीड़ित परिवार की ओर से मामले को उठाया और प्रकरण पुलिस आयुक्त के सामने रखा। इसके साथ ही जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में मामले की गंभीरता को देखते हुए मुकदमा दर्ज करने, चाकू से हमला करने वाले बच्चों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने और घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराने की मांग की गई है।

पुलिस ने शुरू की जांच
मामला पुलिस आयुक्त के संज्ञान में आने के बाद पुलिस सक्रिय हुई है। पुलिस अब घटना से जुड़े तथ्यों, लगाए गए आरोपों और नाबालिग छात्रों की भूमिका की जांच कर रही है। घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा रही है।

किशोर न्याय बोर्ड के सामने होगी कार्रवाई
मामले में आरोपी बताए जा रहे छात्र नाबालिग हैं। ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई किशोर न्याय कानून के प्रावधानों के तहत होगी। जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर पुलिस नियमानुसार संबंधित किशोरों को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश करेगी।

किताबों की उम्र में चाकू और गुटबाजी चिंता का विषय
अधिवक्ता एवं चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट नरेश पारस ने कहा कि जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और कॉपियां होनी चाहिए, उस उम्र में गुटबाजी, रंगबाजी और चाकू जैसे हथियारों तक पहुंच बेहद चिंता का विषय है। स्कूल जाने वाले बच्चों में हिंसक प्रवृत्ति कैसे बढ़ रही है, इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों पर स्कूल और अभिभावकों को नजर रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में शिकायत के बाद समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है। बच्चों की काउंसलिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, क्योंकि हिंसा की प्रवृत्ति को शुरुआती स्तर पर ही रोकना जरूरी है।

बच्चों की गुटबाजी पर गंभीर सवाल
इस घटना ने स्कूलों और अभिभावकों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है कि आखिर बच्चों के बीच मामूली विवाद कब गुटबाजी और हिंसा में बदल रहा है। स्कूल के बाहर छात्रों के समूह बनना, रंगबाजी की प्रवृत्ति और हथियारों का इस्तेमाल जैसी घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं हैं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य से भी जुड़ी हैं। ऐसे मामलों में स्कूल, अभिभावक और पुलिस तीनों स्तरों पर समय रहते हस्तक्षेप की जरूरत है।

SP_Singh AURGURU Editor