श्रीजगन्नाथ मंदिर में श्रीकृष्ण जी की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन, भगवान को बालक मानकर प्रेम करने वाले बृजवासियों के सौभाग्य की महिमा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

आगरा। भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन जहां देवताओं के लिए भी दुर्लभ थे, वहीं बृजवासियों को उन्हें अपने बालक के रूप में दुलारने और वात्सल्य लुटाने का सौभाग्य मिला। कमला नगर स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर (इस्कॉन) में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के तहत सोमवार को भगवान की बाल लीलाओं का ऐसा ही भावपूर्ण वर्णन हुआ। मंदिर के अध्यक्ष अरविन्द प्रभु ने कथा के माध्यम से बृजवासियों के निर्मल वात्सल्य और भगवान की अद्भुत बाल लीलाओं का वर्णन किया। कथा सुनकर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबे रहे।

Aug 31, 2026 - 20:33
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श्रीजगन्नाथ मंदिर में श्रीकृष्ण जी की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन, भगवान को बालक मानकर प्रेम करने वाले बृजवासियों के सौभाग्य की महिमा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
श्रीजगन्नाथ मंदिर में श्रीकृष्ण जी की बाल लीलाओं का वर्णन करते श्री अरविंद प्रभु।

इस्कॊन मंदिर के अध्यक्ष अरविन्द प्रभु ने कहा कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में उनकी दिव्यता के साथ बृजवासियों के अद्भुत सौभाग्य के भी दर्शन होते हैं। भगवान को अपने बालक के रूप में देखने और उनके साथ वात्सल्य का संबंध स्थापित करने का अवसर मिलना उनके लिए सबसे बड़ा सौभाग्य था।

उन्होंने बताया कि जब भगवान ब्रज में बाल लीलाएं कर रहे थे, तब अनेक देवी-देवता भी उनके दर्शन की इच्छा लेकर वहां पहुंचते थे। भगवान के दर्शन और कृपा प्राप्त करना देवताओं के लिए भी दुर्लभ था, जबकि बृजवासियों का भाव बिल्कुल अलग था। वे कृष्ण को परमेश्वर मानकर उनसे कुछ मांगने नहीं आते थे, बल्कि उन्हें अपना बालक मानकर प्रेम करते थे।

कोई उन्हें आशीर्वाद देता, कोई मंगलकामना करता तो कोई प्रेमपूर्वक उनकी बलइयां लेता था। अरविन्द प्रभु ने कहा कि भगवान के प्रति यही निष्काम प्रेम और वात्सल्य बृजवासियों की भक्ति की सबसे बड़ी विशेषता थी।

यशोदा की गोद में विराट सत्ता

कथा में भगवान श्रीकृष्ण के शयन की विशेष लीला का भी वर्णन किया गया। माता यशोदा जब बालक कृष्ण को सुलाने लगती हैं तो उनके निद्रा में जाने को लेकर देवताओं में भी चिंता उत्पन्न हो जाती है। इस प्रसंग के माध्यम से बताया गया कि भगवान की बाल अवस्था की सामान्य दिखाई देने वाली क्रियाओं में भी उनकी विराट सत्ता और दिव्य स्वरूप छिपा है।

अरविन्द प्रभु ने भगवान के चरण-रस से जुड़ी लीला का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान ने अपने दाहिने पैर के अंगूठे को अपने मुख में लेकर स्वयं अपने चरण-रस का आस्वादन किया। भगवान के चरणों की महिमा ऐसी है कि स्वयं लक्ष्मी जी भी उनके चरणों की सेवा करती हैं। इस बाल लीला में भगवान की सहजता के साथ उनकी अनंत दिव्यता का भी दर्शन होता है।

कथा के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का भक्ति और आध्यात्मिक भाव से वातावरण बना रहा। उपस्थित भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का श्रवण कर भाव-विभोर होकर कथा का आनंद लिया।

इस अवसर पर नितेश अग्रवाल, सुशील अग्रवाल, शैलेन्द्र अग्रवाल, कान्ता प्रसाद अग्रवाल, राजेश उपाध्याय, संजीव बंसल, शैलेश बंसल, ओमप्रकाश अग्रवाल, संजय कुकरैजा, राजेश मल्होत्रा, संजीव मित्तल, राजेश उपाध्याय, ओमप्रकाश, देव केशव और अदिति गौरांगी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor