रामायण शक्ति उत्सव में गूंजे भक्ति स्वर, सीता तत्व पर मंथन से उभरा स्त्री शक्ति का शास्त्र और शौर्य- नारी विमर्श ने छेड़ी नई बहस
आगरा। धरा चेतना फाउंडेशन के भव्य संस्कृति सभागार में आयोजित सीता तत्व परिसंवाद एवं रामायण शक्ति तत्व उत्सव ने नारी शक्ति, त्याग, धर्म और सांस्कृतिक मूल्यों पर गंभीर मंथन का मंच तैयार किया। भक्ति संगीत, काव्य और वैचारिक विमर्श से सजे इस आयोजन में एक ओर जहां गंधर्व बैंड के युवा कलाकारों ने श्रद्धा की सुरधारा बहाई, वहीं दूसरी ओर विद्वानों ने रामायण के स्त्री पात्रों के बहुआयामी स्वरूप को नई दृष्टि से परिभाषित किया।
भक्ति स्वरों से गूंजा सभागार
कार्यक्रम की शुरुआत गंधर्व बैंड के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भक्ति संगीत से हुई। हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता…! और ओ पालन हारे…” जैसे भजनों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। अक्षय प्रताप सिंह और गति सिंह ने अपने मधुर स्वरों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया, जबकि अभिषेक शुक्ला (तबला) और ध्रुव (की-पैड) ने संगत कर प्रस्तुति को जीवंत बनाया।
नारी शक्ति परिसंवाद में गूंजे तीखे विचार
अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान अयोध्या, संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश और प्रताप पब्लिक स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में रामायण नारी शक्ति परिसंवाद प्रमुख आकर्षण रहा।
साहित्यकार श्रुति सिन्हा ने उर्मिला के त्याग को केंद्र में रखते हुए कहा कि
14 वर्षों का एकांत जीवन, लक्ष्मण के वनवास के समान ही महान त्याग है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने अपनी प्रभावशाली कविता के माध्यम से स्त्रियों की महिमा को शब्द दिए- स्त्रियां शताब्दियों का संचित शब्द भंडार हैं…,स्त्रियां स्मृतियों का अनंत ग़ाछ हैं…।
कैकई पर नई दृष्टि: ‘खलनायिका नहीं, परिवर्तन की धुरी
राशि गर्ग ने पारंपरिक सोच को चुनौती देते हुए कहा कि कैकई को केवल खलनायिका मानना गलत है। उन्होंने कहा, कैकई रामायण की कैटलिस्ट थीं, जिनके निर्णयों ने ही राम के जीवन के महत्वपूर्ण कार्यों को संभव बनाया।
काव्य में जीवंत हुआ सीता का विराट स्वरूप
कवि ब्रज बिहारी लाल बिरजू ने माता सीता के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को अपनी काव्य पंक्तियों में प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया-
जनक नंदिनी ने करुणा निधान का वचन निभाया...।
मैनेजमेंट नजरिए से रामायण की व्याख्या
डॉ. नवीन गुप्ता ने रामायण को सिचुएशन, रिएक्शन और रिजल्ट (एसआरआर) के सिद्धांत से जोड़ते हुए बताया कि यह ग्रंथ जीवन प्रबंधन का भी उत्कृष्ट उदाहरण है। वहीं डॉ. मुनीश्वर गुप्ता ने सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों में स्त्री पात्रों की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे। आचार्य उमा शंकर ने भी काव्य पाठ से कार्यक्रम में साहित्यिक रंग भरा।
छात्र-छात्राओं ने दिखाई प्रतिभा
सुबह आयोजित रामायण नारी शक्ति संभाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने स्त्री पात्रों पर प्रभावशाली भाषण दिए।
प्रधानाचार्य यतेन्द्र सोलंकी के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रतियोगिता में विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. सुषमा सिंह, डॉ. गिरीश गुप्ता, वीरेंद्र मित्तल सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। साथ ही अभिलाषा, प्रतीक्षा, पुष्प, डॉ. रेखा गौतम, अंजू जैन, ममता, एसके गोयल, पूर्वी, सोनी, कविता राणा, अरविंद भाटिया, गीता भाटिया, कृष्णा जैसवानी, अशोक जैसवानी, रीता चौहान, नीलम वर्मा, ममता सिंह, ईशान देव, बरखा, डॉ. महेश धाकड़ और कुमार ललित सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।