बैंकों की सुस्ती पर मंडलायुक्त बरसे: सरकारी योजनाओं से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, 15 दिन का अल्टीमेटम
आगरा। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना को लेकर मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह का आज तीखा रुख सामने आया। आयुक्त सभागार में हुई समीक्षा बैठक में जब सामने आया कि अधिकांश बैंकों ने योजना में न के बराबर भागीदारी निभाई है, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकारी योजनाओं को हल्के में लेने वालों पर अब कार्रवाई तय है।
बैठक में एसबीआई, केनरा बैंक, यूनियन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक की लचर प्रगति पर मंडलायुक्त ने जमकर फटकार लगाई। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगले 15 दिनों में प्रदर्शन नहीं सुधरा, तो सीधे कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि "सरकार की प्राथमिक योजनाओं में रुचि न लेना न केवल उपेक्षा है, बल्कि युवाओं के साथ विश्वासघात भी है।"
प्रमुख बिंदु, जिनसे नाराज हुए मंडलायुक्त
लक्ष्य: 1.5 लाख युवाओं को स्वरोजगार, जिसमें 10,000 से अधिक ऋण सरकारी और निजी बैंकों द्वारा दिया जाना है।
वास्तविकता: सिर्फ 20-30% प्रगति, कई जिलों में आवेदन बहुत कम, स्वीकृति और वितरण और भी कम।
एसबीआई: आधे से ज्यादा आवेदन निरस्त। मंडलायुक्त ने कहा- यह सरासर लापरवाही है।
इंडियन बैंक: सबसे खराब प्रदर्शन- बैंक एमडी को पत्र भेजने के निर्देश।
यूको बैंक: तीन जिलों के प्रतिनिधि अनुपस्थित। नोटिस जारी करने के आदेश।
निजी बैंक: आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, कोटक महेंद्रा और एक्सिस द्वारा नाम मात्र का ऋण वितरण। स्थिति पिछले साल से भी बदतर।
मंडलायुक्त ने दो टूक कहा कि यदि निजी बैंक सहयोग नहीं करते, तो शासन उनसे दूरी बना लेगा। उन्होंने प्रत्येक बैंक प्रतिनिधि को निर्देश दिए कि वे ब्लॉक, तहसील और ग्राम पंचायत स्तर तक योजना का प्रचार करें, कैंप लगाएं और लंबित आवेदनों का जल्द निस्तारण करें।
मंडलायुक्त के तेवर भरे निर्देश
मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि 15 दिन बाद फिर समीक्षा होगी, और जो बैंक पिछड़े पाए जाएंगे उनके खिलाफ अनुशंसा की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह योजना युवाओं के भविष्य से जुड़ी है, इसे लेकर कोई कोताही नहीं चलेगी।