125 बार रक्तदानः हजारों जिंदगियों की उम्मीद बन चुके हैं बरेली के 'महारक्तदानी' इकबाल सिंह बाले
रक्त की एक-एक बूंद किसी के लिए जीवन का संचार बन सकती है और बरेली के समाजसेवी सरदार इकबाल सिंह बाले पिछले चार दशक से इसी जीवनदान के संकल्प को निभा रहे हैं। 125 बार स्वैच्छिक रक्तदान कर चुके बाले आज पूरे रुहेलखंड में 'महा रक्तदानी' के नाम से पहचाने जाते हैं।
19 वर्ष की उम्र में शुरू हुआ सफर, आज भी जारी है जीवन बचाने का अभियान

विश्व रक्तदान दिवस पर ब्लड डोनेट करते सरदार इकबाल सिंह बाले।
-आरके सिंह-
बरेली। विश्व रक्तदाता दिवस पर एक बार फिर समाजसेवी एवं स्वैच्छिक रक्तदाता सरदार इकबाल सिंह बाले ने अपने सेवा संकल्प को दोहराते हुए रक्तदान किया। महज 19 वर्ष की आयु में शुरू हुआ उनका रक्तदान का सफर आज भी बिना रुके जारी है। अब तक वे 125 बार रक्तदान कर चुके हैं और असंख्य जरूरतमंद मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
रुहेलखंड ही नहीं, बल्कि लखनऊ, दिल्ली और देहरादून जैसे शहरों के कई प्रमुख ब्लड बैंक और चिकित्सकीय संस्थानों के पास उनका मोबाइल नंबर हमेशा उपलब्ध रहता है। जैसे ही किसी गंभीर मरीज को दुर्लभ या तत्काल रक्त की आवश्यकता होती है, सबसे पहले संपर्क सरदार इकबाल सिंह बाले से किया जाता है।
रुहेलखंड में 'महा रक्तदानी' के नाम से मिली पहचान
लगातार और नियमित रक्तदान के कारण सरदार इकबाल सिंह बाले को बरेली ही नहीं, पूरे रुहेलखंड में महारक्तदानी तथा शतकवीर रक्तदाता के रूप में सम्मान प्राप्त है। वे केवल स्वयं रक्तदान ही नहीं करते, बल्कि युवाओं को भी नियमित रक्तदान के लिए प्रेरित करते हैं। उनका स्पष्ट संदेश है कि स्वस्थ व्यक्ति को नियमित रक्तदान करना चाहिए, क्योंकि आपकी एक यूनिट रक्त किसी अजनबी को नया जीवन दे सकती है।
खुद ही नहीं, रक्तदाताओं की पूरी टीम तैयार कर रखी है
सरदार बाले की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत से विभिन्न रक्त समूहों के हजारों स्वैच्छिक रक्तदाताओं का विशाल नेटवर्क तैयार किया है। उनके पास रुहेलखंड क्षेत्र के लगभग हर ब्लड ग्रुप के रक्तदाताओं के संपर्क उपलब्ध हैं।
विशेष रूप से ओ-नेगेटिव जैसे दुर्लभ रक्त समूह के 100 से अधिक रक्तदाताओं की सूची उनके पास हमेशा तैयार रहती है, जो किसी भी समय रक्तदान के लिए उपलब्ध रहते हैं। इस नेटवर्क में उत्तर प्रदेश के कई आईएएस, पीसीएस और पीपीएस अधिकारी भी शामिल हैं, जो जरूरत पड़ने पर रक्तदान के लिए आगे आते हैं।
बरेली में रक्तदान शिविर हो और बाले न हों, ऐसा शायद ही कभी हुआ हो
बरेली में आयोजित होने वाले लगभग हर रक्तदान शिविर में सरदार इकबाल सिंह बाले की सक्रिय भूमिका रहती है। वे स्वयं रक्तदान करने के साथ-साथ लोगों को प्रेरित करते हैं और नए रक्तदाताओं को जोड़ने का लगातार अभियान चलाते हैं। जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
किसी भी मरीज को आपातकालीन स्थिति में रक्त की आवश्यकता पड़ने पर वे स्वयं अस्पताल पहुंचकर रक्तदान करते हैं या अपने विशाल रक्तदाता नेटवर्क के माध्यम से तत्काल रक्त की व्यवस्था कराते हैं।
विश्व रक्तदाता दिवस पर पुत्र ने भी निभाई सेवा की परंपरा
रविवार को विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर आईएमए भवन, बरेली में आयोजित रक्तदान शिविर में सरदार इकबाल सिंह बाले ने स्वयं रक्तदान किया। उनके साथ उनके पुत्र सरदार रविंद्र सिंह ने भी रक्तदान कर सेवा की इस परंपरा को आगे बढ़ाया।
इस अवसर पर उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में स्वैच्छिक रक्तदान करने की अपील करते हुए कहा कि रक्तदान महादान है। यह ऐसा दान है, जिससे किसी अनजान व्यक्ति की जिंदगी बचाई जा सकती है और इससे बड़ा मानव सेवा का कार्य कोई नहीं हो सकता।