डॊ. आंबेडकर विश्वविद्यालय तेरे खेल निराले: शौचालय की मरम्मत में ही करोड़ों फूंक डाले, नई इमारतों के टॉयलेट भी कागजों में ‘खराब’ दिखाकर खेल कर डाले, जितने पैसे में आम आदमी खड़ा कर ले घर, उतने सिर्फ मरम्मत पर उड़ा डाले, रंगाई-पुताई के नाम पर बहाए करोड़ों अब सवालों के घेरे में
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में मंगलवार को विधि संकाय के दो कमरों की छत और फॉल सीलिंग गिरने की घटना ने पूरे विश्वविद्यालय की मरम्मत व्यवस्था और खर्चों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आरटीआई से सामने आए आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों में मरम्मत और निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए गए, जिनमें सबसे चौंकाने वाला पहलू शौचालयों की मरम्मत पर हुआ भारी खर्च है। इतना कि आम आदमी उसी रकम में अपना मकान खड़ा कर सकता है। नई इमारतों में भी साल भर के भीतर मरम्मत, बंद पड़ी सुविधाओं पर खर्च, और बार-बार एक ही काम पर रकम पास होने जैसे मामले विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह खड़े कर रहे हैं।
आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय में मंगलवार को विधि संकाय में दो कमरों की छतों और फॉल सीलिंग गिरने के बाद विवि में मरम्मत कार्य में होने वाले खर्चों पर सवाल उठ रहे हैं। पिछले तीन सालों में जो करोड़ों रुपए खर्च हुए हैं, उसमें हैरान करने वाली बात तो यह है कि यहां शौचालय की मरम्मत में ही करोड़ों रुपए फूंक दिए गए हैं। 100 वर्गगज की जमीन पर एक आम आदमी जितने रुपए से अपने रहने के लिए आवास बना लेता है, उतने तो यहां शौचालय की मरम्मत में ही खर्च कर दिए गए हैं।
इसके साथ ही खंदारी परिसर, पालीवाल पार्क परिसर कैंपस आदि में रंगाई पुताई और मरम्मत में भी करोड़ों रुपए की धनराशि खर्च हुई है। क्या यह कागजों में ही हुई है या जमीनी स्तर पर भी? यह सवाल भी खड़े हो रहे हैं। विश्वविद्यालय द्वारा आरटीआई से मिली जानकारी से खुलासा हुआ है कि कहां कितने पैसे खर्च किए गए हैं। हैरान करने वाली बात तो यह है कि करोड़ों रुपए खर्च किए जाने का ब्योरा बीते सिर्फ 3 साल का है जबकि निर्माण कार्य और मरम्मत कार्य तो उससे पहले भी होते रहे हैं।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में कुछ ना कुछ कारनामे होते ही रहते हैं जिसे लेकर वह खुद ही सुर्खियों में बना रहता है। पूर्व में विजिलेंस ने भी दो कुलपतियों सहित 19 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार की धारा में एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें चार्जशीट भी लग गई है। पिछले कुछ सालों में विश्वविद्यालय में मरम्मत और निर्माण कार्यों के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाया गया है। कहां पर कितना पैसा खर्च हुआ है इस बात का जवाब भी विश्वविद्यालय ने आरटीआई में दिया है। यह सिर्फ बीते 3 साल का ही खर्च का ब्योरा है।
पिछले तीन सालों में मरम्मत और निर्माण कार्यों में आरटीआई में दिए गए खर्च की बात करें तो कई चौंकाने वाली बात सामने आ रही हैं। विश्वविद्यालय ने सिविल लाइंस में 40 से 45 करोड रुपये की लागत से संस्कृति भवन की बिल्डिंग बनवाई है। निर्माण एजेंसी ने 2023 में बिल्डिंग को हैंडओवर किया है। हैंडओवर के तुरंत बाद ही इसमें मरम्मत और अन्य कार्य के नाम पर मोटा खर्चा किया गया है।
संस्कृति भवन बनने के साल भर बाद 18 लाख के मरम्मत कार्य
16 अगस्त 2024 को वित्त समिति की बैठक में संस्कृति भवन में बाहर एवं अंदर से पेंटिंग कार्य, 10 शौचालय ब्लॉक में पानी लीकेज तथा अन्य वृहद मरम्मत कार्य आदि के नाम पर 18 लाख रुपए पास किए गए। जब बिल्डिंग बने हुए एक साल ही हुआ था तो साल भर के अंदर मरम्मत की नौबत कैसे आ गई। जानकार तो यहां तक कहते हैं कि मरम्मत के नाम पर इस भुगतान को दर्शाकर विश्वविद्यालय की बड़ी वित्तीय हानि की गई है?
कोई यूज ही नहीं तो स्विमिंग पूल पर खर्चा क्यों
यहां पर बने स्विमिंग पूल में बंदर गंदगी करते थे, यह दर्शाते हुए लाखों रुपए की जाली भी लगवाई गई है। जबकि जब से यह स्विमिंग पूल बना है आज तक खुला ही नहीं है। इस पर हमेशा ताला रहता है। इससे कोई इनकम भी नहीं हुई है।
वित्त समिति और भवन समिति के व्यय के आंकड़े जानिए
विश्वविद्यालय द्वारा आरटीआई में दिए गए जवाब के हिसाब से जानें पिछले दो से तीन साल में वित्त समिति और भवन समिति की बैठक में विभिन्न विभागों में मरम्मत के नाम पर व्यय हुई धनराशि इस प्रकार है-
खंदारी परिसर स्थित दाऊदयाल संस्थान में रंगाई पुताई, नल एवं सेनेटरी एवं मरम्मत आदि के नाम पर 96.28 लाख 28 जुलाई 2023 की भवन समिति की बैठक में पास हुए। एक करोड़ रुपए में तो बिल्डिंग ही बनकर खड़ी हो जाएगी। आप सोच सकते हैं कि सिर्फ इतना पैसा एक संस्थान में मरम्मत व सौंदर्यकरण के नाम पर खर्च किया गया है। 17 अगस्त 2024 को वित्त समिति की बैठक में बेसिक साइंस संस्थान के अंदर रंगाई पुताई एवं अन्य कार्यों के नाम पर भी करीब 20 लाख रुपए पास कर दिए गए।
छात्र संघ भवन में शौचालय ब्लॉक का निर्माण एवं अन्य कार्यों के नाम पर 16 अगस्त 2024 को वित्त समिति की बैठक में 42.22 लाख रुपए पास कर दिए गए। खंदारी परिसर स्थित बेसिक साइंस संस्थान कंप्यूटर सेंटर भवन की मरम्मत एवं पुताई आदि के नाम पर 23.67 लाख 28 जुलाई 2023 की भवन समिति की बैठक में पास हुए।
सेठ पदमचंद जैन संस्थान टॉयलेट ब्लॉक की मरम्मत पर 32.70 लाख खर्च, एक साल बाद ही फिर से इसी कार्य में 34.42 लाख का व्यय
सेठ पदमचंद जैन संस्थान में शौचालय मरम्मत और रंगाई पुताई के नाम पर 28 जुलाई 2023 को 32.70 लाख रुपए पास किए गए। 16 अगस्त 2024 को हुई वित्त समिति की बैठक में भी शौचालय की मरम्मत के नाम पर 34.42 लाख रुपए पास किए गए। जब 2023 में मरम्मत हो गई थी तो 2024 में मरम्मत की फिर से आवश्यकता क्यों पड़ गई। सिर्फ एक ही संस्थान के शौचालय की मरम्मत पर 2 साल में 60 से 65 लाख रुपए खर्च कर दिए गए। यहां के शौचालय ने तो फाइव स्टार के शौचालय भी फेल कर दिए।
अंतर्राष्ट्रीय गेस्ट हाउस में मरम्मत और टैंक निर्माण के नाम पर 90 लाख खर्च
16 अगस्त 2024 को अंतर्राष्ट्रीय गेस्ट हाउस की मरम्मत और टैंक के निर्माण कार्य के लिए 88.29 लाख रुपए पास किए गए।
आईईटी में दो प्रयोगशालाओं की मरम्मत पर 199.40 लाख खर्च
16 अगस्त 2024 को हुई वित्त समिति की बैठक में आईईटी में इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन और रसायन विज्ञान प्रयोगशाला की मरम्मत एवं इंटरनल वाटर सप्लाई और सेनिटेशन के नाम पर 199.40 लाख रुपए पास किए गए।
खंदारी में सड़क के लिए 102.64 लाख व 29 लाख खर्च हुए
बेसिक साइंस से आरोग्य केंद्र के बीच में थोड़ी सी ही दूरी है। इसके बीच में सड़क का लेवल करने व इंटरलॉकिंग के नाम पर ही 28.38 लाख रुपये 16 अगस्त 2024 की बैठक में पास कर दिए गए। खंदारी परिसर में सड़क के नाम पर 16 अगस्त 2024 को ही बैठक में 102.64 लाख रुपए पास कर दिए गए।
जुबली पार्क में स्टोन व इंटरलॉकिंग पाथवे आदि कार्यों में 51.16 लाख व्यय
जुबली पार्क में क्लब स्टोन सहित इंटरलॉकिंग पाथवे दाऊ दयाल संस्थान व आईटीएचएम संस्थान के बीच चैन लिंक फेंसिंग कार्य दाऊ दयाल और आईटीएचएम के सामने इंटरलॉकिंग कार्य आदि में 51.16 लाख खर्च किए गए।
बृहस्पति भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम करीब 50 लाख में तैयार हुआ
पालीवाल पार्क स्थित बृहस्पति भवन में डिजिटल वार्ड कॉन्फ्रेंस, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम और फर्नीचर कार्य में 47.38 लाख खर्च किए गए। पालीवाल पार्क परिसर बाउंड्री वॉल की मरम्मत और पुताई कार्य में 11.47 लाख, पालीवाल पार्क परिसर स्थित केएमआई, आईएसएस के बाहरी भाग की मरम्मत और पुताई कार्य में 9.70 लाख, पालीवाल पार्क स्थित मुख्य कार्यालय भवन, परीक्षा भवन, गोपनीय विभाग व दीनदयाल संस्थान के बाहरी भाग की मरम्मत एवं पुताई कार्य में 9.87 लाख खर्च किए गए।
पालीवाल पार्क स्थित कुलपति ऑफिस के पास पोस्ट ऑफिस के बगल में लोहे का गेट और खंदारी परिसर स्थित गेस्ट हाउस लॉबी के कुछ भाग में वॉल पैनलिंग में 1.26 लाख, पालीवाल पार्क परिसर कुलपति कार्यालय के प्रथम तल पर IQEC सेल, पीवीसी, फॉल्स सीलिंग, सीढ़ी पर ग्रेनाइट फ्लोरिंग के कार्य में 12.28 लाख, गोपाल कुंज परिसर में पुताई एवं टाइल फर्श कार्य में 4.04 लाख खर्च किए गए। 20 मार्च 2023 को हुई वित्त समिति की बैठक में यह पास हुए।
पार्क में पाथवे पर 19.52 लाख व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम पर 25.69 लाख खर्च
दाऊ दयाल संस्थान तथा टीचर्स कॉलोनी के बीच की पुरानी जर्जर दीवार का पुनर्निर्माण तथा रेडियो स्टेशन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम, एल्युमिनियम पार्टिशन, फॉल्स सीलिंग आदि के नाम पर 25.69 लाख, खंदारी परिसर स्थित अतिथि गृह के बाएं भाग के भूमि तल पर स्थित कक्ष में चांसलर सूट एवं कैंप कार्यालय तैयार करने के कार्य में 24.60 लाख, दीक्षांत स्थल पार्क के बगल स्थित पार्क में घूमने के लिए पाथवे निर्माण कार्य में 19.52 लाख रुपए 28 जुलाई 2023 की बैठक में पास किए गए।
स्वामी विवेकानंद परिसर खंदारी में स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा तल का निर्माण और ग्रेनाइट रेलिंग के नाम पर करीब 10 लाख रुपए पास किए गए। खंदारी परिसर कार्यालय निर्माण कार्य में भी 11.76 लाख खर्च किए गए।
छलेसर कैंपस में मरम्मत, पुताई और शौचालय रिनोवेशन पर हुआ खर्चा चौंकाता है
छलेसर कैंपस में मरम्मत और शौचालय रिनोवेशन, बाउंड्री वॉल निर्माण कार्य आदि के नाम पर बड़ी धनराशि खर्च हुई है। सरस्वती भवन के आठ टॉयलेट रिनोवेशन के नाम पर 20.60 लाख, फार्मेसी लैब ब्लॉक में शौचालय रिनोवेशन के नाम पर 14.36 लाख रुपए, परिसर स्थित फार्मेसी लैब भवन की भीतरी एवं बाहरी भाग की मरम्मत पुताई में 20.59 लाख, सरस्वती भवन की भीतरी एवं बाहरी मरम्मत एवं पुताई कार्य में 24.55 लाख, मैग्नेट के पास की बाउंड्री वॉल निर्माण कार्य में 11.77 लाख 15 मार्च 2023 की भवन समिति की बैठक में पास किए गए। इतने में तो मकान बन जाता है, यहां शौचालय की मरम्मत ही हो पाई। मिनी स्टेडियम में भी 383.11 लाख खर्च किए गए।
12 करोड़ रुपए में बनना था शिवाजी मंडपम, खर्च 25 करोड़ के पार पहुंचा
विश्वविद्यालय में पहले से ही जेपी सभागार, जुबली हॉल और संस्कृति भवन में ऑडिटोरियम मौजूद थे। इसके बावजूद शिवाजी मंडपम का निर्माण किया गया, जो 12 करोड़ रुपए में प्रस्तावित था, लेकिन बनते-बनते इसकी लागत 25 से 30 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। शिवाजी मंडपम में स्टेज, लाइट, साउंड, पर्दे आदि पर 463.41 लाख और कुर्सी, साउंड प्रूफिंग आदि कार्यों पर 229.02 लाख रुपए खर्च किए गए।