विवेचक की गलती से आरोपी को रिमांड के बजाय मुचलके पर मिली रिहाई
आगरा। थाना मंटोला क्षेत्र में एक महिला के साथ घर में घुसकर छेड़छाड़ के मामले में आरोपी को जेल भेजने की बजाय कोर्ट ने 20,000 रुपये के निजी मुचलके पर रिहा कर दिया। इस फैसले का आधार बना विवेचक की प्रक्रिया में हुई गंभीर चूक और सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट गाइडलाइंस का उल्लंघन।
ये है पूरा मामला?
विगत 6 अप्रैल 2025 को थाना मंटोला के कंगालपाड़ा स्थित मंदिर वाली गली निवासी एक महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, वह रात लगभग 1:44 बजे गली में सो रही थी, तभी मोहल्ले का युवक नैना उर्फ दिनेश पुत्र दुलीचंद आया और उसके कपड़े हटाकर अश्लील हरकत करने लगा। महिला के जागने पर आरोपी भाग गया। महिला ने आरोपी के घर जाकर शिकायत की, जहां उसके परिजन झगड़े पर उतारू हो गये।
पुलिस ने 8 अप्रैल को आरोपी को गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने हेतु मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया।
कोर्ट ने इसलिए किया रिमांड से इनकार?
आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कोटिया ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए तर्क दिया कि यह अपराध 7 वर्ष से कम सजा योग्य है। विवेचक ने आरोपी को नोटिस दिए जाने की औपचारिकता मात्र निभाई, जबकि केस डायरी में नोटिस की प्रति तक संलग्न नहीं की गई। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय (सिद्धार्थ बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, 2022 SCC 676) स्पष्ट करता है कि ऐसे मामलों में गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं होती जब तक वह आवश्यक न हो।
कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि “ऐसा प्रतीत होता है कि विवेचक ने सुप्रीम कोर्ट की विविध व्यवस्थाओं का सही तरीके से अवलोकन नहीं किया। केवल औपचारिकता पूरी करते हुए गिरफ्तारी की गई।” इसी आधार पर कोर्ट ने न्यायिक रिमांड अस्वीकार करते हुए आरोपी को 20,000 रुपये के निजी मुचलके पर रिहा कर दिया।