पृथ्वी दिवस पर धरती, आकाश और यमुना को साक्षी मानकर ली गई सौगंधः प्रकृति को अपना संबंधी मानेंगे, चेतावनी- यमुना बचेगी तो हम बचेंगे
पृथ्वी दिवस पर आगरा में यमुना के तट पर हुए कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण की सौगंध ली गई। इस कार्यक्रम का संदेश रहा कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि आगरा की जीवनरेखा है। इसे बचाना अब विकल्प नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
आगरा। अंतर्राष्ट्रीय पृथ्वी दिवस पर आगरा में यमुना तट केवल आस्था का केंद्र नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संकल्प स्थल बन गया। ‘रिवर कनेक्ट’ अभियान के तहत स्वयंसेवकों, नागरिकों और बच्चों ने यमुना आरती स्थल पर एकत्र होकर एक मुट्ठी मिट्टी, एक वचन के माध्यम से प्रकृति संरक्षण की शपथ ली। यमुना को साक्षी मानकर लिए गए इस संकल्प ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि अब दर्शक नहीं, जिम्मेदार नागरिक बनने का समय आ गया है।
पृथ्वी दिवस की सौगंध- धरती, आकाश और यमुना को साक्षी मान लिया प्रण
कार्यक्रम में सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया- धरती, आकाश और यमुना को साक्षी मानकर प्रकृति को अपना संबंधी मानेंगे।
नदी में कचरा नहीं डालेंगे, प्लास्टिक का दुरुपयोग नहीं करेंगे और जल, जंगल, जमीन को नुकसान पहुंचाने वाली आदतों से दूर रहेंगे।
गलत के खिलाफ चुप नहीं रहेंगे, बल्कि उसे रोकेंगे और स्वयं उदाहरण बनेंगे।
घर, मोहल्ले और शहर में स्वच्छता और संरक्षण को बढ़ावा देंगे।
मौन से शुरुआत, मिट्टी से लिया वचन
कार्यक्रम की शुरुआत एक मिनट के मौन से हुई, जिसमें यमुना के उन हिस्सों को याद किया गया जो प्रदूषण और उपेक्षा की मार झेल रहे हैं। इसके बाद सभी ने यमुना तट से एक मुट्ठी मिट्टी उठाकर उसे साक्षी मानते हुए पर्यावरण संरक्षण का वचन लिया।
कसम जब मिट्टी पर ली जाती है, तो व्यवहार में उतरती है
‘रिवर कनेक्ट’ अभियान के संयोजक बृज खंडेलवाल ने कहा कि यह पहल केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत और सामूहिक जिम्मेदारी का एहसास कराने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि मिट्टी को साक्षी मानकर लिया गया संकल्प व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव लाता है।
आरती से पहले संकल्प, संरक्षण का संदेश
शाम को यमुना आरती से पूर्व आयोजित इस कार्यक्रम में नागरिकों से अपील की गई कि वे केवल दर्शक बनकर न रहें, बल्कि सक्रिय रूप से नदी संरक्षण से जुड़ें। प्लास्टिक का कम उपयोग, कचरे का सही निपटान और यमुना किनारे स्वच्छता बनाए रखने जैसे छोटे-छोटे कदम अपनाने पर जोर दिया गया।
जनआंदोलन बनता अभियान
बता दें कि यमुना संरक्षण के लिए ‘रिवर कनेक्ट’ अभियान पिछले कई वर्षों से लगातार कार्यरत है। आरती, सफाई अभियान, जनजागरूकता रैलियां और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से यह पहल अब एक मजबूत जनआंदोलन का रूप ले रही है। आज का यह संकल्प उसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
गणमान्य नागरिकों की रही भागीदारी
कार्यक्रम में राजीव गुप्ता, डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य, चतुर्भुज तिवारी, पद्मिनी अय्यर, रिमझिम वर्मा, डॉ. ज्योति खंडेलवाल, विशाल झा, शाहतोश गौतम, राज कुमार गुप्ता, सतीश गुप्ता, मुकेश चौधरी, गोस्वामी नंदन श्रोतरीय, अभिनव लाला, दीपक राजपूत, जगन प्रसाद तेहरिया, डॉ. मुकुल पांड्या सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर यमुना मैया की विशेष आरती भी आयोजित की गई।