यूपीसीडा और जल निगम के दोहरे शुल्क पर भड़के उद्यमी, जलकर बिल निरस्त करने की उठी मांग; विधायक खंडेलवाल ने दिया समाधान का भरोसा
औद्योगिक क्षेत्रों में यूपीसीडा से रखरखाव एवं मेंटेनेंस शुल्क लेने के बावजूद जल निगम द्वारा जलकर के बिल भेजे जाने से आगरा के उद्यमियों और व्यापारियों में नाराजगी बढ़ गई है। नेशनल चैम्बर के बैनर तले आयोजित बैठक में उद्यमियों ने इसे दोहरा आर्थिक बोझ बताते हुए जलकर के बिल तत्काल निरस्त करने की मांग उठाई। बैठक में मौजूद विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।
आगरा। नेशनल चैम्बर सभागार में गुरुवार को आयोजित चैम्बर की बैठक चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल उपस्थित रहे। इस दौरान चैम्बर की ओर से आगरा की औद्योगिक, व्यापारिक एवं शहर से जुड़ी विभिन्न समस्याओं का विस्तृत प्रतिवेदन विधायक को सौंपा गया।
बैठक में चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल ने बताया कि 28 अक्टूबर 2024 के शासनादेश के अनुसार उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) द्वारा विकसित सभी औद्योगिक क्षेत्रों को, भले ही वे नगर निगम, नगर निकाय अथवा जिला पंचायत की सीमा में आते हों, स्थानीय निकायों के अधिकार क्षेत्र से हटाकर यूपीसीडा के अधीन कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि शासनादेश के अनुसार अब इन औद्योगिक क्षेत्रों का रखरखाव, विकास, सड़क, सफाई, पेयजल, सीवर एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी यूपीसीडा की है। इसी उद्देश्य से यूपीसीडा उद्यमियों से रखरखाव एवं मेंटेनेंस शुल्क भी वसूल रहा है। ऐसे में स्थानीय निकायों द्वारा गृहकर अथवा इसी प्रकार का कोई अन्य कर नहीं लिया जाना चाहिए।
इसके बावजूद वर्तमान में औद्योगिक क्षेत्रों के उद्यमियों को जल निगम द्वारा जलकर के बिल भेजे जा रहे हैं, जिससे उन पर दोहरा आर्थिक बोझ पड़ रहा है। चैम्बर ने इसे शासनादेश की भावना के विपरीत बताते हुए तत्काल समाप्त करने की मांग की।
चैम्बर के पूर्व अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने कहा कि जब औद्योगिक क्षेत्रों का रखरखाव यूपीसीडा कर रहा है और उसके लिए उद्यमियों से शुल्क भी वसूला जा रहा है, तो जल निगम द्वारा अलग से जलकर के बिल भेजना न्यायसंगत नहीं है। इससे उद्योगों की लागत बढ़ रही है और उद्यमियों में भारी असंतोष है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में चैम्बर की ओर से जिलाधिकारी को भी पत्र भेजा जा चुका है। चैम्बर ने मांग की है कि उद्यमियों पर दोहरा शुल्क लगाने की व्यवस्था समाप्त की जाए तथा जल निगम द्वारा जारी जलकर के बिल तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाएं।
बैठक में विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने चैम्बर पदाधिकारियों द्वारा उठाई गई सभी समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि उद्यमियों और व्यापारियों की समस्याओं का समाधान कराने के लिए संबंधित विभागों से वार्ता कर आवश्यक कार्रवाई कराई जाएगी।
बैठक में चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल, पूर्व अध्यक्ष सीताराम अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, अतुल कुमार गुप्ता तथा संजय गोयल सहित अन्य पदाधिकारी एवं उद्यमी उपस्थित रहे।