फोटो जर्नलिज्म के एक युग का अंत, फोटोग्राफी के जादूगर रघु राय नहीं रहे,  अपने हुनर से छोड़ी थी छाप

भारतीय फोटो जर्नलिज्म के दिग्गज रघु राय के निधन से एक युग का अंत हो गया, जिन्होंने अपनी तस्वीरों से इतिहास को हमेशा के लिए जीवंत बना दिया। उनकी विरासत सिर्फ तस्वीरों तक सीमित नहीं, बल्कि उन लम्हों में बसती है जो आज भी समाज को झकझोरते और सोचने पर मजबूर करते हैं।

Apr 26, 2026 - 21:34
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फोटो जर्नलिज्म के एक युग का अंत, फोटोग्राफी के जादूगर रघु राय नहीं रहे,  अपने हुनर से छोड़ी थी छाप

नई दिल्ली। रोशनी और साए के बीच सच को पहचानने वाली नजर अब हमेशा के लिए बंद हो गई है। भारत के सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली फोटो जर्नलिस्ट रघु राय नहीं रहे। उन्होंने कैमरे से सिर्फ तस्वीरें नहीं लीं, बल्कि वक्त को रोककर उसे इतिहास में हमेशा के लिए अमर कर दिया। उनकी हर फ्रेम एक कहानी नहीं, एक युग है, जो अब भी बोलता है, झकझोरता है और हमें याद दिलाता है कि तस्वीरें सिर्फ देखी नहीं, महसूस भी की जाती हैं।

रघु राय की सबसे मार्मिक तस्वीरों में से एक, भोपाल गैस त्रासदी के दौरान खींची गई 'एक अज्ञात बच्चे का अंतिम संस्कार टाइटल वाली तस्वीर आज भी दुनिया को झकझोर देती है। एक पिता की गोद में मृत बच्चे की यह ब्लैक एंड वाइट तस्वीर न सिर्फ उस त्रासदी का प्रतीक बनी, बल्कि फोटो जर्नलिज्म की ताकत को भी परिभाषित करती है।

रघु राय ने अपने पांच दशक लंबे करियर में बांग्लादेश युद्ध से लेकर भारत की सड़कों के आम जीवन तक हर पहलू को कैमरे में कैद किया। इंदिरा गांधी और मदर टेरेसा जैसे व्यक्तित्वों के उनके पोर्ट्रेट आज भी ऐतिहासिक दस्तावेज माने जाते हैं।

एक पुराने इंटरव्यू में रघु राय ने कहा था कि तस्वीरें इतिहास को स्थायी बना देती हैं। उन्होंने कहा था, 'इतिहास हमेशा लिखा जाता है और उसे दोबारा भी लिखा जाता है। लेकिन फोटो इतिहास को बदला नहीं जा सकता।' उनके लिए फोटोग्राफी केवल कला नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का माध्यम थी।

1942 में जन्मे राय ने संयोग से फोटोग्राफी शुरू की, लेकिन जल्द ही अंतरराष्ट्रीय पहचान बना ली। 1972 में पेरिस में उनकी प्रदर्शनी ने दिग्गज फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर-ब्रेसन का ध्यान खींचा, जिन्होंने 1977 में उन्हें मैग्नम फोटोज के लिए नॉमिनेट किया।

राय ने आधुनिक फोटोग्राफी की दिशा पर चिंता जताई थी। उनका मानना था कि आज की तस्वीरें 'सिर्फ रंगीन और सतही' हो गई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के दौर में सेल्फी कल्चर और दिखावे पर भी तीखी टिप्पणी की थी।

अपने आखिरी दिनों तक सक्रिय रहे राय ने सीएए और किसान आंदोलनों तक को कैमरे में कैद किया। उनके निधन के बाद सोशल मीडिया पर उनकी यादगार तस्वीरें फिर से वायरल हो गईं। रघु राय भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी तस्वीरें हमेशा इतिहास को जिंदा रखती रहेंगी।