आगरा के पार्कों से हटेगा विलायती बबूल, देशी वृक्षों से लौटेगी शहर की खोई प्राकृतिक पहचान

आगरा में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) प्राधिकरण ने शहर के प्रमुख सार्वजनिक पार्कों और हरित क्षेत्रों में फैली आक्रामक विदेशी प्रजाति विलायती बबूल (प्रोसोपिस जुलीफ्लोरा) को हटाकर उसके स्थान पर देशी वृक्षों और झाड़ियों के रोपण की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। यह कदम आगरा की प्राकृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है।

Jun 18, 2026 - 21:15
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आगरा के पार्कों से हटेगा विलायती बबूल, देशी वृक्षों से लौटेगी शहर की खोई प्राकृतिक पहचान

आगरा। मंडलायुक्त आगरा नागेन्द्र प्रताप की अध्यक्षता में आयोजित ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) प्राधिकरण की बैठक में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर सहमति बनी। पर्यावरण प्रेमी एवं अधिवक्ता के.सी. जैन द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन पर विचार करते हुए निर्णय लिया गया कि आगरा के सार्वजनिक पार्कों, उद्यानों और हरित क्षेत्रों में मौजूद विलायती बबूल का सर्वे कराया जाएगा तथा उसके स्थान पर देशी प्रजातियों के वृक्षों और झाड़ियों के रोपण की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

इस निर्णय को केवल वृक्षारोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि शहरी पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्निर्माण की दिशा में एक दूरगामी कदम माना जा रहा है। अधिवक्ता के.सी. जैन ने 30 मई 2026 को प्रस्तुत अपने प्रतिवेदन में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 10656/2024 में 20 मार्च 2026 को दिए गए महत्वपूर्ण निर्णय का उल्लेख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि पर्यावरण संरक्षण का अर्थ केवल अधिक संख्या में पेड़ लगाना नहीं है, बल्कि ऐसे प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्स्थापना करना है जो स्थानीय जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रख सके।

न्यायालय ने विशेष रूप से कहा था कि जहां आक्रामक विदेशी प्रजातियां स्थानीय वनस्पतियों और जैव विविधता को नुकसान पहुंचा रही हों, वहां देशी प्रजातियों को प्राथमिकता देकर पर्यावरणीय पुनर्स्थापना की जानी चाहिए।

इन प्रमुख पार्कों में उठाया गया मुद्दा

प्रतिवेदन में आगरा के प्रमुख सार्वजनिक पार्कों और उद्यानों का उल्लेख किया गया, जिनमें पालीवाल पार्क, मोतीलाल नेहरू पार्क, सर्किट हाउस परिसर, संजय प्लेस स्थित संजय पार्क, यमुना तट पर स्थित ताज व्यू गार्डन शामिल हैं।  इन सभी स्थानों पर चरणबद्ध तरीके से विलायती बबूल हटाकर देशी वृक्षों एवं झाड़ियों के रोपण की मांग की गई है।

क्यों खतरा बन चुका है विलायती बबूल

विलायती बबूल (Prosopis Juliflora) भारत की मूल प्रजाति नहीं है। इसे कई दशक पहले कुछ क्षेत्रों में लगाया गया था, लेकिन समय के साथ यह तेजी से फैलकर स्थानीय वनस्पतियों के लिए चुनौती बन गया। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी घनी जड़ें और तेज विस्तार क्षमता अन्य पौधों को पर्याप्त धूप, नमी और पोषक तत्व नहीं मिलने देती। इससे देशी घास, झाड़ियां और वृक्षों की नई पौध विकसित नहीं हो पाती। इसके कारण पक्षियों, तितलियों, मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले जीवों के प्राकृतिक आवास भी प्रभावित होते हैं, जिससे जैव विविधता पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

देशी वृक्षों से मजबूत होगा पारिस्थितिकी तंत्र

पर्यावरण विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि विलायती बबूल के स्थान पर आगरा की जलवायु और पारिस्थितिकी के अनुरूप देशी प्रजातियों का रोपण किया जाए। प्रस्तावित प्रमुख प्रजातियां कदम्ब, पीपल, बरगद, गूलर, पाखड़, कुसुम, केंथ, तमाल, बरना, रूहेणा साथ ही अडूसा, करील, वज्रदंती जैसी देशी झाड़ियों को भी बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रजातियों से पक्षियों और वन्यजीवों को बेहतर आवास मिलेगा, परागण करने वाले कीटों की संख्या बढ़ेगी और शहरी जैव विविधता को नया जीवन मिलेगा।

अधिकारियों को दिए गए निर्देश

टीटीजेड प्राधिकरण ने इस संबंध में उपनिदेशक एवं अधीक्षक उद्यान विभाग तथा उपवन संरक्षक (सामाजिक वानिकी) राजेश कुमार को आवश्यक आंकड़े जुटाने और वैधानिक प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और टीटीजेड क्षेत्र से संबंधित सभी पर्यावरणीय मानकों का पूर्ण पालन किया जाए।

मॉर्निंग वॉकर्स और पर्यावरण प्रेमियों में उत्साह

पालीवाल पार्क समेत शहर के विभिन्न पार्कों में प्रतिदिन भ्रमण करने वाले नागरिकों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। प्रकृति प्रेमियों का कहना है कि लंबे समय से पार्कों में देशी प्रजातियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अब जब प्रशासनिक स्तर पर पहल शुरू हुई है तो इसे जल्द धरातल पर उतारा जाना चाहिए। डॉ. संजीव गोयल, किशोर जैन सहित कई पर्यावरण प्रेमियों ने इस पहल के लिए अधिवक्ता के.सी. जैन, टीटीजेड प्राधिकरण और मंडलायुक्त आगरा का आभार व्यक्त किया है।

स्मारक परिसरों तक बढ़ाने की मांग

पर्यावरणविदों ने मांग की है कि सार्वजनिक पार्कों के साथ-साथ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित परिसरों में भी इसी प्रकार की कार्रवाई की जाए। विशेष रूप से बुढ़िया का ताल, सिकंदरा स्थित अकबर का मकबरा, अन्य संरक्षित स्मारक परिसर से भी आक्रामक विदेशी प्रजातियों को हटाकर देशी वनस्पतियों को बढ़ावा दिया जाए।

आगरा बन सकता है देश के लिए मॉडल

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सार्वजनिक पार्कों, सरकारी परिसरों, स्मारक क्षेत्रों और हरित पट्टियों में देशी प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई तो आगरा आने वाले वर्षों में शहरी जैव विविधता संरक्षण, जलवायु अनुकूलन और पर्यावरणीय पुनर्स्थापना का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है।

अधिवक्ता के.सी. जैन ने कहा कि यह केवल कुछ पेड़ों को हटाने का निर्णय नहीं है, बल्कि आगरा की प्राकृतिक पहचान, स्थानीय जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी पहल है।