फेसबुक वाली ‘दोस्त’ निकली साइबर ठग, खाद्य विभाग के अधिकारी से 2.6 करोड़ की ठगी

सोशल मीडिया पर हुई एक दोस्ती खाद्य एवं रसद विभाग के एक अधिकारी के लिए भारी पड़ गई। महिला की फर्जी प्रोफाइल बनाकर साइबर ठगों ने पहले फेसबुक और फिर व्हाट्सएप के जरिए विश्वास हासिल किया। इसके बाद क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर करीब आठ महीने में अधिकारी से 2.6 करोड़ रुपये विभिन्न बैंक खातों और क्रिप्टो वॉलेट में ट्रांसफर करा लिए। वेबसाइट पर फर्जी मुनाफा दिखाकर उन्हें भ्रमित किया जाता रहा। अप्रैल के बाद आरोपियों ने संपर्क बंद कर दिया, जिसके बाद पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ। मामले में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Jun 16, 2026 - 02:26
 0
फेसबुक वाली ‘दोस्त’ निकली साइबर ठग, खाद्य विभाग के अधिकारी से 2.6 करोड़ की ठगी

 आगरा। साइबर अपराधियों द्वारा लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए अपनाए जा रहे नए-नए तरीकों के बीच एक और बड़ा मामला सामने आया है। खाद्य एवं रसद विभाग के एक अधिकारी से साइबर ठगों ने महिला की फर्जी पहचान बनाकर करीब 2.6 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने सोशल मीडिया पर दोस्ती, भावनात्मक विश्वास और क्रिप्टोकरेंसी में भारी मुनाफे के झांसे का इस्तेमाल कर इस वारदात को अंजाम दिया।

जानकारी के अनुसार अधिकारी की फेसबुक पर एक महिला के नाम से संचालित प्रोफाइल से पहचान हुई थी। शुरुआत में सामान्य बातचीत होती रही, लेकिन धीरे-धीरे यह संवाद व्हाट्सएप पर पहुंच गया। महिला के रूप में बात कर रहे साइबर ठगों ने अधिकारी का विश्वास जीत लिया और खुद को सफल निवेशक बताते हुए क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग से होने वाले बड़े मुनाफे की कहानियां सुनानी शुरू कर दीं।

मुनाफे का सपना दिखाकर फंसाया

कुछ समय बाद ठगों ने अधिकारी को एक ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म और क्रिप्टो ट्रेडिंग वेबसाइट से जोड़ दिया। शुरुआत में कम रकम निवेश कराई गई और वेबसाइट पर निवेश बढ़ता हुआ तथा लाखों रुपये का लाभ दिखाया गया। फर्जी आंकड़ों और डिजिटल डैशबोर्ड के जरिए यह भरोसा दिलाया गया कि उनका निवेश तेजी से बढ़ रहा है।

मुनाफा देखकर अधिकारी लगातार निवेश करते गए। साइबर अपराधियों ने अलग-अलग बैंक खातों, पेमेंट चैनलों और क्रिप्टो वॉलेट में रकम ट्रांसफर कराई। करीब आठ महीने की अवधि में अधिकारी ने कुल 2.6 करोड़ रुपये विभिन्न खातों में जमा कर दिए।

वेबसाइट पर दिखता रहा फर्जी लाभ

पीड़ित को लंबे समय तक यह विश्वास दिलाया जाता रहा कि उनका निवेश सुरक्षित है और लगातार बढ़ रहा है। वेबसाइट पर लाखों रुपये का लाभ और बढ़ती हुई बैलेंस राशि दिखाई जाती रही। जब अधिकारी ने रकम निकालने का प्रयास किया तो कभी टैक्स, कभी प्रोसेसिंग फीस और कभी तकनीकी कारण बताकर भुगतान टाल दिया गया। इसके बाद अप्रैल माह से आरोपियों ने अचानक संपर्क करना बंद कर दिया। व्हाट्सएप नंबर बंद हो गए और सोशल मीडिया प्रोफाइल भी निष्क्रिय हो गईं। तब जाकर पीड़ित को एहसास हुआ कि वह एक सुनियोजित साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।

साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज

ठगी का पता चलने पर पीड़ित अधिकारी ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान उन बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और क्रिप्टो वॉलेट्स की जानकारी जुटाई जा रही है जिनमें धनराशि भेजी गई थी। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में फेसबुक, इंस्टाग्राम और डेटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए दोस्ती कर क्रिप्टो निवेश के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह तेजी से सक्रिय हुए हैं। 

ऐसे मामलों में अपराधी पहले विश्वास कायम करते हैं और फिर निवेश के नाम पर बड़ी रकम हड़प लेते हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर बने अपरिचित संबंधों के आधार पर किसी भी निवेश योजना में धन न लगाएं और किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निवेश करने से पहले उसकी वैधता की पूरी जांच कर लें।