फ्रांस-लक्जमबर्ग की खास यात्रा पर विदेश मंत्री एस जयशंकर, रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने पर रहेगा जोर

   इस यात्रा के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर फ्रांस के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर देंगे। इसके बाद विदेश मंत्री लक्जमबर्ग की यात्रा करेंगे।  

Jan 4, 2026 - 20:31
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फ्रांस-लक्जमबर्ग की खास यात्रा पर विदेश मंत्री एस जयशंकर, रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने पर रहेगा जोर

नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर फ्रांस और लक्जमबर्ग की 6 दिवसीय यात्रा पर हैं। यह यात्रा 4 जनवरी से 10 जनवरी तक चलेगी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना है। फ्रांस में, जयशंकर वहां के नेताओं से मिलेंगे। वे फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट से भी बातचीत करेंगे। इन मुलाकातों में भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी की प्रगति पर चर्चा होगी। साथ ही, दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी बात की जाएगी।

पेरिस में विदेश मंत्री एक खास कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। वे 31वें फ्रेंच एंबेसडर्स कॉन्फ्रेंस में गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर संबोधित करेंगे। यहां वे वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भारत के विचारों को रखेंगे। मंत्रालय के बयान के अनुसार, 'पेरिस में, वह फ्रांसीसी नेतृत्व से मिलेंगे और विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट के साथ बातचीत करेंगे। वे भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के तहत हुई प्रगति और वैश्विक महत्व के मामलों पर चर्चा करेंगे। विदेश मंत्री 31वें फ्रेंच एंबेसडर्स कॉन्फ्रेंस को गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर संबोधित भी करेंगे।'  
 
भारत और फ्रांस के रिश्ते हमेशा से बहुत करीबी और दोस्ताना रहे हैं। दोनों देशों के बीच एक गहरी और स्थायी रणनीतिक साझेदारी है। यह साझेदारी द्विपक्षीय सहयोग के हर पहलू को कवर करती है, जिसमें रणनीतिक मामले भी शामिल हैं।

यह रणनीतिक साझेदारी 26 जनवरी 1998 को शुरू हुई थी। इसका मकसद दोनों देशों की रणनीतिक स्वतंत्रता को बढ़ाना था। इसके लिए द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत किया गया। इस साझेदारी के मुख्य स्तंभ रक्षा और सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष हैं।

हाल के वर्षों में, इसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े मामले भी शामिल हो गए हैं। अब इस साझेदारी का दायरा और बढ़ गया है। इसमें समुद्री सुरक्षा, डिजिटलीकरण, साइबर सुरक्षा, एडवांस्ड कंप्यूटिंग, आतंकवाद का मुकाबला, जलवायु परिवर्तन, रिन्यूएबल एनर्जी और सतत विकास जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।

फ्रांस में अपने कार्यक्रमों के बाद, जयशंकर लक्जमबर्ग जाएंगे। वहां वे उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल से मिलेंगे। वे देश के अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी बातचीत करेंगे। इन मुलाकातों का मुख्य उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाना होगा। लक्जमबर्ग में रहते हुए, विदेश मंत्री भारतीय समुदाय के लोगों से भी मिलेंगे।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत और लक्जमबर्ग के बीच संबंध बहुत अच्छे हैं। दोनों देशों के बीच आपसी समझ और सहयोग का स्तर काफी ऊंचा है। यह सहयोग द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दोनों स्तरों पर है।
भारत और लक्जमबर्ग के बीच राजनयिक संबंध 1948 में स्थापित हुए थे। लक्जमबर्ग ने फरवरी 2002 में नई दिल्ली में अपना दूतावास खोला था। यह एशिया में उनके पांच दूतावासों में से एक है। लक्जमबर्ग के मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और बेंगलुरु में मानद वाणिज्य दूत भी हैं।

यह यात्रा यूरोपीय देशों के साथ भारत की निरंतर भागीदारी को दर्शाती है। यह भारत की अपनी रणनीतिक और राजनयिक संबंधों को गहरा करने की प्रतिबद्धता को भी दिखाता है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एक लंबे समय से अटके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत एक "निर्णायक चरण" में प्रवेश कर चुकी है।

यह यात्रा भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इससे फ्रांस और लक्जमबर्ग जैसे यूरोपीय देशों के साथ भारत के रिश्ते और मजबूत होंगे। खासकर, जब भारत यूरोपीय संघ के साथ एक बड़े व्यापार समझौते पर काम कर रहा है। यह दिखाता है कि भारत यूरोप के साथ अपने संबंधों को कितनी अहमियत देता है। विदेश मंत्री की यह यात्रा भारत की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह भारत को वैश्विक मंच पर और मजबूत स्थिति में लाएगा।