सूर सरोवर पक्षी विहार प्रकरण में वन विभाग की मनमानी से हुई सरकार की किरकिरी, अब तय हो रही अफसरों की जिम्मेदारी, आगरा की डीएफओ चांदनी सिंह को पहले ही हटाया जा चुका, सीईसी में डॉ. शरद गुप्ता ने सभी जिम्मेदार अधिकारियों की जांच की उठाई मांग, नए नोटिफिकेशन के लिए मिला आठ सप्ताह का समय
आगरा। आगरा के सूर सरोवर पक्षी विहार (कीठम झील) को अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर जीरो ईको सेंसिटिव जोन (ESZ) घोषित करने के मामले में उत्तर प्रदेश वन विभाग की बड़ी प्रशासनिक चूक उजागर होने के बाद शासन और विभाग में हड़कंप की स्थिति है। सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने शपथपत्र (एफिडेविट) में इस गलती को स्वीकार करते हुए जीरो ईको सेंसिटिव जोन की अधिसूचना वापस लेने और पक्षी विहार की 14 हेक्टेयर भूमि के लिए नई अधिसूचना जारी करने का आश्वासन दिया। इस पर सीईसी ने राज्य सरकार को आठ सप्ताह का समय दे दिया। उधर, शासन स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की मांग के बीच आगरा की डीएफओ चांदनी सिंह को यहां से हटाकर सहारनपुर भेज दिया गया है। वहीं पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।
यह मामला उस समय शुरू हुआ जब आगरा के पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने वन विभाग द्वारा सूर सरोवर पक्षी विहार को जीरो ईको सेंसिटिव जोन घोषित किए जाने पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के अनुसार किसी भी संरक्षित वन्यजीव क्षेत्र का ईको सेंसिटिव जोन निर्धारित करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार या राज्य वन विभाग ऐसा निर्णय लेने के लिए अधिकृत नहीं हैं।
डॉ. गुप्ता के अनुसार, जब पिछले वर्ष यह प्रस्ताव तैयार किया गया था, तब उन्होंने तत्कालीन डीएफओ चांदनी सिंह के समक्ष इस विषय को उठाते हुए कानूनी स्थिति से अवगत कराया था। उनका आरोप है कि उस समय उनकी आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया गया और उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि विभाग के पास असीमित अधिकार हैं। इसके बाद डीएफओ चांदनी सिंह ने जीरो ईको सेंसिटिव जोन घोषित करने का प्रस्ताव तैयार कर जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजा, जहां बिना अधिकार क्षेत्र की विधिक समीक्षा किए इसे मंजूरी दे दी गई। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद इसका गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया।
वन विभाग के इस निर्णय को चुनौती देते हुए डॉ. शरद गुप्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए इसे सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) को भेज दिया। सुनवाई के दौरान जब यह तथ्य सामने आया कि ईको सेंसिटिव जोन अधिसूचित करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, तब राज्य सरकार और वन विभाग को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।
सीईसी में दाखिल अपने एफिडेविट में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वीकार किया कि सूर सरोवर पक्षी विहार के लिए जारी जीरो ईको सेंसिटिव जोन की अधिसूचना वापस ली जाएगी तथा संबंधित 14 हेक्टेयर भूमि के संबंध में विधिसम्मत नई अधिसूचना जारी की जाएगी। इस पर सीईसी ने सरकार के अनुरोध को स्वीकार करते हुए नई अधिसूचना जारी करने के लिए आठ सप्ताह का समय दे दिया।
हालांकि डॉ. शरद गुप्ता ने सीईसी के समक्ष यह भी कहा कि केवल अधिसूचना वापस लेना पर्याप्त नहीं है। जिन अधिकारियों ने उनकी कानूनी आपत्तियों को नजरअंदाज किया और अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर निर्णय लिया, उनकी भूमिका की भी विस्तृत जांच होनी चाहिए। उनका कहना था कि वन विभाग ने गलती तब स्वीकार की, जब सीईसी ने जवाब-तलब किया, जबकि पहले उनकी सभी आपत्तियों को पूरी तरह खारिज कर दिया गया था।
डॉ. गुप्ता ने सीईसी को यह भी बताया कि जीरो ईको सेंसिटिव जोन घोषित किए जाने का सबसे बड़ा दुष्परिणाम यह हुआ कि सूर सरोवर पक्षी विहार के आसपास ऐसी कई गतिविधियां शुरू हो गईं, जिन्हें किसी भी संरक्षित पक्षी विहार के निकट अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में व्हीकल फिटनेस सेंटर स्थापित हो चुका है और इसके अलावा भी कई व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इतना ही नहीं, वन विभाग की इसी अधिसूचना का लाभ उठाकर अनेक लोगों ने पक्षी विहार के आसपास स्थित अपनी भूमि का लैंड यूज भी परिवर्तित करा लिया, जिससे पर्यावरणीय संरक्षण पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।
इन आपत्तियों पर सीईसी ने डॉ. शरद गुप्ता से कहा कि वे सभी दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ विस्तृत लिखित शिकायत प्रस्तुत करें। आयोग ने इस संबंध में अगली सुनवाई की 24 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।
उल्लेखनीय है कि वन विभाग द्वारा अपनी भूल स्वीकार किए जाने और जीरो ईको सेंसिटिव जोन की अधिसूचना वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद सीईसी ने अंतरिम व्यवस्था के तहत स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्र सरकार इस विषय पर अंतिम निर्णय नहीं ले लेती, तब तक सूर सरोवर पक्षी विहार के चारों ओर 10 किलोमीटर का क्षेत्र ईको सेंसिटिव जोन माना जाएगा। इससे क्षेत्र में नए निर्माण, व्यावसायिक गतिविधियों और पर्यावरण को प्रभावित करने वाले कार्यों पर लागू नियम प्रभावी रहेंगे।
इधर, इस पूरे घटनाक्रम के बाद शासन स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार, इसी क्रम में आगरा की तत्कालीन डीएफओ चांदनी सिंह का तबादला सहारनपुर किए जाने को भी इस प्रकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। चांदनी सिंह का प्रभार राजेश कुमार को सौंपा गया है।