‘गाथा पंचकन्या’ से गूंजा स्त्री अस्मिता का स्वर, रेनू 'अंशुल' के उपन्यास को राष्ट्रीय सराहना

आगरा। हिंदू मिथकीय पात्रों पर आधारित लेखिका रेनू 'अंशुल' का उपन्यास ‘गाथा पंचकन्या’ इन दिनों राष्ट्रीय स्तर पर साहित्य प्रेमियों और समीक्षकों के बीच विशेष सराहना बटोर रहा है। अहिल्या, द्रौपदी, तारा, मंदोदरी और कुंती, इन पांच पौराणिक स्त्रियों के जीवन संघर्ष और आत्मनिर्माण की गाथा को केंद्र में रखकर रचा गया यह उपन्यास स्त्री अस्मिता की गहराई में उतरता है और उसे एक नया विमर्श देता है।

Jun 7, 2025 - 13:59
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‘गाथा पंचकन्या’ से गूंजा स्त्री अस्मिता का स्वर, रेनू 'अंशुल' के उपन्यास को राष्ट्रीय सराहना
अपनी नवीनतम कृति के साथ रेनू अंशुल।

-पौराणिक पात्रों की आधुनिक पुनर्परिभाषा बनी साहित्य जगत में चर्चा का विषय, श्याम वर्तिका ट्रस्ट करेगा लेखिका का सम्मान

सिर्फ देवी नहीं, संघर्षरत नारी का रूप हैं पंचकन्या

उपन्यास में वर्णित सभी पात्र पौराणिक कथा-साहित्य की जानी-पहचानी स्त्रियां हैं, लेकिन लेखिका रेनू 'अंशुल' ने इन्हें पारंपरिक दृष्टिकोण से हटकर स्वतंत्र और संघर्षशील नायिकाओं के रूप में प्रस्तुत किया है। वे कहती हैं, ये स्त्रियां केवल किसी की पत्नी, माता या पुत्री नहीं, बल्कि समय के अन्याय से टकराकर स्वयं की पहचान गढ़ने वाली नारी प्रतीक हैं।

साहित्यिक संस्थाओं से सम्मान प्रस्ताव, श्याम वर्तिका ट्रस्ट करेगा सम्मानित

वरिष्ठ साहित्यकार रमा वर्मा 'श्याम' ने उपन्यास की सराहना करते हुए कहा कि यह रचना स्त्री की पवित्रता, अस्मिता और संघर्ष को साहित्यिक ऊंचाई देती है। उन्होंने बताया कि श्याम वर्तिका ट्रस्ट जल्द ही रेनू 'अंशुल' को इस विशिष्ट कृति के लिए सम्मानित करेगा।

‘गाथा पंचकन्या’ रेनू ‘अंशुल’ की छठवीं कृति

रेनू 'अंशुल' इससे पहले कहानी, कविता, लघुकथा और उपन्यास की पांच चर्चित कृतियां प्रकाशित कर चुकी हैं। ये हैं- ‘उसके सपनों के रंग’, ‘कहना है कुछ’, ‘लम्हों के दामन में’, ‘पॉकेट में इश्क’ और ‘बटरफ्लाइज’।
'गाथा पंचकन्या' उनकी छठी कृति है, जो प्रलेक प्रकाशन से प्रकाशित हुई है और देशभर के साहित्य जगत में चर्चा में है।

साहित्य से मंच तक सक्रिय उपस्थिति

रेनू 'अंशुल' दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ-साथ विभिन्न साहित्यिक मंचों पर नाट्य, कविता और कहानी वाचन से जुड़ी रही हैं। उनकी रचनाएं विविध सामाजिक सरोकारों को भी छूती हैं। एक संवेदनशील रचनाकार के रूप में उनकी पहचान लगातार निखरती जा रही है। आगरा में जन्मीं, पली-बढ़ीं और शिक्षित हुईं रेनू दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के सेवानिवृत्त अधिकारी अंशुल अग्रवाल की धर्मपत्नी हैं।

SP_Singh AURGURU Editor