'गीता केवल ग्रंथ नहीं, जीवन जीने की शाश्वत कला है': आगरा में महामना मालवीय मिशन की व्याख्यानमाला में गूंजे जीवन के सूत्र

आगरा। महामना मालवीय मिशन, आगरा संभाग के तत्वावधान में शनिवार को संजय प्लेस स्थित यूथ हॉस्टल में आयोजित 'श्रीमद्भगवद्गीता व्याख्यानमाला' में गीता के जीवनदायी संदेशों का प्रभावी स्वर गूंजा। "गीता की दृष्टि में – जीवन की सफलता व सार्थकता" विषय पर आयोजित इस प्रेरणादायी कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पूज्य आचार्य स्वामी कृष्णकांत जी ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता को सही दिशा देने वाला जीवन का शाश्वत मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि गीता का वास्तविक अध्ययन तभी सार्थक है, जब उसके सिद्धांत व्यक्ति के आचरण और व्यवहार में दिखाई दें।

Jul 4, 2026 - 22:08
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'गीता केवल ग्रंथ नहीं, जीवन जीने की शाश्वत कला है': आगरा में महामना मालवीय मिशन की व्याख्यानमाला में गूंजे जीवन के सूत्र
महामना मालवीय मिशन की व्याख्यानमाला में मिशन की त्रैमासिक पत्रिका 'मिशन संदेश' का विमोचन करते अतिथिगण।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती एवं भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया गया। मंचासीन अतिथियों का अंगवस्त्र, तुलसी का पौधा और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया गया। इस अवसर पर मिशन की त्रैमासिक पत्रिका 'मिशन संदेश' (अप्रैल–जून 2026, श्रीनगर विशेषांक) का भी लोकार्पण किया गया।

महामना मालवीय मिशन, आगरा संभाग के उपाध्यक्ष प्रभाकर शर्मा (आईआरएस) ने स्वागत उद्बोधन दिया, जबकि मिशन के मार्गदर्शक श्रीकृष्ण गौतम ने अपने आशीर्वचन में गीता के आदर्शों को जीवन में उतारने का आह्वान किया। मिशन के महासचिव एवं पर्यावरण कार्यकर्ता राकेश चन्द्र शुक्ला ने व्याख्यानमाला की पृष्ठभूमि, उद्देश्य और मिशन की भावी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मिशन का उद्देश्य गीता के सार्वभौमिक संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाकर युवाओं में चरित्र निर्माण, राष्ट्रभाव, सेवा, समरसता और सांस्कृतिक चेतना का विकास करना है।

करीब डेढ़ घंटे तक चले अपने ओजस्वी व्याख्यान में आचार्य स्वामी कृष्णकांत जी ने कर्मयोग, समत्व, आत्मानुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा को गीता का मूल संदेश बताया। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए गीता चार महत्वपूर्ण शिक्षाएं देती है— किसी भी विषय पर निर्णय लेने से पहले दूसरे पक्ष की बात ध्यानपूर्वक सुनना, दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही निष्पक्ष निर्णय लेना, मोह अथवा भावनात्मक आवेश में निर्णय न करना तथा भारतीय संस्कृति में साधनों से अधिक संबंधों और मानवीय मूल्यों को महत्व देना। उनके व्याख्यान ने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. (डॉ.) नरेश चन्द्र गौतम ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मार्गदर्शन देने वाला अनुपम ग्रंथ है और वर्तमान समय में इसके जीवन-मूल्यों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम का संचालन सुश्री श्रुति सिन्हा ने किया।

इस अवसर पर श्रीकृष्ण गौतम, प्रभाकर शर्मा, डॉ. रजनीश, डॉ. गिरीश गुप्ता, सतीश देव त्यागी, श्रीमती मीरा सक्सेना (आईआरएस), डॉ. विजय सिंघल, श्रीमती विनीता मित्तल, सुश्री श्रुति दास, श्रीमती आरती शर्मा, ओ.पी. गुप्ता, चंद्रशेखर सिंह, मृदुल कुलश्रेष्ठ, जितेन्द्र फौजदार, डॉ. मृदुल पांड्या, डॉ. वीरेन्द्र प्रकाश, डॉ. चांदनी यादव, श्रीमती पूनम वैष्णेय, डॉ. मंजू गुप्ता, रामेन्द्र शर्मा, उमाशंकर पराशर, चतुर्वेदी तिवारी, विजय गोयल, श्रीमती ऋतु गोयल, डॉ. ज्योति गुप्ता, मुकेश जादौन आदि मौजूद रहे।

इसके अलावा सुरेश तिवारी, प्रेम कुमार शर्मा, प्रो. सुरेन्द्र सिंह चौहान, अमित लवानिया, चन्द्रशेखर शर्मा, अवनीश शुक्ला, डी.के. पाण्डेय, श्रीमती नीलम गुप्ता, डॉ. आनन्द राय, अशोक गौतम, पी.के. शर्मा, जगमोहन गुप्ता, प्रो. अमिता त्रिपाठी, संतोष गौतम तथा अजय गुप्ता सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, चिकित्सक, पर्यावरणविद, गीता चिंतक, गोसेवक, अधिवक्ता, उद्योगपति, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक, विद्यार्थी तथा मिशन के पदाधिकारी एवं सदस्य भी उपस्थित रहे।

अंत में महासचिव राकेश चन्द्र शुक्ला ने मुख्य वक्ता, अध्यक्ष, सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, मीडिया प्रतिनिधियों एवं कार्यक्रम की सफलता में सहयोग देने वाले सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।

SP_Singh AURGURU Editor