गोपाल जी धाम में श्रीगणेश महिमा का गुणगान, श्रीगणेश पुराण प्रवचन से हुई आध्यात्मिक श्रृंखला की शुरुआत
आगरा। गुरुदीपिका योगक्षेम फाउंडेशन के तत्वावधान में दयालबाग स्थित श्रीगोपालजी धाम में आध्यात्मिक प्रवचन श्रृंखला का शुभारंभ श्रीगणेश पुराण के मंगलमय प्रवचन के साथ हुआ। कथावाचक डॉ. दीपिका उपाध्याय ने भगवान श्रीगणेश के विभिन्न अवतारों, उनके दिव्य स्वरूप और धर्म, कर्म तथा भक्ति के गूढ़ संदेशों का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान से सराबोर कर दिया। प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता रहा।
दयालबाग स्थित श्रीगोपालजी धाम में आयोजित प्रवचन श्रृंखला की शुरुआत श्रीगणेश पुराण के पाठ और व्याख्यान से हुई। कथावाचक डॉ. दीपिका उपाध्याय ने बताया कि श्रीगणेश पुराण की कथा राजा सोमकांत और ऋषि भृगु के संवाद से प्रारंभ होती है। यह कथा मनुष्य को यह संदेश देती है कि जीवन में मिलने वाले मित्र और शत्रु कोई अन्य नहीं, बल्कि पूर्व जन्मों और पूर्व में किए गए कर्मों का ही परिणाम होते हैं।
प्रवचन के दौरान उन्होंने भगवान वेदव्यास द्वारा पुराणों के लेखन के समय आने वाली बाधाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवान श्रीगणेश की आराधना से सभी विघ्न दूर हुए और पुराणों का लेखन सफलतापूर्वक संपन्न हो सका। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं और सच्ची श्रद्धा से उनकी उपासना करने पर जीवन की कठिन से कठिन बाधाएं भी समाप्त हो जाती हैं।
डॉ. दीपिका उपाध्याय ने श्रद्धालुओं को सिद्धि विनायक, बल्लाल विनायक और चिंतामणि गणेश की स्थापना से जुड़ी पौराणिक कथाएं भी विस्तार से सुनाईं। इन प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने भगवान गणेश की कृपा, भक्ति और धर्म के महत्व को सरल भाषा में समझाया।
प्रवचन के दौरान राजा रुक्मांगद की कथा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी विपत्ति क्यों न आ जाए, धर्म और सत्य के मार्ग से कभी विचलित नहीं होना चाहिए। धर्म का पालन ही अंततः विजय और कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।
प्रवचन के समापन से पूर्व मुनि गृत्समद तथा उनके पुत्र की उत्पत्ति से संबंधित कथा का भी वर्णन किया गया। इसके बाद प्रथम दिवस की कथा को विश्राम दिया गया।
कार्यक्रम में गुरुदीपिका योगक्षेम फाउंडेशन के निदेशक रवि शर्मा ने श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की व्यवस्था संभाली। वहीं फाउंडेशन की निदेशक वारिजा चतुर्वेदी ने अधिक से अधिक लोगों से प्रवचन श्रृंखला में शामिल होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने की अपील की।
प्रवचन के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा का श्रवण किया और भगवान श्रीगणेश के जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।