आगरा में गणधर वलय विधान का भव्य शुभारंभ, 200 कलशों की घटयात्रा में गूंजे महावीर स्वामी के जयकारे
आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में सोमवार को एमडी जैन इंटर कॉलेज, हरीपर्वत स्थित आचार्य श्री शांति सभागार में गणधर वलय विधान का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में आचार्य 108 श्री इन्द्रनंदी जी महाराज ससंघ तथा गणिनी शिरोमणि आर्यिका 105 श्री विशुद्धमति माताजी, आर्यिका विज्ञमति माताजी सहित आर्यिका संघ का मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ। धूलियागंज से निकली 200 कलशों की विशाल घटयात्रा, धार्मिक अनुष्ठानों, ध्वजारोहण और प्रवचनों ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
आगरा। आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में सोमवार को हरीपर्वत स्थित एमडी जैन इंटर कॉलेज मैदान के आचार्य श्री शांति सभागार में आगरा के धार्मिक इतिहास के महत्वपूर्ण आयोजनों में शामिल गणधर वलय विधान का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम को आचार्य 108 श्री इन्द्रनंदी जी महाराज ससंघ तथा 57 वर्षों की संयम साधना से अलंकृत सिद्धांत रत्न, भारत गौरव, गणिनी शिरोमणि आर्यिका 105 श्री विशुद्धमति माताजी एवं आर्यिका विज्ञमति माताजी ससंघ का मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्री पल्लीवाल दिगंबर जैन मंदिर, धूलियागंज से निकली भव्य घटयात्रा के साथ हुआ। भगवान महावीर स्वामी के जयघोषों और धार्मिक मंगल ध्वनियों के बीच निकली इस यात्रा में लगभग 200 महिलाएं सिर पर कलश धारण कर चल रही थीं। यात्रा धूलियागंज से प्रारंभ होकर घटिया मार्ग से होती हुई एम.डी. जैन इंटर कॉलेज, हरीपर्वत पहुंचकर संपन्न हुई।
यात्रा में सौधर्म इन्द्र, कुबेर, यज्ञनायक इन्द्र, ईशान इन्द्र और चक्रवर्ती इन्द्र सहित विभिन्न पात्रों का स्वरूप धारण किए श्रद्धालु आकर्षक बग्गियों पर सवार थे। धार्मिक वेशभूषा और भक्ति भाव से सजी यह शोभायात्रा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रही।
भजनों पर झूमे श्रद्धालु
यात्रा के दौरान किशोर बैंड की मधुर प्रस्तुतियों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। "तुमसे लगी लगन" जैसे भजनों की धुनों पर श्रद्धालु, विशेषकर महिलाएं, भक्ति में सराबोर होकर नृत्य करती नजर आईं। ढोल-नगाड़ों और वाद्य यंत्रों की गूंज से पूरा मार्ग धर्ममय वातावरण में डूब गया।
धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन
आयोजन स्थल पर बाल ब्रह्मचारी आशीष भैया जी के निर्देशन में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। ध्वजारोहण का सौभाग्य प्रदीप जैन पी.एन.सी. परिवार को प्राप्त हुआ, जबकि पंडाल उद्घाटन विमलेश कुमार-उषा जैन मार्शन्स परिवार तथा हीरालाल बैनाड़ा-बीना बैनाड़ा परिवार द्वारा किया गया। मंडप उद्घाटन निर्मल मोठ्या-विमल जैन मोठ्या परिवार ने किया। चित्र अनावरण जितेंद्र कुमार जैन, पुष्पेंद्र जैन पथिक एवं पूर्व डिप्टी मेयर अशोक जैन ने किया, जबकि दीप प्रज्ज्वलन विमल कुमार सिंघई, पार्षद राकेश जैन, मनोज जैन बाकलीवाल और सुनील जैन ठेकेदार ने संयुक्त रूप से किया।
गणधर देवों की महिमा का वर्णन
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका विज्ञमति माताजी ने गणधर देवों की महिमा का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने कहा कि गणधर वे महान आत्माएं हैं जो भगवान की दिव्य वाणी को ग्रहण कर उसे जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि गणधर देव ज्ञान, तप, ऋद्धि और बुद्धि के अद्वितीय संगम होते हैं। माताजी ने कहा कि गणधर वलय विधान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि ज्ञान के ऊपर पड़े अज्ञान के आवरण को हटाने का माध्यम है। उन्होंने गणधरों की बीज बुद्धि, पादानुसारी ऋद्धि, संभिन्नश्रोत बुद्धि और कोष्ठ बुद्धि की महत्ता बताते हुए कहा कि इन्हीं दिव्य क्षमताओं के कारण वे भगवान की वाणी को आत्मसात कर सके और उसे संरक्षित रख सके।
बड़ी संख्या में उपस्थित रहे श्रद्धालु
धर्मसभा का संचालन परिषद के महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार ने किया। कार्यक्रम में प्रदीप जैन पी.एन.सी., हीरालाल बैनाड़ा, निर्मल मोठ्या, सुशील जैन सिंघई, पन्नालाल बैनाड़ा, पूर्व मंत्री सुनील जैन ठेकेदार, पूर्व डिप्टी मेयर अशोक जैन, परिषद अध्यक्ष जगदीश प्रसाद जैन, राकेश जैन परदे वाले, विमल जैन, पवन जैन, आशीष जैन मोनू, मनीष जैन लवली, कुमार मंगलम जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग उपस्थित रहे।
मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया कि आज प्रातः 7 बजे से गणधर वलय विधान के द्वितीय दिवस पर मुनि संघ एवं आर्यिका संघ के सानिध्य में शांतिधारा, सामूहिक पूजन एवं मंगल प्रवचन का आयोजन हरीपर्वत स्थित एम.डी. जैन परिसर में किया जाएगा।