चोरी हुई कार का क्लेम लेने को बीमा कंपनी से 14 वर्ष कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी  

आगरा। बीमा कंपनियां क्लेम के समय लोगों को किस कदर परेशान करती हैं, इसका एक उदाहरण आगरा के शिवरचन हैं, जिन्हें अपनी चोरी हुई कार का क्लेम प्राप्त करने के लिए 14 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। बीमा कंपनी ने जिला उपभोक्ता प्रतितोष फोरम के आदेश के खिलाफ अपील कर दी थी। राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वारा जिला फोरम का आदेश सही ठहराए जाने पर ही बीमा कंपनी ने पीड़ित को क्लेम का भुगतान किया है।

Apr 3, 2025 - 12:12
 0
चोरी हुई कार का क्लेम लेने को बीमा कंपनी से 14 वर्ष कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी   

कार चोरी के एक मामले में राज्य आयोग ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम प्रथम के उस आदेश को बरकरार रखा है जिसमें चोरी हुई कार का क्लेम रिजेक्ट करने के मामले में नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को आदेश दिया गया कि वह परिवादी शिवचरन को 5,46, 451 रुपये छह प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया गया था। मानसिक कष्ट की क्षतिपूर्ति तथा वाद व्यय के रूप में दो-दो हजार रुपये भी देने को कहा गया था।

ताजगंज के नई आबादी, सिद्धार्थ नगर निवासी शिवचरन चोरी हुई कार का क्लेम पाने के लिए 14 साल से ज्यादा समय तक लड़ाई लड़नी पड़ी। शिवचरन की गाड़ी 23 दिसम्बर 2010 को आगरा की ओर आते समय सादाबाद क्षेत्र में उस समय चोरी हो गई थी जब वह कार को खड़ा कर पेशाब करने के लिए उतरा था। इसी दौरान अज्ञात चोर मास्टर की लगाकर कार को ले उड़ा था।

शिवचरन ने थाना सादाबाद में रिपोर्ट लिखाई गई। पुलिस ने कार का पता न चलने पर फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। इसके बाद परिवादी ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में क्लेम किया। कंपनी ने सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दावा खारिज कर दिया। इसके बाद शिवचरन ने न्याय मांगने के लिए फोरम में वाद दायर किया था। फोरम ने वर्ष 2013 में अपने आदेश में क्लेम खारिज किए जाने को सेवा में कमी माना था। बीमा कंपनी को आदेशित किया था कि क्लेम की धनराशि आदेश के एक माह के अंदर फोरम में जमा करे।

जिला फोरम के इस आदेश के खिलाफ बीमा कंपनी राज्य आयोग में चली गई। अब राज्य आयोग द्वारा भी जिला फोरम के आदेश को बरकराऱ रखे के बाद बीमा कंपनी ने जिला फोरम में संबधित धनराशि चेक के माध्यम से जमा कर दी है। ब्याज समेत 6.64 लाख का क्लेम शिवचरन को मिला है।

SP_Singh AURGURU Editor