ओबीसी आरक्षण के आंकड़े जुटाने में आयोग की कवायद पर हाईकोर्ट की नजर, 14 अक्टूबर को आगरा की रिपोर्ट तलब

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों के लिए ओबीसी आरक्षण तय करने की प्रक्रिया में जुटाए जा रहे आंकड़ों की विश्वसनीयता अब न्यायिक जांच के दायरे में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछड़ा वर्ग आयोग से आगरा जिले में सर्वे और जानकारी जुटाने के काम का पूरा हिसाब मांगा है। अदालत का ध्यान इस बात पर है कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया कितनी प्रभावी है और उससे पर्याप्त तथ्य सामने आ रहे हैं या नहीं।

Oct 10, 2026 - 08:25
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ओबीसी आरक्षण के आंकड़े जुटाने में आयोग की कवायद पर हाईकोर्ट की नजर, 14 अक्टूबर को आगरा की रिपोर्ट तलब

न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने दशरथ यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग की ओर से प्रस्तुत जानकारी पर सवाल किए। आगरा में तीन लाख से अधिक ओबीसी आबादी के सापेक्ष आयोग के समक्ष 179 लोगों के पहुंचने और उनमें से केवल 29 के बयान दर्ज होने का तथ्य सामने आया। अदालत ने इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए आगरा में अब तक हुई कार्रवाई का विस्तृत विवरण मांगा है। आयोग को यह रिपोर्ट 14 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे तक सीलबंद लिफाफे में पेश करनी होगी।

प्रदेशव्यापी सर्वे की रफ्तार भी जांच के दायरे में

सुनवाई में आयोग ने बताया कि प्रदेश के 40 जिलों में आंकड़े एकत्र करने का लगभग 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। शेष जिलों में भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इस पर अदालत ने निर्धारित छह महीने की अवधि में पूरे प्रदेश का काम पूरा करने की व्यावहारिकता को लेकर सवाल उठाए। आयोग करीब पांच महीने से काम कर रहा है, ऐसे में समयसीमा के भीतर सर्वे पूरा करने की चुनौती पर भी ध्यान दिया गया।

मामले में आयोग की सलाहकार समिति की भूमिका का पहलू भी सामने आया। अदालत ने गौर किया कि आयोग के गठन के बाद बनाई गई इस समिति की अब तक बैठक नहीं हुई थी। सुनवाई में समिति की पहली बैठक 12 अक्टूबर को प्रस्तावित होने की जानकारी दी गई।

आरक्षण के लिए जरूरी आंकड़ों की प्रामाणिकता अहम

स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण निर्धारित करने के लिए केवल सामान्य आबादी के आंकड़े पर्याप्त नहीं होते। इसके लिए संबंधित निकायों में पिछड़ेपन की स्थिति का अनुभवजन्य आकलन और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुरूप लागू ट्रिपल टेस्ट के तहत जुटाए जाने वाले आंकड़े इसी उद्देश्य से महत्वपूर्ण हैं।

हाईकोर्ट ने आयोग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि वह पिछड़ेपन से जुड़े तथ्य किस तरीके से जुटा रहा है और उनके विश्लेषण की प्रक्रिया क्या है। ऐसे में आगरा की रिपोर्ट केवल जिले में हुए काम का ब्योरा नहीं होगी, बल्कि आयोग की सर्वे प्रक्रिया को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण होगी।

14 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी नजर

अब आयोग को आगरा में किए गए सर्वे, लोगों की भागीदारी और दर्ज बयानों से संबंधित जानकारी अदालत के सामने रखनी है। इसके बाद ही मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही की दिशा स्पष्ट होगी। फिलहाल हाईकोर्ट के इस आदेश को पंचायत चुनावों की तारीख तय करने या चुनाव स्थगित होने का फैसला नहीं माना जा सकता। ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया और चुनाव कार्यक्रम पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, यह आगे की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।

SP_Singh AURGURU Editor