शताब्दी का ऐतिहासिक उत्सव: डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने 100वें स्थापना दिवस पर रचा गौरव का नया अध्याय, भविष्य के विज़न का किया ऐलान

शिक्षा, शोध और नवाचार के सौ वर्षों के गौरवशाली सफर को नई ऊर्जा और भविष्य के संकल्पों से जोड़ते हुए डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने बुधवार को अपना 100वां स्थापना दिवस भव्यता, गरिमा और उत्साह के साथ मनाया। शताब्दी समारोह में विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक उपलब्धियों, सांस्कृतिक विरासत, शैक्षणिक उत्कृष्टता और भविष्य की विकास योजनाओं का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया। कुलपति प्रो. आशु रानी ने गुणवत्तापूर्ण, रोजगारपरक और वैश्विक स्तर की शिक्षा को विश्वविद्यालय की नई दिशा बताया।

Jul 1, 2026 - 21:33
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शताब्दी का ऐतिहासिक उत्सव: डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने 100वें स्थापना दिवस पर रचा गौरव का नया अध्याय, भविष्य के विज़न का किया ऐलान
डॊ. भीमराव आंबेडकर विवि के 100वें स्थापना दिवस के मौके पर खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार में आयोजित समारोह के दौरान प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एक झलक।

विवि के 100वें स्थापना दिवस समारोह में बोलतीं कुलपति प्रो. आशू रानी।

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने बुधवार को अपने 100वें स्थापना दिवस (शताब्दी स्थापना दिवस) का आयोजन स्वामी विवेकानंद परिसर (खंदारी कैंपस) स्थित जेपी सभागार में अत्यंत भव्य एवं गरिमामय वातावरण में किया। समारोह विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास, शैक्षणिक उपलब्धियों, सांस्कृतिक विरासत और भविष्य की विकास योजनाओं का साक्षी बना। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. आशु रानी ने की।

समारोह का शुभारंभ सरस्वती वंदना, दीप प्रज्ज्वलन, वंदे मातरम्, विश्वविद्यालय कुलगीत तथा विशेष रूप से तैयार किए गए शताब्दी गीत की प्रस्तुति के साथ हुआ। मंच पर कुलपति प्रो. आशु रानी, कुलसचिव अजय कुमार मिश्रा, अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. भूपेंद्र स्वरूप शर्मा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओमप्रकाश तथा वित्त अधिकारी सुदर्शन सिंह उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की रूपरेखा डॉ. नीलू सिन्हा ने प्रस्तुत की। ललित कला संस्थान के डॉ. देवाशीष गांगुली एवं विद्यार्थियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया, जबकि मॉडल स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना पर आधारित सामूहिक नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया।

स्वागत भाषण में प्रो. भूपेंद्र स्वरूप शर्मा ने विश्वविद्यालय की 100 वर्षों की विकास यात्रा, शैक्षणिक उपलब्धियों और शताब्दी वर्ष के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. मीनाक्षी चौधरी ने अतिथियों का सम्मान किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की शताब्दी यात्रा पर आधारित विशेष लघु डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया, जिसे सामुदायिक रेडियो 'आगरा की आवाज़' के इंजीनियर तरुण श्रीवास्तव ने समन्वयक प्रो. संजय चौधरी के निर्देशन में तैयार किया। डॉक्यूमेंट्री में विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत, वर्तमान उपलब्धियों और भविष्य के विज़न को प्रस्तुत किया गया।

समारोह में शिक्षकों की ओर से प्रो. प्रदीप श्रीधर, प्रो. अचला गक्खड़ और प्रो. मोहम्मद हुसैन ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान और भविष्य की योजनाओं पर अपने विचार रखे। गैर-शिक्षण कर्मचारियों की ओर से अरविंद गुप्ता एवं राजीव जैन ने विश्वविद्यालय की प्रगति में कर्मचारियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं वरिष्ठ महिला कर्मचारी एवं शोध विभागाध्यक्ष डॉ. नीलम शर्मा ने महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार व्यक्त किए।

विद्यार्थियों की ओर से आईईटी की छात्रा स्वयं शर्मा तथा डीडीयूआईआरडी के छात्र अतुल महौर ने विश्वविद्यालय में मिले शैक्षणिक अवसरों और छात्रहितैषी वातावरण के अनुभव साझा किए। विधि विभाग के छात्र सौरव यादव ने बताया कि विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों के 100 से अधिक छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में भाग लिया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम समारोह का मुख्य आकर्षण रहे। ओडिसी, भरतनाट्यम और कथक की संयुक्त प्रस्तुति 'त्रिधारा', 'भारत–शांति का संदेशवाहक' विषय पर मूक अभिनय, 'शिक्षा का महत्व' पर लघु नाटिका, दिव्य गीत तथा 'ब्रज के रंग कान्हा के संग' शीर्षक से लोकनृत्य ने दर्शकों की भरपूर सराहना बटोरी।

समारोह में विश्वविद्यालय परिवार के कर्मचारियों के मेधावी बच्चों को भी सम्मानित किया गया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए और सामूहिक छायाचित्र लिया गया।

अपने संबोधन में कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि विश्वविद्यालय की शताब्दी केवल अतीत का उत्सव नहीं बल्कि भविष्य के संकल्पों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण, रोजगारपरक और नवाचार आधारित शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन एवं दूरस्थ शिक्षा, इंटीग्रेटेड बी.एड., एम.टेक. और फुटवियर टेक्नोलॉजी जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में कार्य चल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय ने गत वर्ष एनएएसी ए+, एनआईआरएफ और आईआरएफ में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।

शताब्दी समारोह के सफल आयोजन में डॉ. रत्ना पांडे, डॉ. मोनिका अस्थाना, डॉ. मीनाक्षी चौधरी तथा विश्वविद्यालय के जनसंपर्क विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जनसंपर्क अधिकारी पूजा सक्सेना, सह जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वेतलाना, डॉ. संदीप शर्मा, इंजीनियर तरुण श्रीवास्तव और दीपक कुलश्रेष्ठ ने विश्वविद्यालय की विकास यात्रा और शताब्दी समारोह के प्रभावी प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान दिया।

कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव अजय कुमार मिश्रा ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ शताब्दी स्थापना दिवस समारोह का गरिमापूर्ण समापन हुआ। यह ऐतिहासिक आयोजन विश्वविद्यालय की ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण बनकर उपस्थित जनसमूह को नई ऊर्जा और भविष्य के प्रति विश्वास से भर गया।

SP_Singh AURGURU Editor