मैं गनतंत्र का हिस्सा नहीं रह सकताः बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का गणतंत्र दिवस पर विद्रोही त्यागपत्र, शंकराचार्य और ब्राह्मणों के मुद्दे पर सत्ता तंत्र पर सीधा प्रहार, आह्वान- ब्राह्मण जनप्रतिनिधियों में शर्म और रीढ़ बची हो तो वे भी इस्तीफा दें
-रमेश कुमार सिंह- बरेली। गणतंत्र दिवस के दिन बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा देकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया। अपने तीखे और भावनात्मक वक्तव्य में उन्होंने न केवल तंत्र पर गंभीर आरोप लगाए, बल्कि ब्राह्मण समाज के कथित अपमान, प्रयागराज माघ मेले की घटना और यूजीसी रेगुलेशंस 2026 को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला।
ब्राह्मण जनप्रतिनिधियों में शर्म और रीढ़ बची हो तो वे भी इस्तीफा दें
अपने इस्तीफे के साथ उन्होंने एक बेहद आक्रामक, भावनात्मक और चेतावनी भरा बयान जारी करते हुए कहा कि जब वे स्वयं पद छोड़ रहे हैं, तो यह उनके (ब्राह्मण) समाज के जनप्रतिनिधियों के लिए भी आत्ममंथन का समय है। उन्होंने खुले शब्दों में आह्वान किया कि ब्राह्मण समाज के जितने भी जनप्रतिनिधि केंद्र सरकार या राज्य सरकार में हैं, यदि उनमें थोड़ी भी शर्म और रीढ़ बची है, तो वे तुरंत अपने-अपने पदों से इस्तीफा दें और समाज के साथ खड़े हों। उन्होंने कहा कि समाज रहेगा, तभी पद रहेगा, समाज के बिना कोई भी व्यक्ति चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं रहेगा।
अल्पमत में दिख रहीं केंद्र और राज्य सरकारें
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि इस समय सामान्य वर्ग केंद्र और राज्य सरकार से खुद को अलग मानने लगा है और हालात ऐसे बन चुके हैं कि दोनों ही जगह सरकार एक तरह से अल्पमत में दिखाई दे रही है, जिससे देश में अत्यंत भयावह परिस्थितियां उत्पन्न हो चुकी हैं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बटुक शिष्यों से मारपीट से मैं भीतर तक आहत
अपने बयान में अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि बीते दो सप्ताह में दो बड़े निंदनीय कृत्य सामने आए हैं, जिन्होंने उन्हें भीतर तक आहत कर दिया है। पहला कृत्य प्रयागराज माघ मेले से जुड़ा है, जहां मौनी अमावस्या के स्नान के लिए जाते समय ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बटुक शिष्यों को चोटी खींचकर घसीटा गया और उनके साथ मारपीट की गई। इस पूरी घटना को लेकर उन्होंने स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जो भी कृत्य किया गया, वह बेहद निंदनीय है और वास्तविक अर्थों में प्रशासन के स्तर से इस मामले में कोई कार्रवाई हुई ही नहीं।
ब्राह्मणों के लिए चोटी का विशेष महत्व
उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज के लिए चोटी का विशेष और धार्मिक महत्व होता है और एक अधिकारी होते हुए इस तरह का दृश्य देखना उनके लिए अत्यंत आपत्तिजनक है। उन्होंने कहा कि कोई भी सामान्य ब्राह्मण यदि प्रयागराज की यह घटना देखेगा, तो उसकी रूह कांप जाएगी।
यूजीसी रेगुलेशंस 2026 से ब्राह्मण बेटे-बेटियों का उत्पीड़न बढ़ेगा
इसके बाद उन्होंने दूसरा बड़ा मुद्दा केंद्र सरकार द्वारा 13 जनवरी 2026 को प्रकाशित यूजीसी रेगुलेशंस 2026 का उठाया। अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि इन नियमों में सामान्य वर्ग को स्वघोषित अपराधी की तरह देखा गया है और एक वर्ग विशेष के लिए समता के नाम पर जो प्रावधान किए गए हैं, वे पूरी तरह निंदनीय और भेदभावपूर्ण हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस प्रकार के प्रावधान आने वाले समय में देश के भीतर आंतरिक असंतोष और सामाजिक खींचातानी को जन्म देंगे।
उन्होंने कहा कि समता समिति के नाम पर ब्राह्मण समाज के बेटे-बेटियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा सकता है, फर्जी शिकायतों के सहारे बेटियों का मानसिक और शारीरिक शोषण संभव है और प्रतिभावान बेटों के खिलाफ झूठे आरोप लगाकर उनके करियर को भी बर्बाद किया जा सकता है।
ब्राह्मण जनप्रतिनिधि कॊरपोरेट कंपनी के कर्मचारी बनकर रह गये हैं
इन दोनों घटनाओं का उल्लेख करते हुए अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि वे इनसे गहरे आहत हैं और इससे भी अधिक पीड़ा इस बात की है कि सामान्य वर्ग और ब्राह्मण समाज से जुड़े चुने हुए जनप्रतिनिधि पूरी तरह मूकदर्शक बने हुए हैं। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो ये जनप्रतिनिधि अब किसी कारपोरेट कंपनी के कर्मचारी बनकर रह गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि बहू-बेटियों और बच्चों की इज्जत भी लुट जाएगी, तब भी ये माननीय चुप ही बैठे रहेंगे और कुछ नहीं बोलेंगे। इस स्थिति ने समाज में भ्रम और असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
प्रशासन ही ब्राह्मणों की चोटी पकड़कर मारेगा तो अन्य वर्ग क्या व्यवहार करेंगे
अपनी मानसिक अवस्था को व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इस समय उनके भीतर जो पीड़ा और व्यथा है, उसे शब्दों में पूरी तरह बयान करना संभव नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि अब वे इस तंत्र का हिस्सा नहीं बन सकते, क्योंकि यहां न जनतंत्र बचा है और न गणतंत्र, अब केवल गनतंत्र शेष रह गया है। उन्होंने कहा कि वे केवल एक अधिकारी नहीं हैं, बल्कि एक ब्राह्मण भी हैं और जब उनके प्रतीक चिह्नों का इस तरह सार्वजनिक रूप से अपमान किया जाएगा, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब स्वयं प्रशासनिक तंत्र ही ब्राह्मणों की चोटी खींचकर मारने लगेगा, तो समाज के अन्य वर्ग उनके साथ कैसा व्यवहार करेंगे।
गौरतलब है कि अलंकार अग्निहोत्री ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से बीटेक और एलएलबी की पढ़ाई की है और वे अमेरिका में भी कार्य कर चुके हैं। एक सशक्त शैक्षणिक और अंतरराष्ट्रीय अनुभव रखने वाले अधिकारी का इस तरह गणतंत्र दिवस पर इस्तीफा देना, मौजूदा तंत्र और नीतियों पर एक बड़े सवाल के रूप में देखा जा रहा है।