डीपीएस में झगड़ने वाले दो नाबालिगों की पहचान उजागर होने का मामला बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक पहुंचा, नरेस पारस ने दोषियों को दंडित करने की मांग उठाई
आगरा। शास्त्रीपुरम स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) में कक्षा दस के दो नाबालिग छात्रों के बीच हुआ विवाद अब गंभीर कानूनी और सामाजिक मुद्दे का रूप ले चुका है। जहां एक ओर झगड़े के दौरान एक छात्र द्वारा दूसरे छात्र के दांत तोड़ दिए गए, वहीं दूसरी ओर इस घटना के बाद जिस तरह से नाबालिगों की पहचान सार्वजनिक की गई, उसने पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है। इस गंभीर प्रकरण को लेकर चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट नरेस पारस ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को अवगत कराते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।
नरेस पारस एडवोकेट ने आयोग में दर्ज कराई शिकायत में कहा है कि घटना के बाद पीड़ित छात्र के पिता, जो एक यूट्यूबर हैं, ने अपने घायल पुत्र का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जो तेजी से वायरल हो गया। यह कदम बाल अधिकारों की दृष्टि से अत्यंत संवेदनहीन और कानून के विरुद्ध है, क्योंकि नाबालिग की पहचान सार्वजनिक करना सीधे तौर पर उसके अधिकारों का उल्लंघन है। मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी पीड़ित बच्चे के फोटो और वीडियो लगातार प्रसारित होते रहे, जिससे उसकी निजता और गरिमा पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए।
नरेस पारस के अनुसार मामले में थाना सिकंदरा पुलिस ने आरोपी छात्र के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 116(2) और 117(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया। हालांकि दोनों छात्र नाबालिग हैं, इसके बावजूद एफआईआर दर्ज कर ली गई और उसकी प्रतिलिपि सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसमें आरोपी छात्र का नाम भी सार्वजनिक हो गया। यह स्थिति किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 के स्पष्ट उल्लंघन के रूप में सामने आई है, जिसमें नाबालिगों की पहचान गोपनीय रखना अनिवार्य है।
एफआईआर के मामले को गंभीरता से लेते हुए आगरा पुलिस के उच्चाधिकारियों ने सिकंदरा थाने के तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है, जो एक प्रारंभिक कदम के रूप में सराहनीय है। बावजूद इसके, यह कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और पूरे मामले में व्यापक, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की आवश्यकता है।
नरेस पारस ने आयोग से मांग की है कि इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही, जिन लोगों ने नाबालिगों की पहचान उजागर की है, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से वायरल वीडियो, एफआईआर की प्रतिलिपि और संबंधित सामग्री को तत्काल हटवाया जाए।
इसके अतिरिक्त, स्कूल प्रशासन की भूमिका, सुरक्षा व्यवस्था में संभावित लापरवाही और घटना के दौरान अपनाए गए प्रोटोकॉल की भी जांच की मांग उठाई गई है।