आईएएस का मुखौटा लगाकर ठगी का साम्राज्य: बरेली में फर्जी अफसर गैंग का भंडाफोड़, तीन युवतियां गिरफ्तार कर जेल भेजी गईं
बरेली में नौकरी दिलाने के नाम पर सुनियोजित ठगी का बड़ा खुलासा हुआ है, जहां खुद को आईएएस और एसडीएम बताकर तीन युवतियां बेरोजगारों को जाल में फंसाती रहीं। पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश करते हुए तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

इस चित्र में दिख रही युवती विभा है, जो खुद को आईएएस बताकर बेरोजगारों को नौकरी के नाम पर ठगा करती थी।
-आरके सिंह-
बरेली। जनपद में सरकारी नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। थाना बारादरी पुलिस ने फर्जी महिला आईएएस अफसर बनकर लोगों को ठगने वाली तीन युवतियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो सगी बहनें भी शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में नकदी, कूटरचित दस्तावेज, मोबाइल, लैपटॉप और बैंक खातों में जमा रकम बरामद की है।
ऐसे रचा गया ठगी का जाल
अपर पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी नगर तृतीय पंकज श्रीवास्तव ने प्रेस वार्ता में बताया कि 26 अप्रैल को प्रीति लयल निवासी फाइक एन्क्लेव फेस-2, थाना बारादरी ने शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता के अनुसार वर्ष 2022 में उसकी मुलाकात शिखा पाठक से हुई, जिसने अपनी बहन विप्रा शर्मा को एसडीएम बताते हुए सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा दिया।
यूपीएसएसएससी के माध्यम से कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिलाने के नाम पर प्रीति और उसके तीन परिचितों से करीब 11 लाख रुपये ठग लिए गए। इसके बाद आरोपियों ने फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कर ईमेल, व्हाट्सएप और डाक के जरिए भेज दिए।
आईएएस-एसडीएम बनकर करती थीं ठगी
मुख्य आरोपी विप्रा शर्मा खुद को आईएएस अधिकारी बताती थी और अपनी कार पर “SDM FR उत्तर प्रदेश सरकार” लिखाकर रौब झाड़ती थी। इससे लोगों को विश्वास हो जाता था कि वे असली अधिकारी हैं।
गिरफ्तारी और बरामदगी
27 अप्रैल को पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना पर डेंटल कॉलेज रोड से तीनों आरोपियों डॉ. विप्रा शर्मा व शिखा शर्मा (दोनों सगी बहनें) और दीक्षा पाठक को गिरफ्तार किया। इनके पाससे 4.50 लाख रुपये नगद, 10 चेकबुक, 4 मोबाइल फोन (आईफोन व वीवो), 2 लैपटॉप, 3 पासबुक बरामद हुई हैं। 55 लाख रुपये विभिन्न खातों में फ्रीज कराये गये हैं। इसके अलावा महिंद्रा XUV 700 कार भी बरामद की गई है।
कबूला जुर्म, खुली परतें
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे 2021-22 से लोगों को सरकारी नौकरी का लालच देकर पैसे ऐंठ रही थीं। फर्जी नियुक्ति पत्र बनाकर लखनऊ से डाक द्वारा भेजे जाते थे ताकि पीड़ितों को विश्वास हो सके।
ठगी से मिले पैसों से उन्होंने कार और मकान खरीदे तथा शौक पूरे किए। पवन विहार स्थित मकान को ही फर्जी दस्तावेज तैयार करने का अड्डा बना रखा था।
गंभीर धाराओं में केस दर्ज
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 भादवि के साथ-साथ बीएनएस की अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। तीनों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य पीड़ितों और नेटवर्क की तलाश में जुटी है।