कानून भूली पुलिस, डीपीएस छात्र हमले में एफआईआर बनी मुसीबत, दरोगा समेत तीन सस्पेंड

आगरा के डीपीएस शास्त्रीपुरम में 10वीं के छात्र पर हमले के बाद पुलिस ने तीन दिन बाद एफआईआर दर्ज की, लेकिन किशोर न्याय कानून का पालन न करने पर दरोगा समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। SHO के खिलाफ जांच बैठाई गई है और नाबालिग पर दर्ज एफआईआर को निरस्त कर दिया गया है। वहीं स्कूल प्रशासन की लापरवाही भी जांच के दायरे में है।

Apr 29, 2026 - 01:19
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कानून भूली पुलिस, डीपीएस छात्र हमले में एफआईआर बनी मुसीबत, दरोगा समेत  तीन सस्पेंड

आगरा। थाना सिकंदरा क्षेत्र स्थित डीपीएस में 10वीं के छात्र पर हुए हमले का मामला अब सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस कार्रवाई भी सवालों के घेरे में आ गई है। तीन दिन बाद दर्ज की गई एफआईआर ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए, जिसके बाद दरोगा समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।

गौरतलब है घटना 25 अप्रैल की सुबह की है। पीड़ित छात्र, जो डीपीएस शास्त्रीपुरम में कक्षा 10 का छात्र है, रोज की तरह स्कूल पहुंचा था। आरोप है कि क्लास के दौरान ही दूसरे छात्र ने उसके मुंह पर जोरदार पंच मार दिया था। इस हमले में छात्र के तीन दांत टूट गए थे और उसके जबड़े में गंभीर चोट आई थी। हालत यह थी कि उसके मुंह से लगातार खून बह रहा था।

पिता का आरोप: इलाज नहीं, बस मुंह में ठूंसी रूई

घायल छात्र के पिता पीयूष मल्होत्रा ने स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया था। उन्होंने बताया कि स्कूल से फोन पर “हल्की चोट” की सूचना दी गई, लेकिन जब वे पहुंचे तो बेटे की हालत बेहद खराब थी। पीयूष मल्होत्रा ने बेटे का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर न्याय की गुहार भी लगाई। कार्रवाई में देरी से नाराज पिता ने सोमवार को जिलाधिकारी मनीष बंसल से मुलाकात की। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूल की जांच के लिए कमेटी गठित करने की बात कही।

तीन दिन बाद एफआईआर और यहीं हुई सबसे बड़ी चूक

घटना के तीन दिन बाद पुलिस ने आरोपी नाबालिग छात्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। लेकिन यही कदम पुलिस पर भारी पड़ गया। दरअसल, किशोर न्याय अधिनियम के तहत 7 साल से कम सजा वाले मामलों में सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती है। इसके लिए पहले सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट जरूरी होती है। फिर मामला किशोर न्याय बोर्ड के सामने रखा जाता है। बोर्ड तय करता है कि एफआईआर होगी, काउंसिलिंग होगी या केस समाप्त होगा। 

नियम तोड़े तो निलंबन हुआ

डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास  ने बताया कि इस मामले में नियमों का पालन नहीं किया गया। इसके चलते दरोगा मनीपाल सिंह (बाल कल्याण अधिकारी), मुंशी कमल चंदेल और सिपाही सनी धामा को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा थाना प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार त्रिपाठी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। साथ ही, नाबालिग पर दर्ज की गई एफआईआर को भी समाप्त कर दिया गया है।

स्कूल और पुलिस दोनों कटघरे में

इस पूरे मामले में अब दो स्तर पर जांच चल रही है, स्कूल प्रशासन की लापरवाही और पुलिस की कानूनी प्रक्रिया में चूक। दोनों ही पक्षों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।