आगरा का पुरानी चुंगी मैदान ‘क्रांति स्थल’ घोषित होः नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ऐतिहासिक सभा और शहीद परशुराम की शहादत को दिलाने उठी आवाज
आगरा के मोतीगंज स्थित पुरानी चुंगी मैदान को ऐतिहासिक क्रांति स्थल घोषित करने की मांग उठी है। राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रमाशंकर शर्मा एडवोकेट ने इस स्थल को स्वतंत्रता आंदोलन की अमिट धरोहर बताते हुए यहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस और शहीद परशुराम की प्रतिमा स्थापित करने की मांग उठाई है।
आगरा। मोतीगंज पुरानी चुंगी मैदान को ऐतिहासिक क्रांति स्थल घोषित करने की मांग उठी है। राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रमाशंकर शर्मा एडवोकेट ने इस मैदान को स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए यहां सुभाष चंद्र बोस और शहीद परशुराम की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की है।
इतिहास में दर्ज है मैदान का गौरव
रमाशंकर शर्मा के अनुसार, “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” का ऐतिहासिक नारा देने वाले सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1940 में इसी मैदान में विशाल जनसभा की थी। आगरा के क्रांतिकारियों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को खून से पत्र लिखकर इसी मैदान में सभा के लिए आमंत्रित किया था। नेताजी ने यहां विशाल सभा को संबोधित करते हुए सशस्त्र क्रांति की चेतना को नई ऊर्जा दी थी।
इस सभा में भारी संख्या में क्रांतिकारी शामिल हुए थे, जिनमें गांधीवादी नेता शशि शिरोमणि भी अपने पिता स्वर्गीय प्रकाश नारायण शिरोमणि के साथ बाल्यकाल में उपस्थित थे।
1942 में ‘करो या मरो’ की गूंज, गोलीकांड में शहादत
बताया गया कि 10 अगस्त 1942 को इसी मैदान में महात्मा गांधी के ‘करो या मरो’ आह्वान के तहत स्वतंत्रता सेनानियों ने शपथ ली थी। इसी दौरान अंग्रेजों द्वारा की गई गोलीबारी में 17 वर्षीय क्रांतिकारी परशुराम शहीद हो गए थे। यह घटना इस मैदान को और भी ऐतिहासिक बनाती है।
15 अगस्त 1947 के बाद से आज तक हर वर्ष 15 अगस्त और 26 जनवरी को कांग्रेसजनों द्वारा फुलट्टी तिराहे से किनारी बाजार, रावतपाड़ा, काला महल, बेलनगंज, कचहरी घाट होते हुए विशाल जुलूस निकाला जाता रहा है, जो इस स्थल की ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाता है।
सरकार को पत्र, आंदोलन की चेतावनी
रमाशंकर शर्मा ने घोषणा की है कि वे प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, मुख्यमंत्री और शहर की महापौर को पत्र लिखकर इस मैदान को हेरिटेज क्रांति स्थल घोषित करने की मांग करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो राजीव गांधी बार एसोसिएशन, कांग्रेसजन, बुद्धिजीवी, अधिवक्ता और समाजसेवियों के साथ मिलकर आंदोलन चलाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर अनशन, धरना और प्रदर्शन भी किया जा सकता है।
इस मांग का मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम के इस महत्वपूर्ण स्थल से जोड़ना और महान क्रांतिकारियों के बलिदान को जीवित रखना है।