अजय पाल शर्मा को बंगाल चुनाव की ड्यूटी से हटाने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में याचिका, सुनवाई आज संभव
पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान टीएमसी प्रत्याशी को समझाते आईपीएस अफसर अजय पाल शर्मा का एक वीडियो सामने आया था, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में हंगामा मच गया। अब सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर यूपी कैडर के तेज तर्रार अधिकारी को पश्चिम बंगाल चुनाव में ऑब्जर्वर के पद से हटाने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में इसकी सुनवाई आज संऊव है।
नई दिल्ली। यूपी कैडर के तेज तर्रार आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को बंगाल चुनाव की ड्यूटी से हटाने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर तर्क दिया गया है कि आईपीएस अधिकारी का रवैया बेहद पक्षपाती है और वह राजनीतिक उम्मीदवारों को धमका रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई जनहित याचिका में चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत अजय पाल शर्मा को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पर्यवेक्षक बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम का हवाला देते हुए कहा है कि एक 'पर्यवेक्षक' का काम चुनावों के संचालन पर नजर रखना है। उसे तटस्थ संस्थागत सुरक्षा कवच के रूप में देखा जाता है। उसकी उपस्थिति का उद्देश्य चुनावों के संचालन के प्रति जनता के विश्वास को मजबूत करना होता है। लेकिन अजय पाल शर्मा का आचरण पर्यवेक्षक के दायित्वों का घोर उल्लंघन है।
याचिका में कोर्ट से उचित निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि इस नियुक्ति को रद्द किया जा सके और यह सुनिश्चित हो सके कि चुनाव पर्यवेक्षक अपने कर्तव्यों का पालन करते समय स्वतंत्र और निष्पक्ष रहें। याचिका आदित्य दास नाम के एक व्यक्ति ने दायर की है। दो दिन पहले, बीजेपी की पश्चिम बंगाल यूनिट ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था कि 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट और यूपी पुलिस के 'सिंघम' अजय पाल शर्मा को दक्षिण 24 परगना का पुलिस पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। उन्होंने टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर अली के परिवार वालों को 'कड़ी चेतावनी' दी थी। अधिकारी का चेतावनी देते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था।