कंक्रीट के जंगलों के बीच हरियाली का महाअभियान: 17 करोड़ से विकसित होने जा रहा ‘नगर वन’ बरेली को देगा नई सांस, पर्यावरण-पर्यटन और शोध का बनेगा शक्तिशाली केंद्र
-आरके सिंह-Bottom of Form
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बरेली। तेजी से फैलते शहरीकरण और सिकुड़ते हरित क्षेत्रों के बीच बरेली अब पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। शहर के सीबीगंज आरक्षित वन क्षेत्र में लगभग 30 एकड़ भूमि पर 17 करोड़ रुपये की लागत से ‘नगर वन’ विकसित किया जाएगा। यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल शहर की हरियाली बढ़ाएगी, बल्कि पर्यटन, शोध, शैक्षिक गतिविधियों, वनस्पति अध्ययन और कृषि विकास को भी नई दिशा देगी।
शहर विधायक एवं वन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार ने इस परियोजना को अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताते हुए कहा कि ‘नगर वन’ बरेली के लिए एक ऐतिहासिक पहल साबित होगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के क्रियान्वयन में वन विभाग, नगर निगम, बरेली विकास प्राधिकरण और पर्यटन विभाग की संयुक्त भागीदारी होगी। सभी विभागों की सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है और डबल इंजन सरकार में धन की कोई कमी नहीं है। भारत सरकार के सहयोग से दो किलोमीटर लंबी बाउंड्री वॉल का निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है।
डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि यह ‘नगर वन’ अपने आप में अद्वितीय होगा, जहां प्राकृतिक रूप से हवा, पानी और प्रकाश की पर्याप्त उपलब्धता रहेगी। यह परियोजना रोहिलखंड क्षेत्र की पहली ऐसी पहल है, जो शहरी आबादी को प्रकृति से जोड़ने के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरणीय शिक्षा का एक जीवंत केंद्र बनेगी।
उन्होंने बताया कि यह ‘नगर वन’ स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ बाहरी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। यहां आने वाले लोग विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधों, पक्षियों और वन्यजीवों को करीब से देख सकेंगे। इसे “वनस्पति ज्ञान और पर्यावरणीय जागरूकता का सशक्त माध्यम” बनाकर विकसित किया जाएगा।
प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) दीक्षा भंडारी ने बताया कि ‘नगर वन’ परियोजना को लेकर सभी संबंधित विभागों का सकारात्मक सहयोग मिल रहा है और बजट निर्गत होने में कोई बाधा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परियोजना कंक्रीट संरचनाओं पर नहीं, बल्कि प्राकृतिक पारिस्थितिकी के संरक्षण और संवर्धन पर आधारित होगी।
डीएफओ ने कहा कि ‘नगर वन’ की अवधारणा शहरी क्षेत्रों में छोटे-छोटे प्राकृतिक वन विकसित करने की है, जहां स्थानीय जैव विविधता को सुरक्षित रखते हुए लोगों को प्रकृति के करीब लाया जा सके। सीबीगंज क्षेत्र पहले से ही अपनी विशिष्ट जैव विविधता के लिए जाना जाता है, जहां कई दुर्लभ वनस्पतियां और जीव-जंतु पाए जाते हैं।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि विकास कार्यों के दौरान किसी भी मौजूदा वनस्पति को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। इस क्षेत्र में ‘ग्लाइकोमेट पेन्टा’ (जिनबेरी) नामक दुर्लभ वृक्ष भी पाया जाता है, जो औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है और मधुमेह जैसी बीमारियों में उपयोगी माना जाता है। यह परियोजना इस तरह की जैविक संपदा को संरक्षित करते हुए आगे बढ़ेगी।