'सांसद होना चाहिए तो राजकुमार चाहर जैसा'- शमसाबाद की सभा में राजनाथ सिंह ने बांधे तारीफों के पुल, भाषण खत्म होने के बाद दोबारा माइक संभालकर रक्षा मंत्री ने खास तौर पर की सांसद चाहर की सराहना
आगरा। शमसाबाद में महाराणा प्रताप की प्रतिमा अनावरण समारोह के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपना लगभग 50 मिनट का संबोधन समाप्त करने के बाद दोबारा माइक पर आकर फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने न केवल चाहर को जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील और सजग सांसद बताया, बल्कि यहां तक कहा कि सांसद होना चाहिए तो राजकुमार चाहर जैसा होना चाहिए। रक्षा मंत्री की इस अप्रत्याशित टिप्पणी को लेकर भाजपा के भीतर और राजनीतिक गलियारों में इसके निहितार्थ तलाशे जाने लगे हैं।
रविवार को शमसाबाद स्थित एपी इंटर कॉलेज में आयोजित जनसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे। इससे पहले उन्होंने महाराणा प्रताप की प्रतिमा का अनावरण किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने मंच पर मौजूद दोनों सांसदों का उल्लेख करते हुए कहा कि आगरा के सांसद प्रो. एसपी सिंह बघेल से सभी लोग भलीभांति परिचित हैं, जबकि दूसरे सांसद राजकुमार चाहर स्थानीय सांसद हैं और संसद में अत्यंत प्रभावी भूमिका निभाते हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि राजकुमार चाहर अपने संसदीय क्षेत्र की समस्याओं को लेकर हमेशा गंभीर और सजग रहते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सांसद का क्षेत्र बहुत बड़ा होता है, इसलिए यह संभव नहीं कि हर व्यक्ति की समस्या का व्यक्तिगत स्तर पर समाधान हो सके, लेकिन अपने क्षेत्र के लिए जैसी तड़पन मैंने राजकुमार चाहर के दिल में देखी है, उसे देखकर मैं कह सकता हूं कि सांसद होना चाहिए तो राजकुमार चाहर जैसा होना चाहिए। रक्षा मंत्री के इस बयान पर सभा स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि राजकुमार चाहर केवल सांसद ही नहीं हैं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पूरे देश की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। उन्हें लगातार देश के विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक कार्यक्रमों में भाग लेना पड़ता है, इसके बावजूद वे अपने संसदीय क्षेत्र की समस्याओं के प्रति पूरी गंभीरता और सक्रियता बनाए रखते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि रक्षा मंत्री ने यह टिप्पणी अपने निर्धारित भाषण के दौरान नहीं, बल्कि लगभग 50 मिनट का संबोधन समाप्त करने के बाद दोबारा माइक पर लौटकर की। यही कारण है कि भाजपा के राजनीतिक गलियारों में इस बयान के राजनीतिक संकेतों और संदेशों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
राजनाथ सिंह के इस सार्वजनिक प्रशंसापत्र को भाजपा संगठन और क्षेत्रीय राजनीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी के भीतर कई लोग इसे राजकुमार चाहर के कार्यों की खुली सराहना और उनके प्रति शीर्ष नेतृत्व के विश्वास के संकेत के रूप में देख रहे हैं।