मां दुर्गा विसर्जन बना मातम, चौथे दिन भी ऊटंगन नदी से नहीं मिले 7 युवकों के निशान, बांध पूरा करने को मेरठ से बुलाए विशेषज्ञ

खेरागढ़ क्षेत्र की ऊटंगन नदी में डूबे 13 युवकों में से 7 युवकों की तलाश चौथे दिन भी जारी है। रविवार को भी सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन दल (NDRF), राज्य आपदा राहत बल (SDRF) और स्थानीय लोग मिलकर सर्च ऑपरेशन में जुटे रहे। घटना को 72 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक सात लापता युवकों का कोई सुराग नहीं मिला है। जिलाधिकारी के निर्देश पर बांध को पूरा करने के लिए मेरठ से विशेषज्ञों और मजदूरों की एक टीम घटनास्थल पर पहुंच चुकी है।

Oct 5, 2025 - 14:12
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मां दुर्गा विसर्जन बना मातम, चौथे दिन भी ऊटंगन नदी से नहीं मिले 7 युवकों के निशान, बांध पूरा करने को मेरठ से बुलाए विशेषज्ञ
घटनास्थल पर चल रहे राहत कार्यों के दृश्य।

आगरा। खेरागढ़ क्षेत्र की ऊटंगन नदी में डूबे 13 युवकों में से 7 युवकों की तलाश चौथे दिन भी जारी है। रविवार को भी सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन दल (NDRF), राज्य आपदा राहत बल (SDRF) और स्थानीय लोग मिलकर सर्च ऑपरेशन में जुटे रहे। घटना को 72 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक सात लापता युवकों का कोई सुराग नहीं मिला है। जिलाधिकारी के निर्देश पर बांध को पूरा करने के लिए मेरठ से विशेषज्ञों और मजदूरों की एक टीम घटनास्थल पर पहुंच चुकी है।

गांववालों ने दिन-रात एक कर बनाया 40 मीटर का बांध

खोज अभियान में सहायता के लिए स्थानीय युवकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर 40 मीटर लंबा अस्थायी मिट्टी का बांध तैयार किया है। इससे नदी के लगभग 250 मीटर क्षेत्र में पानी का बहाव रोका गया है, ताकि डूबे युवकों की तलाश आसान हो सके। रात-दिन चल रहे इस अभियान में सैकड़ों ग्रामीण शामिल हैं। किसी ने मिट्टी भरी बोरियां उठाईं तो किसी ने पोकलेन मशीन से खुदाई में मदद की।

सेना और एनडीआरएफ की टीमें लगीं तलाश में

सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार नदी में गोता लगाकर तलाश अभियान चला रही हैं। जेसीबी और पोकलेन मशीनों की मदद से नदी की धारा को मोड़कर बीच में नाला बनाकर दूसरी ओर किया गया है ताकि जलस्तर घटाया जा सके। घटनास्थल पर हजारों की संख्या में लोग जमा हैं और परिजन नदी की ओर टकटकी लगाए अपने अपनों के लौटने की उम्मीद में डटे हुए हैं।

भरतपुर से लेकर आगरा तक रोका गया पानी

भरतपुर जिले में ऊटंगन नदी का बहाव रोकने के आदेश दिए गए हैं। आगरा जिले की सीमा में घुसियाना गांव पर जेसीबी मशीनों के जरिए मिट्टी से भरे कट्टों से पानी रोका जा रहा है। फजीहतपुर और निमैना चेकडेम के पट भी बंद कर दिए गए हैं ताकि सर्च ऑपरेशन के दौरान जलस्तर नियंत्रित रखा जा सके।

परिवारों की आंखें पथराईं, चौथे दिन भी इंतजार

लापता युवकों के परिजन नदी किनारे डेरा डाले बैठे हैं। तीन दिनों से किसी ने भी घर की चौखट नहीं देखी है। सभी की निगाहें नदी की ओर टिकी हैं। परिजन उम्मीद और निराशा के बीच दिन-रात वहीं मौजूद हैं। परिवारों के आंसू और स्थानीय लोगों की एकजुटता इस दर्दनाक हादसे की गंभीरता को बयां कर रहे हैं।

अब विशेषज्ञों की टीम पहुंची

जिलाधिकारी अरविन्द मलप्पा बंगारी के निर्देश पर मेरठ से विशेषज्ञों और मजदूरों की एक टीम घटनास्थल पर पहुंच चुकी है। इनकी मदद से नदी में बने अस्थायी बांध को मजबूत किया जा रहा है ताकि पानी को और नीचे कर सर्च ऑपरेशन तेज़ी से पूरा किया जा सके। प्रशासन ने कहा है कि जब तक सभी लापता युवकों का पता नहीं चलता, अभियान जारी रहेगा।

हादसे का पृष्ठभूमि

2 अक्टूबर को खेरागढ़ के गांव कुसियापुर के 13 युवक मां दुर्गा की मूर्ति विसर्जन के दौरान ऊटंगन नदी में डूब गए थे।
इनमें से एक युवक विष्णु को बचा लिया गया था, जबकि दो दिनों में पांच युवकों गगन, ओमपाल, मनोज, भगवती और अभिषेक के शव बरामद हुए थे। अब भी सात युवक सचिन, हरेश, वीनेश, गजेंद्र, दीपक और करन लापता हैं।