इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत, पर रिहाई नहीं

इमरान खान को कोर्ट से कुछ राहत मिली है लेकिन फिलहाल उनके जेल से बाहर आने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। इमरान की बीवी ने सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इमराम खान और बुशरा अडियाला जेल के भीतर से लगातार बयान जारी कर रहे हैं।

Aug 21, 2025 - 19:20
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इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत, पर रिहाई नहीं


इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। पाक के सर्वोच्च न्यायालय ने पीटीआई नेता खान को 2023 के 9 मई के दंगों से जुड़े आठ मामलों में जमानत दे दी है। चीफ जस्टिस याह्या अफरीदी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने गुरुवार को उनकी जमानत मंजूर की है। 9 मई के नौवें मामले में खान को जमानत नहीं मिली है। ऐसे में वह फिलहाल में जेल में रहेंगे। इमरान की पत्नी बुशरा बीबी भी जेल में बंद हैं, जिन्होंने कहा है कि उनके और उनके पति के साथ बेहद खराब बर्ताव हो रहा है। बुशरा ने कहा है कि उनको तन्हाई बैरक में रखा गया है, जहां मच्छर और कॉकरोच काटते हैं।

क्रिकेटर से राजनेता बने 72 वर्षीय इमरान खान पर 9 मई की हिंसा के सिलसिले में लाहौर में कई मामले दर्ज हैं। इनमें अपने समर्थकों को सरकारी और सेना की इमारतों पर हमला करने के लिए उकसाने का आरोप शामिल है। इसके अलावा भ्रष्टाचार के मामले भी इमरान खान पर चल रहे हैं। इमरान खान को अप्रैल 2022 में पीएम पद से हटाए जाने के बाद कई मामले में दर्ज किए गए थे। भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद अगस्त 2023 में खान की गिरफ्तारी हुई और तब से वह रावलपिंडी की अडियाला जेल में हैं।  
 
बुशरा बीबी ने कहा है कि अडियाला जेल में बंद उनके पति इमरान खान को अमानवीय परिस्थितियों में रहना पड़ रहा है। बुशरा ने इमरान के साथ दुर्व्यवहार, इलाज ना मिलने और उनको अलगाव में रखने की बात कही है। बुशरा ने कहा कि इमरान को तन्हाई में रखा गया है। इमरान को परिवार और वकीलों से भी नहीं मिलने दिया जा रहा है। बुशरा ने बयान जारी कर अपने साथ भी इसी तरह के बर्ताव का दावा किया है।

बुशरा बीबी को जेल की अपनी कोठरी के अंदर गंदगी का सामना करना पड़ा है। कीड़ों के काटने के बाद पड़े जख्मों के बावजूद जेल प्रशासन ने उन्हें प्राथमिक उपचार देने से इनकार कर दिया। बुशरा बीबी ने अधिकारियों पर उनके साथ अपमानजनक और अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगाया है। इमरान खान ने भी इन चिंताओं को दोहराया है।

इमरान खान के समर्थकों का तर्क है कि परिवार और वकील की मुलाकातों को स्थगित करना एक कैदी के रूप में उनके मूल अधिकारों का उल्लंघन है। पाकिस्तान के मानवाधिकार अधिवक्ता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, बंदियों को सुरक्षा, सम्मान और चिकित्सा देखभाल का अधिकार है।