बांग्लादेशी नागरिकों के त्रिपुरा में भीड़ के हाथों मारे जाने के ढाका के आरोपों को भारत ने नकारा

भारत ने बांग्लादेश के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है कि तीन तस्करों को भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, ये तस्कर मवेशी चुराने के इरादे से भारतीय सीमा में घुसे थे और झड़प में मारे गए।

Oct 17, 2025 - 20:54
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बांग्लादेशी नागरिकों के त्रिपुरा में भीड़ के हाथों मारे जाने के ढाका के आरोपों को भारत ने नकारा

 

नई दिल्ली। भारत ने बांग्लादेश के तीन तस्करों की मौत पर ढाका के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि उन्हें भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला था। भारत का कहना है कि ये तस्कर मवेशी चुराने के इरादे से भारतीय सीमा में घुस आए थे और इस दौरान हुई झड़प में मारे गए।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि यह घटना 15 अक्टूबर 2025 को त्रिपुरा में भारतीय सीमा से लगभग 3 किलोमीटर अंदर हुई थी। बांग्लादेश ने इन तीन नागरिकों की मौत पर भारत के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया था। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने दावा किया था कि ये तीन बांग्लादेशी नागरिक 15 अक्टूबर 2025 को त्रिपुरा के बिद्याबिल गांव में मवेशी चोर होने के शक में एक गुस्साई भीड़ का शिकार हुए थे।  
 
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा था, 'बांग्लादेश सरकार त्रिपुरा, भारत में 15 अक्टूबर 2025 को भीड़ की ओर से तीन बांग्लादेशी नागरिकों की क्रूर पिटाई और हत्या का कड़ा विरोध और निंदा करती है।' हालांकि, भारत ने बांग्लादेश के इस दावे को पूरी तरह से नकार दिया है। भारत का कहना है कि ये तीनों तस्कर भारतीय क्षेत्र के बिद्याबिल गांव से मवेशी चुराने की कोशिश कर रहे थे।

विदेश  मंत्रालय ने अपने बयान में विस्तार से बताया कि बांग्लादेश से आए तीन बदमाशों के एक गैंग ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पार की और भारतीय क्षेत्र के बिद्याबिल गांव से मवेशी चुराने का प्रयास किया। उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों पर लोहे के दरांती और चाकू से हमला किया, जिससे कुछ ग्रामीण घायल हो गए और एक ग्रामीण की मौत हो गई। जब अन्य ग्रामीण हमलावरों का विरोध करने पहुंचे, तब यह घटना हुई। MEA ने आगे बताया कि जब अधिकारी मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने दो तस्करों को मृत पाया। तीसरे तस्कर की अगले दिन अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। तीनों के शव बांग्लादेश को सौंप दिए गए हैं और पुलिस ने इस मामले में एफआईआर भी दर्ज कर ली है।

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच संबंध कुछ तनावपूर्ण चल रहे हैं, खासकर अगस्त 2024 में नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से। दोनों देश एक-दूसरे पर कई मुद्दों पर आरोप लगा रहे हैं, जिसमें बांग्लादेश द्वारा "सीमा पर होने वाली हत्याएं" एक प्रमुख मुद्दा रहा है।