युवा शक्ति से विश्व नेतृत्व की ओर बढ़ेगा भारत, संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर रामलाल का बड़ा संदेश

-आरके सिंह- बरेली। राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की भूमिका को निर्णायक बताते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सम्पर्क प्रमुख रामलाल ने कहा कि आने वाला समय भारत का है और देश का युवा ही इसे विश्व नेतृत्व तक पहुंचाएगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित युवा उद्यमी संगोष्ठी में उन्होंने साफ कहा कि संघ की यह यात्रा केवल संगठन नहीं, बल्कि समाज जागरण से राष्ट्र निर्माण तक का जीवंत अभियान है।

Apr 25, 2026 - 22:17
 0
युवा शक्ति से विश्व नेतृत्व की ओर बढ़ेगा भारत, संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर रामलाल का बड़ा संदेश
बरेली के अर्बन हाट सभागार में आयोजित युवा उद्यमी संगोष्ठी को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते रामलाल।

संघ के 100 वर्ष: सेवा, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की नींव

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बरेली महानगर द्वारा अर्बन हाट सभागार में आयोजित इस संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में रामलाल ने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने निस्वार्थ सेवा, व्यक्ति निरपेक्षता और आत्मनिर्भरता के सिद्धांतों पर संगठन की नींव रखी। यही कारण है कि संघ बिना किसी बाहरी सहयोग के केवल स्वयंसेवकों के समर्पण से निरंतर आगे बढ़ता रहा है।

युवा उद्यमियों को आत्मनिर्भरता और नवाचार का मंत्र

संघ के सम्पर्क प्रमुख ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे युवा देश है और यही ऊर्जा आने वाले वर्षों में देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। उन्होंने कहा कि नवाचार, शोध और तकनीकी दक्षता के जरिए युवा उद्यमी न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने स्वदेशी को बढ़ावा देने की अपील करते हुए कहा कि जो उत्पाद विदेशों में बन सकते हैं, वे भारत में भी बन सकते हैं—जरूरत है आत्मविश्वास और सही दिशा की।

उद्योग जगत का समर्थन, नवाचार पर जोर

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे दिनेश गोयल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय उद्योग संघ (आईआईए) ने कहा कि बरेली के उद्यमी शहर की आर्थिक प्रगति के मजबूत स्तंभ हैं। उन्होंने उद्योग जगत में नई तकनीक और शोध को अपनाने पर जोर दिया।

प्रश्नोत्तर में उठे अहम मुद्दे, दिए व्यावहारिक समाधान

संगोष्ठी के दौरान युवा उद्यमियों ने नौकरशाही, शिक्षा, पर्यावरण, स्वदेशी उद्योग, खेल और मातृभाषा जैसे विषयों पर सवाल पूछे। रामलाल ने लालफीताशाही से निपटने के लिए धैर्य, सामूहिक प्रयास और सकारात्मक सोच को जरूरी बताया।

नई पीढ़ी में बढ़ते तनाव और अवसाद पर उन्होंने कुटुंब प्रबोधन का सुझाव देते हुए कहा कि परिवार में सप्ताह में एक दिन बिना मोबाइल और टीवी के संवाद होना चाहिए, जिससे बच्चों में संस्कार और आत्मविश्वास विकसित होता है।

महिला गोष्ठी में मातृशक्ति की भूमिका पर जोर

इससे पूर्व आयोजित महिला गोष्ठी में रामलाल ने कहा कि आज मातृशक्ति ने हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित की है, चाहे वह अंतरिक्ष हो या सैन्य सेवा। उन्होंने कहा कि परिवार में संस्कारों का संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखना महिलाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

Bottom of Form

Top of Form

Bottom of Form

Top of Form

SP_Singh AURGURU Editor