जेडी वेंस को भारत का सख्त जवाब,  विदेश मंत्रालय ने कहा- वेंस का बयान बेहद आपत्तिजनक

अमेरिका में आईटी कंपनियों को लेकर उप राष्ट्रपति जेडी वेंस के बयान के बाद भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

Oct 9, 2026 - 16:35
 0
जेडी वेंस को भारत का सख्त जवाब,  विदेश मंत्रालय ने कहा- वेंस का बयान बेहद आपत्तिजनक

नई दिल्ली। भारत ने अमेरिका में भारतीय आईटी कंपनियों के लिए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन ( पीईआरएम ) प्रोग्राम से सस्पेंड किए जाने के फैसले पर करारा जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने साथ ही अमेरिकी उप विदेश मंत्री जेडी वैंस की बातों पर भी सख्त ऐतराज जताया है। यह भी कहा है कि हमें कुछ कंपनियों के लिए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम के बारे में अमेरिकी श्रम विभाग के फैसले की जानकारी है। भारत ने कहा है कि हम इस मुद्दे से जुड़ी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सरकार कई बड़ी भारतीय आईटी कंपनियों को एक अहम प्रोग्राम से सस्पेंड कर रही है, जिसके तहत कुशल विदेशी कर्मचारियों को स्थायी रूप से रहने की इजाजत (परमानेंट रेजिडेंसी) मिलती है। प्रशासन ने धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कहा है कि विदेशी कर्मचारियों को अमेरिकी कर्मचारियों की जगह पर अमेरिका में नौकरियां मिलीं।

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है-'यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि पीईआरएम, एच-1बी वीजा प्रोग्राम से अलग है। पीईआरएम आवेदनों को रोकने से मौजूदा एच-1बी वीजा की वैधता या एच-1बी वीजा धारकों और उनके आश्रितों की स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ता है। हालांकि प्रभावित कंपनियों के योग्य कर्मचारियों की परमानेंट-रेसिडेंसी/ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर कुछ असर पड़ सकता है।'

भारत के विदेश मंत्रालय ने आगे कहा-'हमने इस संदर्भ में अमेरिकी उपराष्ट्रपति की कुछ टिप्पणियां भी देखी हैं। हमारा मानना ​​है कि ऐसी बातें अनुचित हैं और इस तथ्य को नजरअंदाज करती हैं कि अमेरिका में भारतीय पेशेवर वहां की अर्थव्यवस्था और इनोवेशन इकोसिस्टम में उच्च शिक्षित और कुशल योगदानकर्ता हैं। असल में, अमेरिका का इतिहास खुद प्रवासियों की पीढ़ियों द्वारा आकार लिया गया है, जिनकी मेहनत, उद्यम और इनोवेशन ने इसके विकास और समृद्धि में योगदान दिया है। ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल करना, जिसमें दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत की झलक मिलती हो, बेहद आपत्तिजनक है।'

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट करते हुए कहा-'यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि टैलेंट मोबिलिटी (प्रतिभाओं की आवाजाही) दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद है। जहां यह भारतीयों के लिए अवसर पैदा करती है। वहीं यह अमेरिकी कंपनियों को बेहतरीन प्रतिभा, इनोवेशन, रिसर्च, प्रोडक्टिविटी, प्रतिस्पर्धा और नौकरी के अवसर पैदा करने में भी मदद करती है, साथ ही अमेरिका में शेयरधारकों की संपत्ति भी बढ़ाती है। इसलिए, यह दोनों देशों के लिए बहुत ज्यादा आपसी फायदे का क्षेत्र है और हमें उम्मीद है कि इस प्रक्रिया से जुड़े सभी लोग इस बात को समझेंगे। अमेरिका द्वारा घोषित कदम दोनों देशों के साझा लक्ष्यों को आगे नहीं बढ़ाते हैं।'

अमेरिका में 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम', जिसे प्रोग्राम इलेक्ट्रॉनिक रिव्यू मैनेजमेंट भी कहा जाता है, एक अहम प्रावधान है जिसका इस्तेमाल अमेरिकी नियोक्ता विदेशी कर्मचारियों को स्थायी रूप से रहने के लिए स्पॉन्सर करने के लिए करते हैं। कई भारतीय आईटी कंपनियां भी इस सिस्टम पर निर्भर हैं। हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एच-1बी वीजा प्रोग्राम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'पूरी तरह से टूटा हुआ और धोखाधड़ी से भरा' करार दिया था। उन्होंने कहा कि यदि उनके पास विकल्प हो, तो वे इस पूरे कार्यक्रम को समाप्त करने का समर्थन करेंगे।