आयकर कानून की बारीकियों से रूबरू हुए उद्योगपति, चैम्बर के मेगा सेमिनार में विशेषज्ञों ने बताए करदाताओं के अधिकार और जिम्मेदारियां, सर्च, नोटिस, करदाता अधिकार, नए आयकर अधिनियम और डिजिटल कर प्रणाली पर हुआ विस्तृत मंथन, पूर्व सांसद राजबब्बर बोले- चैम्बर हमेशा ज्ञानवर्धन की दिशा में निभाता रहा है अहम भूमिका
आगरा। उद्योगपतियों, व्यापारियों और करदाताओं को आयकर कानूनों की नवीनतम जानकारियों से अवगत कराने के उद्देश्य से शनिवार को होटल क्लार्क्स शिराज में चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा वृहद आयकर सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमीनार में आयकर अधिनियम-2025, करदाताओं के अधिकार एवं कर्तव्य, विभागीय नोटिसों का उत्तर देने की प्रक्रिया, सर्च एवं सर्वे की कार्रवाई, कानून के दुरुपयोग से संरक्षण तथा डिजिटल कर प्रणाली जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व सांसद राजबब्बर, मुख्य वक्ता डॊ.. कपिल गोयल एवं श्रीमती रानो जैन ने करदाताओं को कानून की बारीकियों से अवगत कराया।
अध्यक्ष मनोज बंसल ने बताया सेमिनार का उद्देश्य
कार्यक्रम की अध्यक्षता चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल ने की, जबकि संचालन पूर्व अध्यक्ष शलभ शर्मा ने किया। चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल ने कहा कि सेमीनार का उद्देश्य उद्योगपतियों एवं व्यापारियों को आयकर अधिनियम-2025 तथा कर संबंधी नई व्यवस्थाओं की सरल और व्यवहारिक जानकारी उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों द्वारा सरल भाषा में कानून की जानकारी दी जाएगी तथा प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया जाएगा।
अनिल वर्मा ने विषयों की दी विस्तृत जानकारी
पूर्व अध्यक्ष एवं आयकर प्रकोष्ठ के चेयरमैन अनिल वर्मा ने मुख्य अतिथि एवं वक्ताओं का परिचय कराया। उन्होंने बताया कि सेमीनार में वर्तमान परिप्रेक्ष्य में करदाताओं के अधिकार एवं कर्तव्य, आयकर विभाग के विभिन्न नोटिसों का उत्तर देने की विधि, नए कर कानूनों की मूलभूत अवधारणाएं, कानून के दुरुपयोग से करदाताओं का संरक्षण तथा आयकर अधिनियम-2025 के अंतर्गत सर्वे, सर्च एवं जब्ती की कार्रवाई जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
राजबब्बर बोले- चैम्बर हमेशा देता रहा है सही मार्गदर्शन
मुख्य अतिथि एवं पूर्व सांसद राजबब्बर ने कहा कि चैम्बर समय-समय पर ऐसे ज्ञानवर्धक सेमीनार आयोजित करता रहा है, जिससे उद्योगपतियों और व्यापारियों को कर संबंधी सही जानकारी मिलती है और भ्रम की स्थिति समाप्त होती है। उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा चैम्बर का सहयोग मिला है और भविष्य में भी उनका सहयोग चैम्बर के साथ बना रहेगा।
करदाता के अधिकार और कर्तव्य जानना भी उतना ही जरूरी
मुख्य वक्ता डॊ. कपिल गोयल ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में करदाताओं के अधिकार एवं कर्तव्य विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि करदाता देश की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण भागीदार हैं और उन्हें आयकर कानून के अंतर्गत अनेक अधिकार प्राप्त हैं। साथ ही समय पर आयकर रिटर्न दाखिल करना, सही आय का विवरण देना तथा कर कानूनों का पालन करना प्रत्येक करदाता का दायित्व है।
उन्होंने आयकर विभाग द्वारा जारी विभिन्न नोटिसों के प्रकार, उनके कारण तथा समयबद्ध एवं तथ्यात्मक उत्तर देने की प्रक्रिया को भी सरल भाषा में समझाया। डॉ. गोयल ने कहा कि टेक्नोलॉजी करदाताओं के लिए वरदान होनी चाहिए, अभिशाप नहीं। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद-265 का उल्लेख करते हुए कहा कि कराधान पूरी तरह कानून के अनुरूप होना चाहिए और सभी संबंधित पक्षों को इसका पालन करना चाहिए।
कानून के दुरुपयोग से संरक्षण की भी दी जानकारी
सेमीनार में करदाताओं को कानून के दुरुपयोग से मिलने वाले संरक्षण पर भी विस्तार से चर्चा हुई। डॉ. कपिल गोयल ने बताया कि यदि किसी करदाता को विभागीय कार्रवाई में त्रुटि, अन्याय अथवा अधिकारों के उल्लंघन की आशंका हो तो वह अपील, पुनर्विचार और शिकायत निवारण की वैधानिक प्रक्रिया का उपयोग कर सकता है।
सर्च के दौरान घबराएं नहीं, अधिकारियों से रखें समन्वय : रानो जैन
मुख्य वक्ता श्रीमती रानो जैन ने आयकर विभाग की सर्च कार्रवाई के दौरान करदाताओं के अधिकारों और कर्तव्यों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सर्च के समय अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग और समन्वय बनाए रखना चाहिए। अधिकारियों को घर, कार्यालय, लॉकर, अलमारी एवं अन्य स्थानों की जांच करने का वैधानिक अधिकार प्राप्त होता है तथा आवश्यकता पड़ने पर वे अन्य प्रशासनिक एजेंसियों की सहायता भी ले सकते हैं।
उन्होंने बताया कि सर्च के दौरान अधिकारियों द्वारा बयान दर्ज किए जा सकते हैं तथा नकदी, आभूषण, दस्तावेज और खातों की जांच कर उन्हें जब्त भी किया जा सकता है। यदि किसी दस्तावेज का वैधानिक साक्ष्य करदाता के पास उपलब्ध है तो उसे प्रस्तुत कर राहत प्राप्त की जा सकती है।
पंचनामा की प्रति लेना करदाता का अधिकार
रानो जैन ने कहा कि सर्च के दौरान तैयार किए जाने वाले पंचनामा में जब्त दस्तावेजों एवं वस्तुओं की पूरी सूची होती है, जिस पर दो स्वतंत्र गवाहों, सर्च अधिकारी तथा संबंधित करदाता के हस्ताक्षर होते हैं। पंचनामा की एक प्रति करदाता को अपने पास रखना उसका वैधानिक अधिकार है।
उन्होंने यह भी बताया कि सामान्य परिस्थितियों में सर्च के दौरान महिला के पास 500 ग्राम तक, अविवाहित युवती के पास 250 ग्राम तक तथा पुरुष के पास 100 ग्राम तक स्वर्ण आभूषण होने पर विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रचलित दिशा-निर्देश लागू होते हैं।
प्रश्नोत्तर सत्र में मिला विशेषज्ञों का मार्गदर्शन
सेमीनार के दौरान उद्योगपतियों और व्यापारियों ने आयकर संबंधी अनेक जिज्ञासाएं विशेषज्ञों के समक्ष रखीं, जिनका विस्तार से समाधान किया गया। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी और समयानुकूल बताते हुए इसकी सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में टैक्सेशन बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकिशोर खंडेलवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल, पूर्व अध्यक्ष एवं आयकर प्रकोष्ठ के चेयरमैन अनिल वर्मा, उपाध्यक्ष अंबा प्रसाद गर्ग, कोषाध्यक्ष विनय मित्तल, पूर्व अध्यक्ष के.के. पालीवाल, राजकुमार अग्रवाल, सीताराम अग्रवाल, अमरनाथ कौशल, प्रदीप वार्ष्णेय, शिव कुमार अग्रवाल, अतुल कुमार गुप्ता, शलभ शर्मा, प्रार्थना जालान, शैलेश अग्रवाल, मनोज कुमार गुप्ता, विवेक जैन, देवेन्द्र कुमार गोयल, राजेन्द्र अग्रवाल, राकेश कुमार चौहान, रोहित नैयर, नरेन्द्र तनेजा, रूपकिशोर अग्रवाल, सुनील गोयल, अनिल अग्रवाल, दिनेश कुमार जैन, सौरभ जैन, सुरेश चंद बंसल, राहुल राना, अनूप गोयल, गिरीश चंद गोयल, सीए एम.एम. भसीन सहित बड़ी संख्या में उद्योगपति, व्यापारी एवं करदाता उपस्थित रहे।