आगरा के दयालबाग में भारत-नॉर्थ अमेरिका के विद्यार्थियों का अंतरमहाद्वीपीय संवाद, ऑर्गेनिक धान के खेतों से दुनिया को स्वास्थ्य का संदेश
आगरा के दयालबाग में गुरुवार को ऑर्गेनिक धान की रोपाई के बीच शिक्षा, सेवा, आध्यात्मिकता और स्वास्थ्य का अनूठा संगम देखने को मिला। लगभग 75 एकड़ में चल रही ऑर्गेनिक धान रोपाई के दौरान भारत और नॉर्थ अमेरिका के विद्यार्थियों ने आधुनिक चिकित्सा, पारंपरिक उपचार पद्धतियों और दयालबाग हेल्थ केयर सिस्टम पर अंतरमहाद्वीपीय संवाद प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में समग्र स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, आध्यात्मिक उपचार और मानवीय मूल्यों को जोड़ते हुए यह संदेश दिया गया कि आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान मिलकर मानवता के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।

दयालबाग के खेतों में धान की रोपाई करते सत्संगी।
दयालबाग (आगरा)। न्यू डे बोर्डिंग स्कूल, दयालबाग के कक्षा छह से 12 तक के विद्यार्थियों ने नॉर्थ अमेरिका के दयालबाग राधास्वामी सत्संग एसोसिएशन से जुड़े विद्यार्थियों के साथ गुरुवार को सुबह के फील्ड वर्क के दौरान "मॉडर्न, ट्रेडिशनल एंड दयालबाग हेल्थ केयर सिस्टम्स" विषय पर संवादात्मक प्रस्तुति दी। यह कार्यक्रम दयालबाग के एग्रोइकोलॉजी-कम-प्रिसीजन फार्मिंग क्षेत्र में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम के दौरान खेतों में ऑर्गेनिक धान की रोपाई का कार्य भी चल रहा था। दयालबाग में लगभग 75 एकड़ क्षेत्र में ऑर्गेनिक धान की रोपाई सेवा-भावना के साथ की जा रही है, जिसमें देश-विदेश से आए सत्संगी भाई-बहन, बच्चे और विद्यार्थी उत्साहपूर्वक श्रमदान कर रहे हैं। खेतों में सेवा, अनुशासन और आध्यात्मिक वातावरण के बीच आयोजित यह संवाद दयालबाग की जीवनशैली का प्रेरणादायी उदाहरण बना।
कार्यक्रम गुरु महाराज एवं रानी साहिबा की उपस्थिति में आयोजित किया गया। न्यू डे बोर्डिंग स्कूल, दयालबाग की प्रिंसिपल प्रोफेसर विभा रानी सत्संगी ने सुश्री दीपा प्रसाद, समन्वयक, इंटरेक्शन, नॉर्थ अमेरिका तथा प्रोफेसर स्वरूप रानी माथुर, अध्यक्ष, नॉर्थ अमेरिका सत्संग संस्कृति विकास समिति, डीआरएसएएनए के सहयोग से इस सत्र का आयोजन कराया।
वर्ष 2011 से लगातार आयोजित हो रहा यह वार्षिक कार्यक्रम दोनों महाद्वीपों के विद्यार्थियों को एक-दूसरे की संस्कृति, जीवनशैली और विचारों को समझने का साझा मंच उपलब्ध कराता है। विद्यार्थी पूरे वर्ष मेडिकल विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में ऑनलाइन सत्रों के माध्यम से तैयारी करते हैं और बाद में दयालबाग की शिक्षा, सेवा, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़े विषयों पर प्रस्तुति देते हैं।
संवाद आधारित प्रस्तुति में विद्यार्थियों ने आयुर्वेद, होम्योपैथी तथा आधुनिक एलोपैथिक चिकित्सा प्रणालियों के सिद्धांतों, विशेषताओं और सीमाओं पर विस्तार से चर्चा की। भारत के आयुष ढांचे का उल्लेख करते हुए उन्होंने वैक्सीन, इमेजिंग तकनीक, हर्बल उपचार और भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण दयालबाग हेल्थ केयर सिस्टम की विस्तृत प्रस्तुति रही। विद्यार्थियों ने बताया कि यह एक समग्र स्वास्थ्य मॉडल है, जिसमें आधुनिक चिकित्सा, पारंपरिक उपचार और आध्यात्मिक हीलिंग को एक साथ जोड़ा गया है। उन्होंने सरन आश्रम अस्पताल, दयालबाग की 24 घंटे उपलब्ध मल्टी-डिसिप्लिनरी स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी दी, जिसमें एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेद तीनों चिकित्सा पद्धतियां संचालित होती हैं।
प्रस्तुति में वर्ष 2021 से संचालित टेलीमेडिसिन सेवाओं, दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (डीईआई) के सहयोग से चल रहे बीएचएमएस कार्यक्रम, आसपास के गांवों में लगाए जाने वाले सामुदायिक चिकित्सा शिविरों तथा लगभग 100 वर्ष पुरानी दयालबाग आयुर्वेदिक फार्मेसी का भी उल्लेख किया गया।
विद्यार्थियों ने उपचार प्रक्रिया में आध्यात्मिक मार्गदर्शन और गुरु कृपा की भूमिका पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि दयालबाग मॉडल में आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान को विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे का पूरक माना जाता है। सेवा, अनुशासन, पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक दृष्टिकोण के साथ यह मॉडल मानवता के लिए समग्र स्वास्थ्य का मार्ग प्रस्तुत करता है।
संवाद के दौरान स्वास्थ्य और पर्यावरण के गहरे संबंध पर भी विशेष जोर दिया गया। विद्यार्थियों ने बताया कि स्वस्थ जीवन केवल दवाओं या अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ हवा, शुद्ध जल, ऑर्गेनिक खेती, संतुलित आहार, अनुशासित जीवनचर्या, श्रम संस्कृति, सेवा-भाव और आध्यात्मिक मार्गदर्शन से मिलकर संपूर्ण स्वास्थ्य का निर्माण होता है।
उन्होंने बताया कि दयालबाग मॉडल में खेती, डेयरी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, जल एवं वायु गुणवत्ता, नवाचार और मानवीय मूल्यों को सामाजिक, आर्थिक, तकनीकी, आध्यात्मिक और जलवायु संबंधी दृष्टिकोण के साथ जोड़कर एक संतुलित जीवनशैली विकसित की गई है।
इस अवसर पर प्रोफेसर विभा रानी सत्संगी ने कहा कि यह वार्षिक संवाद बच्चों में आत्मविश्वास विकसित करता है तथा उन्हें विभिन्न सांस्कृतिक दृष्टिकोणों को समझने और उनका सम्मान करने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि दयालबाग हेल्थ केयर सिस्टम में आध्यात्मिक उपचार का विशेष महत्व है। यहां बीमारी को व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास, कर्मों के बोझ से मुक्ति और परम पिता की दया-मेहर के रूप में भी देखा जाता है।
प्रोफेसर स्वरूप रानी माथुर ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से नॉर्थ अमेरिका के विद्यार्थियों को दयालबाग की जीवनशैली को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने बताया कि दयालबाग की जीवनशैली सिग्मा सिक्स क्यू-वी-ए मॉडल पर आधारित है, जो खेती, डेयरी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, जल, वायु गुणवत्ता, नवाचार और मानवीय मूल्यों को एकीकृत कर जीवन के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रस्तुत करता है।
सुश्री दीपा प्रसाद ने कहा कि इस प्रस्तुति का निष्कर्ष यही रहा कि प्रत्येक चिकित्सा प्रणाली की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं और दयालबाग मॉडल की तरह इन सभी प्रणालियों का समन्वय ही सर्वांगीण कल्याण का सबसे प्रभावी मार्ग बन सकता है।
यह कार्यक्रम राधास्वामी सत्संग सभा की इकाई एमसीआरईआई के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का सजीव प्रसारण ई-सत्संग कैस्केड व्यवस्था के माध्यम से देश-विदेश की लगभग 580 शाखाओं में किया गया।