जंतर मंतर प्रोटेस्ट, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की सभी एफआईआर, अनुच्छेद 142 का किया इस्तेमाल, 5 सितंबर का मार्च वापस लिया
सुप्रीम कोर्ट ने सीजेपी आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज हुईं एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है। दिल्ली में 20 से 25 जुलाई के बीच पुलिस ने 13 एफआईआर दर्ज की थीं।
नई दिल्ली। जुलाई में हुए छात्र आंदोलन के लिए दिल्ली समेत देश भर में दर्ज एफआईआर में आगे कोई कार्रवाई नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत हासिल विशेष शक्ति का इस्तेमाल करते हुए इन एफआईआर को निरस्त कर दिया है।
दिल्ली पुलिस के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और महाराष्ट्र पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से अपने यहां दर्ज एफआईआर रद्द करने का अनुरोध किया था। कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया। केंद्र सरकार के लिए पेश सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से अनुरोध किया कि बाकी राज्यों के लिए भी ऐसा ही आदेश पारित किया जाए। इस पर कोर्ट ने कहा कि बाकी एफआईआर में भी आगे कोई कार्रवाई न की जाए।
दिल्ली में 20 से 25 जुलाई के बीच पुलिस ने 13 एफआईआर दर्ज की थीं। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से आग्रह किया था कि इन सभी एफआईआर को निरस्त कर दिया जाए। एक नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी जाए जो भीड़ में शामिल उन 2,873 लोगों पर होगी, जिनका गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। कोर्ट ने इसकी भी इजाज़त दे दी।
सॉलिसिटर जनरल मेहता ने जजों से कहा, 'केंद्र सरकार ने छात्रों से कुछ वादे किए थे। इनमें मुकदमे वापस लेने, भविष्य में इन मामलों के लिए एफआईआर न करने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के लिए मुआवजा देने जैसी बातें शामिल थीं। सरकार इन सब वादों को पूरा करना चाहती है।'
मेहता ने यह भी कहा कि मुआवजे पर कोर्ट अभी कोई आदेश न दे। कोर्ट का कोई भी आदेश भविष्य की हर तरह की परीक्षाओं के लिए उदाहरण माना जाएगा। कोर्ट छात्रों को दिए सरकार के वचन को रिकॉर्ड पर ले और 3 महीने का समय दे। इसके बारे में फॉर्मूला तैयार किया जा रहा है। जल्द ही नीट परीक्षा के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा। जजों ने इस अनुरोध को भी स्वीकार कर लिया।
कोर्ट में मौजूद कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरभ दास ने हाथ जोड़ कर जजों को धन्यवाद कहा। चीफ जस्टिस ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कोर्ट के आदेश को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने यह भी कहा कि 5 सितंबर के लिए प्रस्तावित मार्च को वापस लिया जा रहा। कोर्ट ने उनके इस बयान को रिकॉर्ड पर लेने का आदेश दिया।