जर्सी सिटी से कैट्सकिल पहाड़ियों तक का सफर यानी रंग बदलती पहाड़ियों के बीच कुदरत का निमंत्रण: लाल-पीले पत्तों से सजी वादियां, सुनसान रास्ते और शांत जलाशय…जहां खामोशी भी बोलती है और प्रकृति से प्यार करना सीखता है इंसान!
न्यूयॊर्क स्टेट में लाल-पीले पत्तों से सजी कैट्सकिल पहाड़ियों, शांत जलाशय और सुनसान रास्तों की यादें लंबे समय तक मन में बनी रहेंगी। लेकिन इस यात्रा का सबसे बड़ा हासिल शायद यही है कि प्रकृति से प्यार करने का अर्थ केवल उसकी खूबसूरती पर मुग्ध होना नहीं, बल्कि उसकी रक्षा के लिए अपने व्यवहार को भी बदलना है।
-एसपी सिंह-
अमेरिका के न्यूयॉर्क स्टेट में कैट्सकिल की पहाड़ियों के बीच पहुंचकर ऐसा लगा, जैसे प्रकृति ने अपनी सबसे खूबसूरत पेंटिंग हमारे सामने खोल दी हो। दूर तक फैली पहाड़ियों पर कहीं हरियाली की चादर बिछी थी तो कहीं पेड़ों की पत्तियां पीले और लाल रंग में ढलकर अलग ही छटा बिखेर रही थीं। पहाड़ियों के बीच से गुजरती सड़कें, दूर-दूर तक पसरा सन्नाटा और शांत जलाशयों में उतरती सूरज की रोशनी मन को ऐसी शांति दे रही थी, जिसे शब्दों में समेटना आसान नहीं है। इस सफर की खूबसूरती ने जितना आकर्षित किया, उससे कहीं ज्यादा प्रभावित किया यहां प्रकृति को सहेजकर रखने का सलीका।

जर्सी सिटी के डाउनटाउन से शुरू हुआ यह सफर हमें शहर की व्यस्त जिंदगी से निकालकर प्रकृति की एक अलग ही दुनिया में ले गया। हाईवे पर आगे बढ़ते हुए जैसे ही न्यूयॉर्क स्टेट में प्रवेश किया, दोनों ओर पहाड़ी इलाकों का सिलसिला दिखाई देने लगा। सड़क के दोनों तरफ फैले पेड़-पौधे और उनके बदलते रंग यात्रा को लगातार खूबसूरत बनाते जा रहे थे।
शुरुआत में हरे पत्तों के बीच कहीं-कहीं पीले रंग की झलक दिखाई देती थी। फिर धीरे-धीरे पीले और लाल रंग के पेड़ों की संख्या बढ़ने लगी। कहीं एक पेड़ सुनहरे रंग में नहाया हुआ था तो कहीं लाल पत्तियों से लदी डालियां हरी पृष्ठभूमि पर अलग ही आभा बिखेर रही थीं। पहाड़ियों पर रंगों का यह मेल ऐसा लग रहा था, मानो किसी चित्रकार ने बड़े धैर्य और कल्पनाशीलता के साथ प्रकृति के कैनवास पर रंग भरे हों।
पतझड़ के रंगों से सजी कैट्सकिल की पहाड़ियां
अमेरिका में पतझड़ यानी फॉल का मौसम अपने आप में एक आकर्षण है। इस दौरान अनेक पेड़ों की पत्तियां हरे रंग से पीली, नारंगी, लाल और गहरे लाल रंग में बदलने लगती हैं। इसे फॉल फॉलीएज कहा जाता है। तापमान, दिन की अवधि और मौसम की परिस्थितियों के अनुसार पत्तियों के रंग बदलने का समय और उनकी चमक अलग-अलग हो सकती है।
कैट्सकिल का पहाड़ी क्षेत्र इस प्राकृतिक बदलाव को देखने के लिए खास माना जाता है। यहां घने जंगलों के साथ खुले मैदान, ऊंची-नीची पहाड़ियां, घाटियां और जलाशय हैं। पतझड़ के दिनों में यही विविधता दृश्य को और मनमोहक बना देती है। हरी पहाड़ियों के बीच लाल-पीले पेड़ ऐसे दिखाई देते हैं, जैसे किसी ने हरे कैनवास पर रंगों की अनगिनत आकृतियां उकेर दी हों।
सड़क पर चलते हुए बार-बार नजरें गाड़ी की खिड़की से बाहर चली जाती थीं। हर मोड़ पर दृश्य बदलता था और हर नया दृश्य पहले से ज्यादा आकर्षक लगता था। कहीं पहाड़ियों की ढलान पर पेड़ों की कतारें थीं, कहीं दूर तक फैली घाटी दिखाई देती थी। प्रकृति की इस रंगीन दुनिया में समय का अहसास भी जैसे कम होने लगता है।
कैट्सकिल हाई पीक्स के बीच अचानक मिला एकांत

आगे बढ़ते हुए हम कैट्सकिल हाई पीक्स क्षेत्र में पहुंचे। यहां अचानक एक रास्ते पर मुड़ने का निर्णय लिया। इसके बाद जो दृश्य सामने आया, वह इस यात्रा की सबसे यादगार अनुभूतियों में शामिल हो गया।
रास्ते पर न गाड़ियों का शोर था, न लोगों की आवाजाही। दूर-दूर तक फैली पहाड़ियों के बीच ऐसा सन्नाटा था कि कुछ देर के लिए लगा, मानो हम किसी आबाद दुनिया से बहुत दूर आ गए हों। शहरों में रहने वाला इंसान अक्सर शांति की तलाश करता है, लेकिन यहां शांति को महसूस करने के लिए किसी विशेष प्रयास की जरूरत नहीं थी। वह आसपास के वातावरण में सहज रूप से मौजूद थी।
इसी रास्ते पर अचानक एक तालाब दिखाई दिया। उसके आसपास का प्राकृतिक दृश्य इतना सुंदर था कि आगे बढ़ने का मन ही नहीं हुआ। हमने वहीं रुककर पिकनिक मनाने का फैसला किया। शांत वातावरण, चारों ओर प्रकृति की मौजूदगी और बिना किसी व्यवधान के बिताए गए वे पल इस यात्रा का सुखद हिस्सा बन गए।
ऐसी जगहों पर बैठकर महसूस होता है कि घूमने का अर्थ केवल किसी प्रसिद्ध पर्यटन स्थल तक पहुंचना या तस्वीरें खींचना नहीं है। कभी-कभी किसी अनजान रास्ते पर मिला एक शांत कोना ही पूरी यात्रा की सबसे खूबसूरत स्मृति बन जाता है।
घाटी का नजारा, जिसे देखते रहने का मन करे
वापसी के दौरान कैट्सकिल हाई पीक्स से घाटी का दृश्य सामने आया तो नजरें ठहर गईं। दूर तक फैली पहाड़ियों पर लाल, पीले और हरे रंगों की परतें दिखाई दे रही थीं। कहीं रंगों का गहरा विस्तार था तो कहीं उनके बीच हरियाली की पतली-पतली धारियां नजर आ रही थीं।
पहाड़ियों की बनावट और बदलते रंगों ने मिलकर ऐसा दृश्य रचा था, जिसे किसी चित्रकार की कल्पना कहा जा सकता है। फर्क सिर्फ इतना था कि इस पेंटिंग में कोई रंग स्थिर नहीं था। रोशनी बदलती तो पहाड़ियों की रंगत भी बदल जाती। हवा के साथ पत्तियां हिलतीं तो लगता, मानो पूरी तस्वीर में हलचल हो रही हो।
इस दृश्य को देखते हुए मन में यही विचार आया कि प्रकृति की खूबसूरती का कोई विकल्प नहीं है। इसे किसी इमारत, कृत्रिम सजावट या आधुनिक तकनीक से पूरी तरह दोहराया नहीं जा सकता। इसकी असली सुंदरता इसकी सहजता और स्वाभाविकता में ही है।
शैवर्टाउन ब्रिज और पेपैक्टन जलाशय की शांत दुनिया
वापसी के रास्ते में हम दाईं ओर एक दूसरे मार्ग पर मुड़े। सड़क के किनारे बहती नदी के साथ आगे बढ़ते हुए शैवर्टाउन ब्रिज पहुंचे। यहां आकर प्रकृति का एक अलग ही रूप देखने को मिला।
ब्रिज के आसपास फैला शांत जल, दूर तक उठती पहाड़ियां और उन पर पड़ती सूरज की रोशनी से बदलते पेड़ों के रंग मन को मोह रहे थे। पानी की विशाल सतह के पार पहाड़ियों की परछाइयां और उनके बीच उभरते लाल-पीले रंग ऐसा दृश्य बना रहे थे, जिसे देर तक देखते रहने का मन करता था।
यह पुल न्यूयॉर्क स्टेट के डेलावेयर काउंटी में स्थित पेपैक्टन रिजर्वायर यानी पेपैक्टन जलाशय पर बना है। यह जलाशय न्यूयॉर्क सिटी की जलापूर्ति व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ईस्ट ब्रांच डेलावेयर नदी पर बने इस जलाशय का निर्माण 1950 के दशक में पूरा हुआ था। इसे बनाने के लिए इस क्षेत्र की पुरानी बस्तियों को हटाना पड़ा था।
आज यहां दिखाई देने वाला विशाल जल विस्तार केवल एक खूबसूरत पर्यटन दृश्य नहीं है। इसके पीछे जल संरक्षण, शहरों की पेयजल जरूरतों और स्थानीय इतिहास की कहानी भी छिपी है। आसपास के क्षेत्र में प्रकृति और जलस्रोतों को सुरक्षित रखने की जरूरत इसी कारण और महत्वपूर्ण हो जाती है।
प्रकृति की सुरक्षा में स्थानीय लोगों और संस्थाओं की भूमिका
इस यात्रा में एक बात ने विशेष रूप से प्रभावित किया। पूरे रास्ते और पहाड़ियों के आसपास कहीं भी इंसानों द्वारा फेंका गया कूड़ा-कचरा नजर नहीं आया। प्राकृतिक दृश्यों के बीच प्लास्टिक की बोतलें, खाने के पैकेट या दूसरी गंदगी दिखाई न देना अपने आप में सुखद अनुभव था।
बेशक, एक यात्रा के अनुभव के आधार पर पूरे अमेरिका के बारे में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। लेकिन जिन स्थानों से हम गुजरे, वहां प्रकृति के प्रति जिम्मेदार व्यवहार का प्रभाव साफ दिखाई दिया। सड़क किनारे और पहाड़ियों के बीच सफाई बनी रहना बताता है कि सार्वजनिक स्थानों की देखभाल में नागरिकों के व्यवहार की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
कैट्सकिल क्षेत्र में प्राकृतिक भूमि और जलस्रोतों के संरक्षण के लिए सरकारी संस्थाएं, स्थानीय समुदाय और प्रकृति संरक्षण से जुड़े संगठन काम करते हैं। न्यूयॉर्क सिटी का पर्यावरण संरक्षण विभाग उन भूमि क्षेत्रों और जलग्रहण क्षेत्रों की सुरक्षा करता है, जो शहर की पेयजल व्यवस्था से जुड़े हैं। दूसरी ओर, कैट्सकिल माउंटेन क्लब जैसे संगठन पैदल घूमने के रास्तों के निर्माण, रखरखाव और जिम्मेदार आउटडोर गतिविधियों को बढ़ावा देने में योगदान देते हैं।
इन संस्थाओं का काम केवल पर्यटकों को घूमने की सुविधा देना नहीं है। रास्तों को इस तरह विकसित करना भी इसका हिस्सा है कि लोग प्रकृति का आनंद ले सकें और प्राकृतिक परिवेश को अनावश्यक नुकसान न पहुंचे।
यहां की व्यवस्था से यह सीख मिलती है कि किसी प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए केवल सरकारी नियम पर्याप्त नहीं होते। जरूरी है कि लोग भी उसे अपनी साझा संपत्ति समझें। जंगल, पहाड़, नदियां और जलाशय किसी एक व्यक्ति के नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों की विरासत होते हैं।
पालमर हिल ट्रेल: प्रकृति और इतिहास को करीब से जानने का रास्ता
इस पूरे क्षेत्र में पालमर हिल ट्रेल प्रकृति प्रेमियों और पैदल घूमने के शौकीनों के लिए एक खास जगह है। यह न्यूयॉर्क स्टेट के डेलावेयर काउंटी में एंडीज कस्बे के पास स्थित है। हम भी अपनी इस यात्रा के दौरान कैट्सकिल के पालमर हिल ट्रेल पहुंचे थे।
जानकारी के अनुसार, इस ट्रेल की कुल लंबाई लगभग 3.7 मील यानी करीब छह किलोमीटर है। यहां रास्तों के अलग-अलग विकल्प उपलब्ध हैं, इसलिए पर्यटक अपनी सुविधा और शारीरिक क्षमता के अनुसार छोटी या लंबी पैदल यात्रा चुन सकते हैं।
ट्रेल का एक हिस्सा पुराने फार्महाउस और खलिहान की नींव के अवशेषों तक जाता है। इसके आगे अपर मीडो लूप और लोअर मीडो लूप नाम के दो रास्ते हैं। इनके माध्यम से खुले घास के मैदानों, पेड़ों से घिरे हिस्सों और आसपास की पहाड़ियों के खूबसूरत नजारों का आनंद लिया जा सकता है।
यहां की खासियत सिर्फ पहाड़ी दृश्य नहीं हैं। रास्ते में पुराने पत्थरों की दीवारें, ऐतिहासिक इमारतों की नींव के अवशेष, पेड़ों की पुरानी कतारें और छोटी जलधाराएं भी मिलती हैं। इससे यह जगह प्रकृति के साथ स्थानीय ग्रामीण इतिहास को जानने का अवसर भी देती है।
इस ट्रेल से कैट्सकिल की कई प्रमुख चोटियों और पहाड़ी श्रृंखलाओं के दृश्य दिखाई देते हैं। इनमें बाल्सम, ईगल, डबलटॉप, ग्राहम और बाल्सम लेक क्षेत्र की चोटियां शामिल हैं। खुले मैदानों से दिखाई देने वाला विस्तृत पहाड़ी दृश्य इसकी खास पहचान है।
इस ट्रेल को 2014 में सार्वजनिक उपयोग के लिए खोला गया था। इसे कैट्सकिल माउंटेन क्लब ने न्यूयॉर्क सिटी के पर्यावरण संरक्षण विभाग और एंडीज क्षेत्र के सहयोग से विकसित किया। क्लब ने ट्रेल की योजना बनाने, उसे तैयार करने और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी निभाई। इस साझेदारी का उद्देश्य प्राकृतिक भूमि को सुरक्षित रखते हुए लोगों को जिम्मेदार तरीके से प्रकृति के करीब आने का अवसर देना है।
यहां की व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि संरक्षण और जनसुविधा को एक-दूसरे का विरोधी नहीं माना गया। प्राकृतिक भूमि की सुरक्षा के साथ पैदल घूमने के लिए रास्ते विकसित किए गए, ताकि लोग प्रकृति को देख सकें, उससे जुड़ सकें और उसके संरक्षण का महत्व समझ सकें।
प्रकृति को बचाने का संदेश, जो अपने शहरों तक पहुंचना चाहिए
कैट्सकिल की पहाड़ियों में बिताए इन पलों ने एक बार फिर यह सोचने को मजबूर किया कि प्रकृति की खूबसूरती केवल उसके विशाल पहाड़ों, शांत जलाशयों या रंग बदलते पेड़ों में नहीं होती। उसकी खूबसूरती इस बात में भी है कि इंसान उसके साथ कैसा व्यवहार करता है।
किसी सुंदर स्थान पर पहुंचकर वहां कचरा छोड़ देना, पेड़ों को नुकसान पहुंचाना या सार्वजनिक संपत्ति को अपनी निजी सुविधा के लिए इस्तेमाल करना उस प्राकृतिक सौंदर्य को धीरे-धीरे नष्ट कर देता है, जिसके लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। इसके विपरीत, यदि हर व्यक्ति अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाए तो किसी भी स्थान की सुंदरता लंबे समय तक बनी रह सकती है।
भारत में भी प्राकृतिक सौंदर्य की कोई कमी नहीं है। हिमालय से लेकर पश्चिमी घाट तक, नदियों से लेकर झीलों और जंगलों तक, हमारे पास प्रकृति की अनमोल धरोहर है। जरूरत है कि हम उसे देखने और उसका आनंद लेने के साथ-साथ उसे सहेजने की जिम्मेदारी भी समझें।
कैट्सकिल की पहाड़ियों से लौटते हुए यही अनुभव सबसे ज्यादा साथ रहा कि प्रकृति हमें बिना किसी भेदभाव के अपनी सुंदरता देती है। बदले में वह हमसे बहुत कुछ नहीं मांगती। बस इतना चाहती है कि हम उसके घर को अपना कूड़ाघर न बनाएं।