आगरा में कृष्ण जन्मोत्सव और गर्भ संस्कार कथा में गूंजे भक्ति-भाव और संस्कारों के स्वर
आगरा। शहर में रविवार का दिन आध्यात्मिक उल्लास, भक्ति और संस्कारों के संगम से भरा रहा। एक ओर श्री रामलाल वृद्ध आश्रम में श्रीमद् भागवत कथा के दौरान नंदोत्सव धूमधाम से मनाया गया, तो दूसरी ओर खतैना रोड स्थित गर्भ संस्कार मैटरनिटी होम में गर्भ संस्कार कथा के माध्यम से धर्म और विज्ञान का संगम देखने को मिला। दोनों ही आयोजनों में श्रद्धा, भक्ति और जीवन मूल्यों का दिव्य संदेश झलका।
नंदोत्सव में गूंजे जय जयकार, कृष्ण जन्म की लीलाओं ने मोहा मन
श्री रामलाल वृद्ध आश्रम में भागवत कथा के चौथे दिन नंदोत्सव बड़े हर्षोल्लास से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने राधा-कृष्ण की बाल लीलाओं पर झूमकर जयकारे लगाए। वृंदावन से पधारे कासनी गुरु गोपालाचार्य जी महाराज ने श्रीकृष्ण जन्म, माखन चोरी, दामोदर लीला और कालिया नाग मर्दन जैसी दिव्य लीलाओं का रसपान कराया।
आश्रम में श्री गिरिराज जी महाराज का अलौकिक श्रृंगार कर भक्ति का वातावरण निर्मित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के अध्यक्ष संजय गोयल, चेयरमैन संदेश जैन, अरुण अग्रवाल (सीए), जयराम दास होतचंदानी आदि ने संयुक्त रूप से पूजा-अर्चना कर किया।
दीप प्रज्ज्वलन में प्रदीप गर्ग, परम गर्ग, विशाल गर्ग आदि ने सहयोग किया। नंद बाबा और यशोदा मैया के रूप में शिव प्रसाद और ज्योति, वहीं वासुदेव-देवकी के रूप में नंदकिशोर दंपती ने लीला रूप धारण कर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। बॉबी ने श्रृंगार व्यवस्था संभाली, जबकि संचालन व संयोजन जितेंद्र सारस्वत और धीरज चौधरी ने किया। इस अवसर पर रेखा अग्रवाल, कविता अग्रवाल, आरती बंसल, मनीष, विष्णु, रजनीश, प्रदीप, सौरभ आदि उपस्थित रहे।
‘गर्भ संस्कार कथा’ में बताया गया कि संस्कारवान पीढ़ी बनाती है श्रेष्ठ समाज
प्रतापनगर, खतैना रोड स्थित गर्भ संस्कार मैटरनिटी होम में रविवार को श्री चंद्रभान साबुन वाले सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में “गर्भ संस्कार कथा” का आयोजन हुआ।
वृंदावन के भागवत आचार्य श्री गौरदास जी महाराज ने सनातन धर्म के 16 संस्कारों में “गर्भाधान संस्कार” को सर्वश्रेष्ठ बताते हुए कहा कि गर्भ संस्कार का पालन करने से मां के गर्भ से जन्म लेने वाला बालक यशस्वी, संस्कारी और प्रतिभावान बनता है।
उन्होंने समझाया कि गर्भाधान करते समय माता-पिता का व्यवहार हंसमुख और भक्तिपूर्ण होना चाहिए। गर्भधारण के शास्त्रीय समय, ग्रहण और तिथियों का पालन न करने से अपंगता जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
गौरदास जी महाराज ने कहा कि गर्भ के चार से छह माह के बीच बच्चा सुनने लगता है, इसलिए उस दौरान माता-पिता के विचार और व्यवहार अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
उन्होंने अशोक गोयल की प्रेरणा से आगरा में स्थापित हो रहे गर्भ संस्कार एवं मैटरनिटी होम को समाज के लिए उत्तम पहल बताया।
आरती में अशोक कुमार एडवोकेट, डा. सुनीता गर्ग, कान्ता माहेश्वरी, रश्मि गर्ग, किशन अग्रवाल, राजीव अग्रवाल, रमेश चंद्र अग्रवाल, मनोज होजरी, विजय गोयल, महावीर मंगल, राजीव जैन, नंदकिशोर गोयल सहित अनेक श्रद्धालु शामिल हुए।